ढाई साल बाद भी खाली कुर्सी… देवास विकास प्राधिकरण को अध्यक्ष का इंतजार”।

देवास विकास प्राधिकरण को अब अध्यक्ष का इंतजार

ढाई साल बाद भी खाली कुर्सी, दावेदारों की भागदौड़ तेज; जनता पूछ रही—कब मिलेगा विकास को नया नेतृत्व?
देवास। प्रदेश में मोहन सरकार को ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन शासन के कई प्रमुख पदों पर अब भी राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार बना हुआ है। देवास विकास प्राधिकरण भी इसका एक बड़ा उदाहरण है। वर्ष 2023 में नई सरकार बनने के बाद प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष को हटाया गया, लेकिन उसके बाद अब तक नया अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया। नतीजा यह रहा कि लंबे समय से प्राधिकरण अधिकारी-कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है।
देवास विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दावेदारों के नाम अंदर-बाहर होने का सिलसिला जारी है। राजनीतिक गलियारों में बहादुर मुकाती, रघु भदौरिया, राजेश यादव और ओम जोशी जैसे नामों की चर्चा बताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार और संगठन को ही करना है।

पूर्व अध्यक्ष राजेश यादव के बाद खाली है कुर्सी

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में राजेश यादव को देवास विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया था। उनका कार्यकाल चल ही रहा था कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अध्यक्ष का पद खाली हो गया। इसके बाद से अब तक स्थायी राजनीतिक नियुक्ति नहीं हो सकी।
लंबा समय बीतने के बाद अब राजनीतिक कार्यकर्ताओं में भी सवाल उठने लगे हैं कि यदि किसी एक नेता को अध्यक्ष नहीं बनाना है तो कम से कम किसी स्थानीय कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी देकर प्राधिकरण को सक्रिय राजनीतिक नेतृत्व क्यों नहीं दिया जा रहा?

एक पद और अनेक दावेदार
राजनीति में पद सीमित और दावेदार अनेक होना कोई नई बात नहीं है। देवास विकास प्राधिकरण अध्यक्ष पद को लेकर भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। चर्चा यह भी है कि यदि अध्यक्ष पद किसी एक दावेदार को मिलता है तो अन्य कार्यकर्ताओं को उपाध्यक्ष अथवा संचालक मंडल जैसे पदों पर जिम्मेदारी देकर संगठन में संतुलन बनाया जा सकता है।
लेकिन सवाल केवल राजनीतिक नियुक्ति का नहीं है। सवाल यह भी है कि देवास विकास प्राधिकरण का नेतृत्व ऐसा कौन करे, जो प्राधिकरण को केवल पद नहीं बल्कि देवास के विकास का माध्यम बनाए।

पुराने चेहरों को ही बार-बार जिम्मेदारी?

भाजपा संगठन में विभिन्न पदों और जिम्मेदारियों को लेकर भी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा होती रही है कि कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पहले से सक्रिय अथवा पूर्व में पद संभाल चुके नेताओं और उनके परिवारों के आसपास ही घूमती दिखाई देती हैं।
भाजपा जिला अध्यक्ष रायसिंह सेंधव का उदाहरण दिया जाता है, जिन्होंने पूर्व में देवास विकास प्राधिकरण अध्यक्ष और मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष जैसे दायित्व संभाले और बाद में जिला अध्यक्ष बने।
इसी तरह महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, एल्डरमैन तथा विभिन्न समितियों में भी नए चेहरों के साथ पुराने राजनीतिक चेहरों को जिम्मेदारी मिलने को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा रहती है।
आलोचकों का कहना है कि संगठन में यदि नए और जमीनी कार्यकर्ताओं को भी अवसर मिले तो इससे कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा। वहीं पार्टी के स्तर पर इसे संगठनात्मक निर्णय माना जाता है।

देवास के विकास में प्राधिकरण की बड़ी भूमिका

देवास विकास प्राधिकरण का इतिहास देखें तो ऐसे कई अध्यक्ष रहे हैं जिनके कार्यकाल को आज भी लोग याद करते हैं।
स्वर्गीय चंपालाल गोस्वामी के कार्यकाल को प्राधिकरण के बेहतर दौर के रूप में याद किया जाता है। मुखर्जी नगर, विकास नगर और आवास नगर सहित कई क्षेत्रों में विकास और प्लॉट आवंटन के कार्यों का उल्लेख आज भी होता है।
इसके बाद जयसिंह ठाकुर के कार्यकाल में भी प्राधिकरण से जुड़े विकास कार्यों की चर्चा रही। वहीं मनोज राजानी के कार्यकाल को भी प्राधिकरण की संपत्तियों के आवंटन और सुपर मार्केट जैसे विकास कार्यों के लिए याद किया जाता है।
इसके बाद शरद पाचूनकर को भी प्राधिकरण की जिम्मेदारी मिली। वहीं वर्तमान जिला अध्यक्ष रायसिंह सेंधव के कार्यकाल में ग्रामीण क्षेत्रों और नई विकसित होती कॉलोनियों तक प्राधिकरण की गतिविधियों का विस्तार हुआ।
राजेश यादव के कार्यकाल में भी कई योजनाओं को आगे बढ़ाने के प्रयास हुए, लेकिन सरकार बदलने के साथ ही अध्यक्ष पद खाली हो गया।

अधिकारी राज में कछुआ गति से चल रहा विकास?

वर्तमान में प्राधिकरण का प्रभार प्रशासनिक अधिकारियों के पास है। नगर निगम आयुक्त और जिला प्रशासन के स्तर पर प्राधिकरण का कामकाज संचालित हो रहा है।
सवाल यह है कि जब राजनीतिक सरकार है और पार्टी के हजारों कार्यकर्ता सक्रिय हैं तो आखिर देवास विकास प्राधिकरण जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में लंबे समय से राजनीतिक नेतृत्व क्यों नहीं दिया गया?
स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्राधिकरण को केवल कार्यालयीन प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय विकास की स्पष्ट योजना के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

आम आदमी के लिए आखिर क्या है प्राधिकरण का मतलब?
देवास विकास प्राधिकरण की मूल भावना ही शहर के सुनियोजित विकास के साथ आम लोगों को अपेक्षाकृत उचित दरों पर आवास और भूखंड उपलब्ध कराने की रही है।
लेकिन आज स्थिति यह है कि देवास में अपना छोटा सा मकान बनाना भी आम परिवार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। शहर से लगी नई कॉलोनियों में जमीन के बढ़ते दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जिस प्राधिकरण की स्थापना सुनियोजित विकास और आमजन को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई थी, क्या वह अपने मूल उद्देश्य पर उतना काम कर पा रहा है?

प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाएं जरूर हैं, लेकिन जरूरतमंदों तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचना भी एक महत्वपूर्ण सवाल है। पात्रता और लाभार्थियों की जांच व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
अब इंतजार है ऐसे अध्यक्ष का जो केवल कुर्सी नहीं, जिम्मेदारी संभाले
देवास विकास प्राधिकरण के पास आज भी शहर के विकास के लिए बहुत कुछ करने की संभावनाएं हैं। नई कॉलोनियों की योजना, सस्ती आवासीय जमीन, व्यवस्थित विकास, खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग और मध्यम एवं गरीब वर्ग के लिए आवास—इन सभी क्षेत्रों में प्राधिकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अब देखना यह है कि सरकार किसे देवास विकास प्राधिकरण की कमान सौंपती है।
जरूरत ऐसे अध्यक्ष की है जो केवल राजनीतिक नियुक्ति बनकर न रहे, बल्कि देवास के विकास, आम जनता और गरीब-मध्यम वर्ग के छोटे से घर के सपने को पूरा करने की दिशा में काम करे।

आखिर सरकारें आती-जाती रहेंगी, राजनीतिक चेहरे भी बदलते रहेंगे, लेकिन देवास विकास प्राधिकरण का काम देवास के स्थायी विकास से जुड़ा है।
अब शहर इंतजार कर रहा है—कब खाली कुर्सी पर बैठेगा ऐसा अध्यक्ष, जो प्राधिकरण को फिर से विकास की रफ्तार दे सके?

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