*मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान में लापरवाही पर कलेक्टर श्री ऋतु राज सिंह सख्त: जिला शिक्षा अधिकारी सहित 10 जिला अधिकारियों को शोकॉज नोटिस
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*शिविरों एवं भ्रमण के प्रति उदासीनता पर गिरी गाज; 3 दिन में मांगा जवाब, समय-सीमा में जवाब न देने पर होगी कार्रवाई*
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मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन और जन-समस्याओं के समाधान को लेकर कलेक्टर श्री ऋतु राज सिंह सख्त रुख अपनाए हुए है। अभियान के तहत आयोजित शिविरों एवं क्षेत्रीय भ्रमण के प्रति उदासीनता तथा वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशों की अवहेलना करने पर कलेक्टर श्री ऋतु राज सिंह ने कड़ा रूख अपनाते हुए 10 जिला स्तरीय अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी किए हैं। जिसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री विवेक कुमार गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजीव सूर्यवंशी, वन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री ए.के. श्रीवास्तव, जिला योजना अधिकारी श्रीमती लीला रायकवार, उच्च शिक्षा विभाग के प्राचार्य श्री रतन सिंह अनारे, वाणिज्यिक कर अधिकारी श्री शिव नंदन तिवारी, जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी श्री दीपक दास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक श्री शैलेन्द्र अत्रे, जिला उद्यम अधिकारी श्री रतनसिंह डावर, जिला कौशल विकास अधिकारी/प्राचार्य (तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग) श्री राजेश उईके तथा जिला खेल और युवा कल्याण अधिकारी श्रीमती स्नेहा गाडरिया शामिल हैं।
कलेक्टर श्री ऋतु राज सिंह ने मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान में लापरवाही को पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम-1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन माना है। सभी अधिकारियों को नोटिस प्राप्ति के 3 दिवस के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने कार्य की वास्तविक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। समयावधि में समाधानकारक उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में संबंधितों के विरुद्ध एकपक्षीय अनुशासनात्मक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आदेश में उल्लेख है कि मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत 26 सितम्बर 2026 को सोनकच्छ विकासखंड के भौरासा में जनसंवाद एवं शिविर का आयोजन किया गया था। शासन एवं जिला प्रशासन के निर्देशानुसार सभी संबंधित जिला अधिकारियों को क्षेत्र का भ्रमण कर जनसंवाद करना तथा अपने विभाग से संबंधित संस्थानों, कार्यालयों, योजनाओं एवं उद्योगों का सघन निरीक्षण करना था। इस संबंध में साप्ताहिक समय-सीमा बैठक के माध्यम से भी पूर्व में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा जनसंवाद व निरीक्षण की अद्यतन जानकारी न तो शिविर में प्रस्तुत की गई और न ही कलेक्टर कार्यालय को प्रेषित की गई।









