चित्त को साधना सिखाता है सहजयोग

शरीर मन बुद्धि से होते हुए आत्मा तक पहुंचने की प्रक्रिया है योग।अतः केवल आसन प्राणायाम ही नहीं ध्यान की प्रक्रिया भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।योगश्चित्तवृत्ति निरोधःयह सूक्ति पतंजलि ऋषि की योग प्रदीप पुस्तक में सर्वाधिक प्रसिद्ध सूक्तियों में से एक है।जो योग में चित्त के महत्व को बताती है और चित्त में वृत्ति के महत्व को बताती है। मार्कंडेय ऋषि ने दुर्गा सप्तशती में या देवी सर्वभूतेषु वृत्ति रूपेण संस्थिता कह कर वृत्ति में उपस्थित देवी को प्रणाम किया है। इस प्रकार शरीर ,मन ,बुद्धि से लेकर चित्त और आत्मा तक की संपूर्ण यात्रा योग की युक्ति में समाई है परंतु इसे पाने के लिए मानव में वृत्ति होना चाहिये।सहज योग अत्यंत सरलता से मन को प्रवृत्तियों से हटाकर निवृत्ति की ओर ले जाता है। ईश्वर के शुद्ध स्वरूप को जानने की अबोध जिज्ञासा ही वह शुद्ध वृत्ति है जिससे योग की युक्ति की प्रक्रिया संपन्न होती है। learning sahaja yoga यू ट्यूब चैनल के द्वारा 20 व21 जनवरी को सायं 5 बजे ऑनलाइन ध्यान सीखने की घर बैठे शुरूआत कीअप्प दीपो भव पाली भाषा में बुद्ध के सुन्दरतम सूत्रों में से एक है यह सूत्र जो बताता है कि अपना प्रकाश स्वयं बनो अर्थात किसी दूसरे से उम्मीद लगाने के बजाय अपना प्रकाश (प्रेरणा) खुद बनो!
सहजयोग की प्रणेता परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने सहजयोग के माध्यम से इसे घटित किया है ।वास्तव में जब आत्मसाक्षात्कार की घटना घटती है तब मानव के हृदय में स्थित आत्मा प्रकाशित होती है।एक प्रकाशित आत्मा से युक्त साधक अपना सूर्य स्वयम् बन जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस महान मनीषियों की इस अपूर्व शोध को सामान्य जन के लिए सुलभ कराता है महामनीषियों की शिक्षाओं को सही अर्थों में आत्मसात करने का अवसर उपलब्ध कराता है।

You may have missed