आनंदम संस्थान अल्पविराम ग्रामीण क्षेत्र में आमजन को सामाजिक क्षेत्र से जोड़कर सिखा रहे जीवन आनंद से जीने की कला

माननीय मुख्यमंत्री द्वारा आंनद विभाग की समीक्षा के बाद निर्देशित किया गया था कि आंनद गतिविधियों का विस्तार किया जाए।इसी क्रम में प्रत्येक जिले में शासकीय विभागों, निजी  संस्थानों एवं आम नागरिकों के लिए आफ लाइन एक दिवसीय अल्पविराम परिचय कार्यशाला का आयोजन 20 फ़रवरी से 20 मार्च 2023 तक किया जा रहा है इसी तारतम्य में राज्य आंनद संस्थान भोपाल के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में, देवास जिले के  कलेक्टर  श्री ऋषव गुप्‍ता तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी , श्री प्रकाश सिंह चौहान आनंद विभाग  के नोडल अधिकारी  के सहयोग से बनी योजना के अनुरूप, जिले में ऑफलाइन एकदिवसीय अल्पविराम परिचय कार्यशाला का आयोजन दिनांक 05 मार्च 2023 को देवास जिले के टोंकखुर्द विकास खंड मुख्यालय पर शासकीय कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय टोंकखुर्द में सफलतापूर्वक किया गया।इस कार्यशाला में शासकीय एवं अशासकीय प्रशिक्षणार्थियों के साथ, नगर के गणमान्य नागरिकों ने उत्साह एवं आंनद पूर्वक भाग लिया। तथा पूरे समय उत्सुकता एवं सक्रिय भागीदारी के के साथ उपस्थित रहे।  कार्यक्रम की शुरुआत डॉ समीरा नईम, समन्वयक एवं डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम लीडर तथा नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी श्री विमल कुमार जैन द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गयी । दीप प्रज्वलन के बाद,प्रेरणागीत हमको मन की शक्ति देना मन विजय करे, सभी ने मिलकर गाया। इसके बाद डॉ नईम ने अल्पविराम कार्यक्रम का उद्देश्य, रूपरेखा का परिचय दिया। सभी ने मिलकर राज्य आनंद संस्थान के परिचय का विडियो देखा। हमारे प्रदेश में हो रहे प्रयास आदि पर संक्षिप्त जानकारी दी गयी। डॉ नईम ने ताली और मेरी क्षमता की गतिविधि को करवाया तथा ये संदेश दिया कि हम स्वयं खुद को कितना कम आंकते हैं। मास्टर ट्रेनर श्री शिरीश सुमन शर्मा जी ने आनंद क्या है!! कैसे बढता व घटता है!! इस पर विचार रखते हुए, शांत समय लेने तथा आने वाले विचारों को लिखने के लिए प्रेरित किया।  प्रतिभागियों को उत्तम क्षमा का विडियो दिखाया गया। इसके बाद प्रतिभागियों का भोजनावकाश किया गया। अगला सत्र रिश्तों का रहा, जो विडियो से भी कनेक्ट करता है। यह सत्र सबको काफी भावुक कर  देता है। हाथ पर पेन रखने की गतिविधि की गयी। हम कितना कुछ अपने दिमाग में कितने लंबे समय रखते हैं और परिणामस्वरूप अपने संबंधों पर आंच आती रहती है। मेरे रिश्तों का मैप बोर्ड पर बना कर दिखाने, तथा जिन रिश्तों में दूरी आ गयी उनको मधुर बनाने में, मुझे  अल्पविराम ने दलदल से बाहर निकलने में बहुत मदद की, और कुछ रिश्ते बेहतर हुए, तथा यह प्रक्रिया सतत जारी है। यह सत्र होने पर अल्पविराम लेने और शेयरिंग करने के लिए प्रेरित करने की ज्यादा कोशिश नहीं करनी पडी। सभी लोग खुल कर बोले। सबने अटूट रिश्ते का विडियो देखा और सराहा।इसके बाद अब तक इस्तेमाल किए मुख्य शब्द, जिन पर हम सबको काम  करते रहना है, इसकी चर्चा हुई। सबने मिलकर सही सूची बनायी, कृतज्ञता, अहं छोडना, माफ करना, माफी मांग लेना, स्वयं को  स्वीकार करना, मदद, दया, करुणा, स्नेह भाव रखना, आदि।कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने फीडबैक दिया। फैकल्टी द्वारा बहुत ही जोश में पूरे कार्यक्रम का सारांश तथा प्रेरणादायक उद्बोधन दिया।कार्यक्रम के अंत मे आभार आनन्दम सहयोगी डॉ गजेंद्र शर्मा द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में आनन्दम सहयोगी सुश्री कृपाली सिंह राणा,श्री अनार सिंह राणा, श्री सुरेंद्र सिंह सेंधव, श्री राममूर्ति बिलावलिया का सहयोग रहा तथा शिवम कला साहित्य एवं सांस्कृतिक क्लब टोंकखुर्द का विशेष सहयोग रहा ।

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