श्री कृ ष्ण ने कर्म भक्ति के साथ प्रकृति का संरक्षण करना सिखाया है-वंदना श्री

देवास। श्रीकृष्ण की लीलाओं में सबसेे बड़ी गोवर्धन लीला है। इस लीला के पीछे अनेक उद्ेश्य छिपे हुए हैं। श्री कृष्ण ने मनुष्य को प्रकृति से प्रेम करना सिखाया है। पृथ्वी पर प्रकृति सुदृढ रहेगी तभी अच्छी वर्षा होगी। इसीलिए श्री कृष्ण ने गोकुल वासियों से इंद्र की पूजा बंद करवाकर गिरिराज की पूजा करवाई, क्योंकि गिरिराज प्रकृति का संरक्षण करते हैं। कथा में गोवर्धन की विविधता का चित्रण किया तथा दृश्य के माध्यम से गोवर्धन की पूजा दिखाई। गो का एक अर्थ है इंद्रिया अर्थात इंद्रियों का वर्धन करना, दूसरा अर्थ ज्ञान अर्थात ज्ञान का संवर्धन करना। गो का एक अर्थ बुद्धि और स्वच्छता भी है। और गो का एक अर्थ प्रकृति भी है। इसीलिए गो अर्थात गाय माता में समूचे देवताओं का वास भी माना जाता है। भगवान कृष्ण ने गोवर्धन लीला के माध्यम से मनुष्य को प्रकृति के साथ जीना सिखाया। यह शाश्वत विचार कैलादेवी मंदिर में हो रही श्रीमद भागवत में बृज रत्न वंदना श्री ने व्यक्त करते हुए किये। कथा में गोवर्धन लीला के दृश्यमय वर्णन के साथ भगवान गोवर्धन की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई साथ ही छप्पन भोग लगाया गया। लगाए हुए भोग को कलाकारों ने समस्त श्रोताओं को प्रसाद के रूप में दिया। कृष्ण लीला में चीरहरण का चित्रण करते हुए महिलाओं को नदी की मर्यादा के बारे में बताया। रास लीला में बृज के कलाकारों ने श्रोताओं का मन मोह लिया। श्रीकृष्ण की रास लीला का यह सुंदर दृश्य अद्भुत दिखाई दे रहा था, श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए थे, कृष्ण के मथुरा जाने का प्रसंग इतना मार्मिक था कि श्रोताओं की आंखों से अश्रुधारा बह गई। कथा में कंस वध, उद्धव के ज्ञान के अहंकार का मर्दन तथा कृष्ण का सांदिपनी आश्रम उज्जैन में विद्याअध्ययन का वर्णन किया गया। कथा में विशेष रूप से इंदौर के समाज सेवी प्रेमचंद गोयल, खरगोन से विनोद महाजन, सत्येन्द्र जोशी, महेश अग्रवाल, संघ के प्रमुख कैलाश चंद्रावत, दिनेश तजेरा, मोहन विश्वकर्मा, धनेन्द्रसिंह, कालूसिंह चौधरी, सुंदरलाल शर्मा, कैलाश मिश्रा, राजेश तिवारी, अनिलसिंह, अखिलेश सेंगर, जुझारसिंह राठौर, वैश्य समाज से अशोक सोमानी, अमित गुप्तप्ता, सचिन मंगल, देविलाल पोरवाल, पवन गोयल, रजनीश पोरवाल, भानु अग्रवाल तथा पार्षद अजय तोमर, प्रवीण वर्मा, मुकेश ठाकुर, विक्रम जाट, गोपाल खत्री, संजय ठाकुर, अकिला ठाकुर, रितु सावनेर आदि उपस्थित थे। व्यसपीठ की पूजा मन्नुलाल गर्ग एवं परिवार ने की। कथा में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरूष उपस्थित थे।

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