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  • सांप निकलने के बाद लकीर पीट रहे नेताजी    

    जब बार-बार के सर्वे में स्पष्ट हो गया था की मंत्री और विधायक किसी हालत में नहीं जीतेंगे उसके बाद भी मंत्री और विधायक ने वहीं से टिकट लिया जहां सबसे ज्यादा नाराजगी थी पूरे प्रदेश में यही हालात रहे तो हमारे देवास जिले में दो बार के मंत्री रहे दीपक जोशी को पहली बार चुनाव लड़ रहे कांग्रेसी नेता मनोज चौधरी ने बड़ी सहायता से हरा दिया दूसरा सोनकच्छ से पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने भी राजेंद्र वर्मा को आसानी से हरा दिया प्रदेश में इन 2 सीटों पर सभी की नजर थी हाटपिपलिया से दो बार विधायक रहे मंत्री दीपक जोशी का पहले भी इतना ही विरोध था परंतु वे कम मत से चुनाव जीत गए थे इस बार मुगालते में रह गए मंत्री दीपक जोशी ने क्षेत्र में विकास कार्य तो किए थे परंतु उनके झूठे वादे और व्यवहार फिर तीन बार के विधायक रहने के बाद भी उनकी टीम कमजोर रही जबकि कांग्रेस प्रत्याशी के पास केवल व्यवहार मिलन सरिता और टीम के अलावा कुछ भी नहीं था मनोज चौधरी ने अपने पिता जिनको दीपक जोशी ने निर्दलीय चुनाव में हराया था का बदला ले ही लिया इधर सोनकच्छ में दो बार विधायक रहे राजन वर्मा का व्यवहार ही हार का कारण बना क्षेत्र में विपक्ष में रहने के बाद भी सज्जन वर्मा लगातार सक्रिय रहे अपने भाई अर्जुन वर्मा की दो बार हार के बाद भी हार नहीं मानी ग्रामीण जनता से सतत संपर्क और राजेंद्र वर्मा का घोर विरोध ही इनकी जीत का कारण रहा कहीं तो यह भी कहा जा रहा है कि हाटपिपलिया और सोनकच्छ से दीपक जोशी और राजेंद्र वर्मा हारे हैं ना कि मनोज चौधरी सज्जन वर्मा जीते हैं अब दोनों सीट पर भाजपा मंथन कर रही है पछताने से कुछ नहीं होता क्या सर्वे झूठा था कार्यकर्ता झूठे थे जब विरोध था तो टिकट की क्यों दिया हाटपिपलिया से तो दीपक जोशी ने नैतिकता से हार मान कर फिर क्षेत्र में चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं परंतु राजेंद्र वर्मा घ घर के हो गए ऐसा ही मंथन कांग्रेसमें देवास कन्नौद खातेगांव और बागली में चल रहा है देवास में पूर्व महापौर जय सिंह ठाकुर केवल अपने दम पर चुनाव लड़े इनका चुनाव प्रबंधन इनकी हार का कारण बना तो सब से बड़ी बात की सामने प्रत्याशी देवास महारानी गायत्री राजे पवार का होना था गायत्री राजे पवार के साथ एक अच्छी टीम और सफल चुनाव प्रबंधन के साथ देवास विकास का मुद्दा रहा उनके विरोधियों ने हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी परंतु कम समय में राजनीति में परिपक्व गायत्री राजे पवार उनके पुत्र महाराज विक्रम सिंह पवार ने हर मोर्चे पर मोर्चा संभाल अच्छी लीड के साथ जीत को कायम रखा कन्नौद खातेगांव से आशीष शर्मा ने भी अपनों से ही लड़ाई लड़कर अकेले अपनी टीम के साथ जीत हासिल की यहां कांग्रेस ने कैलाश कुंडल जैसे जीतने वाले नेता को छोड़ ओम पटेल को मौका दिया परंतु ओम पटेल भाजपा के बागियों का भी लाभ नहीं उठा सके आशीष शर्मा के सरल सहज व्यवहार ने उनकी जीत आसान कर दी बागली में भाजपा ने दो बार जीते विधायक चंपालाल देवड़ा का टिकट काटकर नए चेहरे पहाड़ सिंह कनौजिया को आजमाया तो कांग्रेसमें जिलाध्यक्ष श्याम होलानी के खास कमल वास्कले को दूसरी बार मौका दिया कांग्रेस जिला प्रमुख होलानी पुरे समय इस सीट जिताने में ही लगे रहे पर उनकी किस्मत में हार ज्यादा हे वही हुआ पहाड़सिंह की पहाड लीड से वास्कले हार गये बीजेपी का नया चेहरा काम कर गया अब यहा कांग्रेस हार के कारण पर मंथन कर रही है क्या होलानी का प्रबंधन कमजोर रहा पुरे जिले में प्रचार की जगह बस बागली तक सीमित हार का हार भी होलानी को ही पहनना चाहिये जिले में सज्जन वर्मा जयसिंह ठाकुर मनोज चौधरी ओम पटेल ने चुनाव अपने दम पर लड़ा प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर के बाद भी जो चुनाव हारे कमजोर प्रबन्धन और भी कारण रहे परन्तु जो भाजपा के विधायक सत्ता विरोधी लहर में अच्छे मत से जीते तो कुशल प्रबन्धन लगातार विधानसभा में सक्रियता विकास कार्य रहे हे अब हार का मंथन मतलब सांप निक्लने के बाद लकीर पीटना हे