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  • प्राइवेट पेंशनर संघ की  4 अक्टूबर बुधवार को आवश्यक बैठक

    प्राइवेट पेंशनर संघ की 4 अक्टूबर बुधवार को आवश्यक बैठक

    सरकार द्वारा सभी वर्गों की मांगे मानी जा रही है ।लेकिन 1995 प्राइवेट पेंशनर्स के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। शासन द्वारा लगातार उनकी उपेक्षा की ले जा रही है ।जिसको लेकर प्राइवेट पेंशनर महत्वपूर्ण फैसला लेने जा रहे हैं और एक आवश्यक बैठक मेंड़की रोड स्थित मयूर पार्क में भोलेनाथ मंदिर में 4 अक्टूबर बुधवार को शाम 5:00 बजे रखी गई है। समस्त पेंशनर प्राइवेट 1995 को बैठक में शामिल होने की अपील पेंशनर संघ द्वारा की गई है।

  • ज़ी अनमोल सिनेमा टीवी स्क्रीन्स पर पहली बार लेकर आ रहा है महाकवि कालिदास की भव्य रचना ‘शकुंतला’ जिसका मुख्य किरदार निभाया है सामंथा रुथ प्रभु ने

    देखिये यह पुराणिक प्रेम कथा, जिससे जुड़ा है हमारे देश 'भारत' का नाम, रविवार 1 अक्टूबर शाम 7 बजे, सिर्फ ज़ी अनमोल सिनेमा पर अपने ब्रांड के वादे – ‘आपकी फैमिली का सिनेमा हॉल’ के साथ ज़ी अनमोल सिनेमा ने लगातार ऐसा धमाकेदार मनोरंजन पेश किया है, जो देशभर के दर्शकों के दिलों में सीधे उतर गया। ज़ी अनमोल सिनेमा की विशाल लाइब्रेरी, अलग-अलग तरह की फिल्में और पूरे परिवार को पसंद आने वाली सामग्री के चलते यह चैनल ऐसे दर्शकों का पसंदीदा बन गया है, जो अपने घरों में आराम से बैठकर बढ़िया मनोरंजन चाहते हैं। अपने इसी वादे पर खरा उतरता हुआ यह चैनल ला रहा है भारत की अनमोल कहानी शकुंतला, जिसमे मुख्य किरदार में नज़र आएँगी टैलेंटेड अदाकारा सामंथा। देखिये कालिदास की कालजयी रचना पर आधारित फिल्म शकुंतला टीवी पर पहली बार, रविवार, 1 अक्टूबर शाम 7 बजे। दुष्यंत और शकुंतला की प्रेम कहानी ने सदियों से दर्शकों के दिलों में दिलचस्पी जगाई है। फिल्म ‘शकुंतला’ दर्शकों को इसी मनमोहक युग में ले जाती है, जिसे बड़े रोमांचक तरीके से दिखाया गया है। हर बारीकी को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किए गए सेट, बेहतरीन परिधान और शानदार सिनेमैटोग्राफी के साथ इस फिल्म ने हमें एक ऐसी दुनिया दिखाई, जो दिलचस्प होने के साथ- साथ बेहद आकर्षक भी है। इस कहानी की गहराई में ऐसे जज़्बात हैं, जो इंसानी अनुभवों से सीधे जुड़ जाते हैं। शकुंतला और राजा दुष्यंत का विवाह तो हो जाता है लेकिन एक साधु के श्राप के कारण दुष्यंत शकुंतला के बारे में सब कुछ भूल जाते हैं। यह एक ऐसी औरत के सफर की कहानी है जिसे अपने प्यार से दोबारा मिलने के लिए हर तरह के जज़्बात, दर्द और सब्र से गुज़रना पड़ता है। देखिए भारत की अनमोल कहानी, शकुंतला टेलीविजन पर पहली बार रविवार 1 अक्टूबर को शाम 7 बजे, ज़ी अनमोल सिनेमा पर और रविवार 15 अक्टूबर को रात 8 बजे, ज़ी सिनेमा और जी सिनेमा एचडी पर।

  • कलेक्‍टर श्री गुप्‍ता ने एक आरोपी को किया जिलाबदर

    कलेक्‍टर श्री गुप्‍ता ने एक आरोपी को किया जिलाबदर

    ———- देवास कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री ऋषव गुप्‍ता ने मध्य प्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत आरोपी संतोष पिता हरिप्रताप मीणा उम्र 42 साल निवासी भंवरास थाना खातेगांव को एक वर्ष के लिए जिला बदर किया है। कलेक्‍टर श्री गुप्‍ता ने आदेश दिया है कि आरोपी आदेश प्राप्ति से 24 घण्टे के भीतर जिला देवास एवं उसके आस पास के सीमावर्ती जिलों इन्दौर, उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, हरदा, खण्डवा, खरगोन की राजस्व सीमाओं से बाहर चले जाए तथा जिला दंडाधिकारी न्यायालय की बिना पूर्व अनुज्ञा के प्रवेश नहीं कर सकेगा।

  • दो अलग-अलग प्रकरणों में‘‘ कच्ची शराब का अवैध परिवहन करने वाले आरोपी को न्यायालय  ने  दी 13 माह ओर 1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा

    दो अलग-अलग प्रकरणों में‘‘ कच्ची शराब का अवैध परिवहन करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दी 13 माह ओर 1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा

    अवैध शराब बेचने वाले में कानून का डर हो और अवैध शराब का व्यापार काम हो अब न्यायालय सख्त सजा देने लगा है ऐसे ही न्यायालय ने दो अलग-अलग मामले में अवैध शराब विक्रेता को सजा सुनाई है इस संबंध में राजेन्द्र सिंह भदौरिया, जिला लोक अभियोजन अधिकारी द्वारा बताया गया कि दिनांक 16.01.2021 की शाम करीब 6ः00 बजे थाना नेमावर के उपनिरीक्षक शिवमूरत यादव द्वारा हमराह फोर्स के साथ नेमावर में अवैध शराब की दबिश देने हेतु रेस्ट हाउस चौराहा पहुॅचें तभी मुखबिर द्वारा उन्हें सूचना मिली कि अमरजीत सिंह शासकीय शौचालय के समाने सीकलीगर मोहल्ला में 02 कैनों (कुप्पी) में कच्ची हाथ भट्टी की शराब लेकर खडा है ,और कहीं जाने वाला है। मुखबिर सूचना पर विश्वास करते हुये वह हमराही फोर्स और पंचो को साथ लेकर शासकीय शौचालय के सामने पहुचे, जहॉ घेराबंदी कर अभियुक्त को पकडा। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम अमरजीत सिंह बताया। उसके कब्जे से 02 प्लास्टिक की 30-30 लीटर की कैने मिली जिसमें कुल 60 लीटर कच्ची शराब पायी गयी। आरोपी से शराब रखने व लाने-लेजाने का लायसेंस पूछने पर उसने कोई लायसेंस नहीं होना बताया। शराब की मात्रा 60 लीटर होने के कारण अभियुक्त अमरजीत सिंह के विरूध आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) का अपराध पंजीबद्ध किया गया। आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।     माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला देवास द्वारा निर्णय पारित कर आरोपी अमरजीत सिंह पिता नैनसिंह भाटिया उम्र 25 साल नि0 सीकलीगर मोहल्ला नेमावर को आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) में दोषी पाते हुये 13 माह के कारावास व 25000/- रूपये के अर्थदण्ड की सजा से दण्डित किया गया।   उक्त प्रकरण में शासन की ओर से अभियोजन का सफल संचालन श्री रईस शेख, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, जिला देवास द्वारा किया गया एवं उक्त प्रकरण में आरक्षक गोकुल भाटी का विषेष सहयोग रहा। इसी तरह एक और प्रकरण में ‘‘ अवैध देशी शराब का परिवहन करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दी 1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है इसके बारे में जानकारी देते हुए राजेन्द्र सिंह भदौरिया। जिला लोक अभियोजन अधिकारी द्वारा बताया गया कि दिनांक 03.04.2018 को दोपहर करीब 03ः00 बजे थाना कन्नौद के उपनिरीक्षक अर्जुन सिंह राठौर को मुखबिर से सूचना प्राप्त होने पर हमराह फोर्स और राहगीर पंचानों को साथ लेकर बहिरावद रोड कन्नौद पर महेन्द्र पंडा के खेत के समाने मेन रोड पर पहुचें, जहॉ बहिरावद की ओर से एक व्यक्ति डिस्कवर मोटर साईकिल एम.पी.41 एम.एम.0437 लेकर आया। जिस पर एक बडी थैली भरी बंधी हुई थी, जिसे घेराबंदी कर पकडा गया। मोटर साईकिल पर आये व्यक्ति से नाम पता पूछने पर उसने अपना नाम रियाज खॉ उर्फ गोलू नि0 अजनास का होना बताया। मोटर साईकिल पर बंधी थैली को चैक करने पर थैली में 06 पेटी देशी प्लेन शराब पाई गई जिसमें कुल देशी प्लेन शराब के 325 क्वार्टर थे। उक्त शराब रखने व लाने-लेजाने का लायसेंस पूछने पर रियाज ने नहीं होना बताया। आरोपी रियाज से उक्त शराब को जप्त कर जप्ती पंचनामा बनाया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर गिरफ्तारी पंचनामा बनाया गया। आरोपी का कृत्य आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत दण्डनीय होने से अपराध पंजीबद्ध किया गया। आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।     माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला देवास द्वारा निर्णय पारित कर आरोपी रियाज खॉ उर्फ गोलू पिता सत्तार खॉ मंसूरी नि0 अजनास को आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) में दोषी पाते हुये 01 वर्ष के कठोर कारावास व 25000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।   उक्त प्रकरण में शासन की ओर से अभियोजन का सफल संचालन श्री रईस शेख, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, जिला देवास द्वारा किया गया एवं उक्त प्रकरण में आरक्षक गोकुल भाटी का विषेष सहयोग रहा।        

  • छोटे राज्यों के गठन में कैसी बुराई?                                 अतुल मलिकराम,           राजनीतिक रणनीतिकार

    छोटे राज्यों के गठन में कैसी बुराई? अतुल मलिकराम, राजनीतिक रणनीतिकार

    स्वतंत्रता से पूर्व भारत 17 प्रांतों और 584 रियासतों में बंटा हुआ था। इसके पश्चात् स्वतंत्रता के समय 15 अगस्त 1947 को भारत में 12 राज्य थे। 26 जनवरी 1950 को जब भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना, तब तक हैदराबाद, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, मणिपुर और त्रिपुरा जैसे राज्य भी भारतीय संघ का हिस्सा बन चुके थे। फिलहाल भारत 28 राज्यों और 8 केंद्र शाषित राज्यों का एक संघ है। यह इतिहास और वर्तमान बताने के पीछे सिर्फ एक सवाल है कि क्या भारत के सर्वांगीण विकास के लिए अन्य जरुरी राज्यों का गठन नहीं किया जा सकता? हालाँकि, यह प्रश्न नया नहीं है। हमने देखा है कि जब माँग उठी है और जरुरत लगी है, तो मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, बिहार से झारखंड जैसे राज्यों को अलग कर दिया गया है। मैं समझता हूँ कि छोटे राज्यों का गठन, कुछ बेहतरीन फैसलों में से एक है, जिस पर गंभीरता से विचार करने और कदम उठाने की जरुरत है। यह सुरक्षा और प्रशासनिक, दोनों ही दृष्टि से एक उत्तम विचार साबित हो सकता है। हालाँकि, त्रिपुरा जैसे राज्य जो पहले से ही छोटे हैं, या पंजाब जैसे राज्य जिसे भारत की रोटी की टोकरी कहा जाता है, के विभाजन की बातें बेमतलब ही मालूम पड़ती हैं। लेकिन पिछड़ेपन का पर्याय बन चुके और यूपी व एमपी के बीच पिसने को मजबूर, बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को पृथक करने में कोई गुरेज नज़र नहीं आता। इसी प्रकार क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्यों को विधिवत छोटे राज्यों में तब्दील किया जा सकता है। क्षेत्रफल के हिसाब से भारत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्णाटक, उड़ीसा या बंगाल जैसे बहुत से बड़े राज्य हैं, जिन्हें फिलहाल जिस कुशलता के साथ संचालित किया जा रहा है, उसे एक या दो भागों में विभाजित कर के, प्रशासनिक स्तर पर अधिक कुशलता के साथ संचालित और विकसित क्षेत्रों में तब्दील किया जा सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के एक लेख में मैंने पढ़ा कि यूपी यदि एक देश होता, तो जनसंख्या के हिसाब से विश्व का चौथा सबसे बड़ा मुल्क होता। आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि जनसंख्या या क्षेत्रफल के हिसाब से देश के ऐसे सघन राज्यों की आबादी को या अंतिम व्यक्ति तक सरकारी या प्रशासनिक सुविधा कैसे पहुँचाई जाती होगी। सरकारी सुविधा या प्रशासनिक सेवाएँ मिलती भी होंगी या हैं कि नहीं, यह भी एक अध्यन का विषय हो सकता है। हमारे सामने इस बात के भी पर्याप्त प्रमाण है कि छोटे राज्य, लगभग हर क्षेत्र में बेहतर व अच्छा प्रदर्शन करने में सफल हुए हैं। सरकारी आँकड़ें बताते हैं कि तत्कालीन नवनिर्मित राज्य उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ अपने मूल राज्यों यानी यूपी और मध्य प्रदेश की तुलना में आर्थिक रूप से 2004-05 से 2008-09 के बीच तेजी से बढ़े। यह क्षेत्रफल के हिसाब से सम्बंधित संसाधनों के बेहतर विकेंद्रीकरण के कारण संभव हो सका था। मैं मानता हूँ कि हमें संवैधानिक रूप से लोकतान्त्रिक विकेन्द्रीकरण पर भी विचार करना चाहिए। यह एक सामान्य नागरिक को सत्ता में भागीदारी का अवसर भी देगा और हर एक नागरिक की आवश्यकता के अनुरूप, कार्यप्रणाली विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा, बशर्ते राजनीतिक दलों के निजी लाभ को किनारे रखकर, सिर्फ देश के सार्वभौमिक विकास को केंद्र में रखा जाए।

  • मैं हूँ ना !!  – अतुल मलिकराम

आप सिर्फ काम पर फोकस करें, बाकी टेंशन कंपनी पर छोड़ दीजिए

    मैं हूँ ना !!  – अतुल मलिकराम आप सिर्फ काम पर फोकस करें, बाकी टेंशन कंपनी पर छोड़ दीजिए

    एक कामकाजी आम नागरिक सबसे ज्यादा वक्त कहाँ बिताता है? घर, मार्केट या रिश्तेदारों में? शायद इनमें से कहीं नहीं… क्योंकि दिन में उसका सबसे अधिक समय उसके ऑफिस या काम की जगह पर ही जाता है। अब एक सामान्य कामकाजी इंसान के पास कितनी तरह की दिक्कतें या चिंताएँ होती हैं, इसका अंदाजा, इस लेख को पढ़ने वाले ज्यादातर लोग लगा सकते हैं। चिंताएँ भी विभिन्न प्रकार की होती हैं, जैसे परिवार की, परिजनों के भविष्य की, समय से पगार न मिलने की, अचानक छुट्टी की दरकार पूरी न होने की या सपनों की लम्बी कतार अधर में लटके होने की आदि। अब यदि एक व्यक्ति इन सभी चिंताओं के बीच कार्यस्थल पर काम करता है, तो क्या वह अपना सौ फीसदी दे पाने में सक्षम होता है? अधिकतर लोगों का जवाब न ही होगा। लेकिन यदि उसे कोई ऐसी कंपनी मिले, जहाँ ये सारी चिंताएँ, उसकी होकर भी उसकी न हो और सभी की जिम्मेदारी उसकी कंपनी ही उठाए.. तो! जी हाँ… सुनने में यह जितना खूबसूरत दिख रहा है, धरातल पर देखने में और भी खास नजर आ सकता है। यदि एक कंपनी का संस्थापक अपने कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों से जुड़ जाता है, तो वह उनके सुख-दुःख को समझता है और कई प्रकार से उन्हें सुलझाने की कोशिश करता है, जिससे उस कर्मचारी का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है और वह ज्यादा लगन और प्रोडक्टिविटी के साथ काम कर पाता है। इससे उसके और उसकी कंपनी, दोनों की उन्नति के रास्ते खुल जाते हैं। हम जानते हैं, आजकल दोस्त और रिश्तेदार सिर्फ कहने के लिए रह गए हैं। यह भी सच है कि कई लोग जो यह लेख पढ़ रहे हैं उन्हें बुरा लगेगा, पर यह एक कटु सत्य है। जब आप खुश हैं, तब सब आपके दरवाजे पर आएँगे, लेकिन जब आप दुखी होंगे, तब कोई नहीं आएगा और आता भी है तो बस दिखावे के लिए और कई बार तो दस बातें ऐसी कर जाने के लिए, जिससे आप और दुखी हो जाएँ। ऐसे में यदि कोई आपके दरवाजे आकर आपकी ओर अपनापन दिखाता है, तो उस दुःख से लड़ने की ताकत तो उसी वक़्त मिल जाती है, लेकिन यदि वह शुभचिंतक आपका बॉस हो, तो आप उस दुःख या पीड़ा से ऊपर आ जाते हैं। और यदि एक बॉस, जिसे आप न जाने कितने ही कारणों से कोसते हैं, उससे दूर भागते हैं, वही यदि आपका मसीहा बन जाए, तो फिर बात ही क्या…! इसलिए मैं पहल करना चाहता हूँ कि हर एक कंपनी के संस्थापक को अपनी कंपनी के कर्मचारियों से व्यक्तिगत रूप से जुड़ना चाहिए, ताकि उसके छत्रछाया में जो लोग भी काम कर रहे हैं, वो पूरे मन से काम कर सकें और एक अच्छा माहौल बनाएँ, ताकि काम के लिए एक अच्छा वातावरण तैयार हो सके। इससे आपके ऑफिस में कार्यरत लोगों के परिजनों को भी तसल्ल्ली रहती है कि उनका बेटा या बेटी एक सुरक्षित और अच्छे वातावरण में काम कर रहा है और उसकी तरक्की पर भी कोई आशंका नहीं होती। कुल मिलाकर देखें, तो एक सफल व्यवसाय के लिए, कामगारों के साथ संबंध विकसित करना बहुत आवश्यक होता है। एक ऐसी कंपनी जो अपने कर्मचारियों को समझती है, उनकी समस्याओं का समाधान करती है, उनके जीवन में उन्हें उत्तम बनाने के लिए संबंधों को मजबूत बनाती है, तो ज़ाहिर तौर पर ऐसी कंपनी हमेशा अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होती है। जब एक संस्थापक अपने कर्मचारियों के परिवार से मिलते हैं, तो उनके द्वारा दिए गए प्यार और समर्थन से सभी लोग आपस में एक समूह बन जाते हैं। एक अच्छे संबंध के साथ, लोग बेहतर काम करने के लिए मोटिवेट होते हैं, उनकी संभावनाओं को समझा जाता है, और वे अपनी क्षमताओं को बढ़ा पाते हैं। इससे कंपनी को उनके भरोसे, उत्साह, और निष्ठा का फायदा मिलता है और इससे कर्मचारियों के लिए कंपनी के प्रति लंबी अवधि तक की निष्ठा बनाए रखना भी आसान हो जाता है।