———————————————— —————————————————– भा ज पा मे नए कप पुराने कप —————————- भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री इन दिनों विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मध्यप्रदेश के जिलों में जा-जाकर और बैठकें कर कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र रटा रहे हैं। ऐसे ही एक जिले की बैठक में जब भाजपा के कुछ कार्यकर्ता राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री के समक्ष पुराने नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी में उपेक्षा पूर्ण व्यवहार की शिकायत करने लगे, तो राष्ट्रीय सह संगठन का डायलाग था कि ‘जब नए कप बाजार में आ जाते हैं, तो पुराने कपों’ को चलन से बाहर होना ही पड़ता है और नहीं तो जबरन कर दिया जाता है। बताते हैं कि राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री के इस डायलाग को सुनने के बाद से भाजपा के एक वरिष्ठ नेता एवं पूर्व अध्यक्ष प्रदेश भर में पुराने नेताओं को फोन कर-करके बता रहे हैं कि, ‘देखो एक नया ‘कप’ बाजार (पार्टी) में आया है, जो हमें चलन से बाहर कर रहा है। खैर जो भी हो, प्रदेश के पुराने भाजपा नेताओं ने बेइज्जती का बदला लेने के लिए इस नए ‘कप’ के खिलाफ भोपाल से दिल्ली तक गोलबंदी शुरू कर दी है।
— संघ की सिफारिशों से मंत्री परेशान मध्यप्रदेश में ट्रांसफर-पोस्टिंग (तबादला) का मौसम शुरू होने वाला है। इस बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पदाधिकारियों ने सात महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिलेवार अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की सिफारिशें करनी शुरू कर दी हैं। इसके साथ सीएम शिवराज ने अपने मंत्रियों को हिदायत दी है कि, संघ पदाधिकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए जो भी सिफारिश करें, उन पर तत्काल अमल करो। अब मंत्रीगण इस बात को लेकर परेशान हैं कि, यदि वे संघ की सिफारिशों के अनुसार अफसरों-कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग करते हैं, तो तबादलों का मौसम सूखा निकल जाएगा। नारदजी कहते हैं कि, मंत्रियों का परेशान होना लाजिमी है, जब तबादला मौसम सूखा निकल जाएगा, तो चुनाव लड़ने के लिए पैसा कहां से आएगा? वैसे भी तबादले बिना वजन किए जाएं, ऐसी संस्कृति मप्र में तो कम से कम नहीं है। लेकिन संघ के पदाधिकारियों को कौन समझाए? –
— शोभा की वजह से किसके कटेंगे पर मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में सात महीने बचे हैं और वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा की तीन साल बाद फिर पीसीसी में एंट्री हो रही है। इसके पहले 2018 में भी विधानसभा के कुछ महीने पहले शोभा को बतौर कांग्रेस मीडिया प्रभारी पीसीसी मेन लाया गया था। शोभा का पीसीसी में चैंबर तैयार हो गया है। उनकी नेम प्लेट भी लग गई है। पीसीसी में इस बात को लेकर हलचल शुरू हो गई है कि, यदि शोभा पावरफुल होंगी, तो पीसीसी में ‘पर’ किसके कतरे जाने वाले हैं। निश्चित रूप से किसी की तो छुट्टी होगी। नारदजी को पीसीसी के पदाधिकारी ने बताया कि, कांग्रेस के मीडिया विभाग में अपने-तुपने के वातावरण को विराम देने और कांग्रेस को मुखर करने के लिए खासतौर से शोभा को दोबारा पीसीसी में लाया गया है। कहने का मतलब है अब पीसीसी में सिर्फ शोभा की चलेगी। —
उत्साही लाल मंत्री जी से पार्टी नाराज शिवराज सरकार में यदि कोई मंत्री सबसे उत्साही लाल (ओवर कान्फीडेंस) है, तो वो हैं कृषिमंत्री कमल पटेल। उनके तौर-तरीकों को लेकर पार्टी इन दिनों बेहद नाराज़ चल रही है। क्योंकि मंत्रीजी बोलते ज्यादा हैं। यही नहीं वे कब, कहां, क्या बोल जाएं, खुद उन्हें मालूम नहीं रहता। कभी-कभी तो बड़बोलेपन में मंत्रीजी पार्टी गाइड लाइन से बाहर बबूल के पेड़ में आम उगा देते हैं। जिससे कई बार पार्टी प्रवक्ताओं को जवाब देना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, उनके करीबी कार्यकर्ता कहते हैं कि, कमल भाईसाब भले कुछ भी बोलें और कुछ भी करें, पार्टी संगठन कितना ही नाराज़ क्यों न हो, पर जब तक दिल्ली में नड्डा जी भाईसाब बैठे हैं उनका कोई भी बालबांका नहीं कर सकता है। —
‘घटिया’ वाले भाईसाब की नियुक्ति चर्चाओं में। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार ने निगम-मंडलों, आयोगों, प्राधिकरणों, अकादमियों में राजनीतिक नियुक्तियों का अभियान- सा छेड़ दिया है। ताकि पार्टी के रोतलों (असंतुष्टों) को चुप किया जा सके। हालांकि, ज्यादातर नियुक्तियों को लेकर खांटी भाजपाईयों में आक्रोश है। उज्जैन विकास प्राधिकरण में हुई चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर भी स्थानीय भाजपाई अचम्भित हैं। बताते हैं कि चेयरमैन भाईसाब कुछ साल पहले तक तो रोडपति थे, लेकिन देखते-देखते ही ‘राकेट साइंस’ से अरबपति हो गए। ‘घटिया’ वाले भाईसाब की एक और महान उपलब्धि रही कि, जब ये भाईसाब उज्जैन जिला (ग्रामीण) अध्यक्ष थे, तो जनपद अध्यक्ष और विधानसभा का चुनाव भाजपा बुरी तरह हार गई थी। खैर जो भी हो, अब भाजपा में शर्तें लग रही हैं कि, आखिर ‘घटिया’ वाले भाईसाब को चेयरमैन किसने-कितने में बनवाया? बताने वाले को एक हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा। ———- Email id-maheshdixit66@gmail.com/(mb)-9893566422
