भगत- –बाबा प्रणाम।
बाबा — प्रणाम बेटा क्या खबर है।
भगत – बाबा पेकी प्लाट का मुद्दा गहरा गया है। भगत– हां बेटा अभी पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है देवास नगर निगम के इंजीनियर के वाइरल वीडियो से आम जनता में और ज्यादा विरोध है नगर निगम की बदनामी के साथ सरकार की भी बदनामी हो रही है ।कि आखिर नगर निगम को पूरे देवास शहर में बड़े रसूखदार के पेकी प्लाट और, अतिक्रमण छोड़कर शहर से दूर आवास नगर में ही क्यों गलत दिखा क्या इसमें उच्च अधिकारी भी सहमत है यह मुद्दा पूरे प्रदेश में गहरा सकता है ।एक गरीब का मकान तोड़ना तो ठीक इंजीनियर द्वारा उससे जो व्यवहार किया गया वह उससे ज्यादा दुखी करता है।
भगत –इंजीनियर पहले भी बहुत विवाद में रहे हैं
बाबा — हां बेटा पहले भी कई लोगों से पंगा लिया अभी हाल में ही युवा पार्षद शीतल गहलोत से पंगा लिया था परंतु शीतल गहलोत भारी पड़े ।अब आम जनता को भी समझ में आ रहा है कि कौन गलत कौन सही।
भगत कांग्रेस ने भी मुद्दा उठाया है और प्रदेश तक ले जाएगी । बाबा—- हां मनोज राजानी ने सही मुद्दा उठाया जबरिया मुद्दे उठाने से अच्छा है आम जनता के दर्द को उठाओ, आम जनता पर हो रहे अत्याचार को उठाओ । विकास कार्य से जलो मत अपने अलग आम जनता के मुद्दे उठाओ मनोज राजानी ने गर्म लोहे पर वार किया है। मुद्दा बहुत सही है पूरे शहर में नगर निगम और सरकार पर सवाल उठ रहे हैं।
भगत — जनता ने कलेक्टर का नाम भी बदल दिया है। बाबा — कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर ऐ इंसान। मात्र 4 महीने में स्मार्ट कार्य करने के साथ स्मार्ट स्कूल में एलईडी देने की योजना वह भी जनसहयोग से प्रदेश में प्रेरक बन सकती है कलेक्टर गुप्ता की मेहनत अब रंग ला रही है। 4 महीने जी तोड़ मेहनत के साथ कुछ अलग करने का जज्बा जुनून कलेक्टर गुप्ता में है यह एक उदाहरण है कि आप जो कार्य आपको दिया है वहीं ईमानदारी से करते हैं तो आपका नाम चलेगा ही मन को संतोष भी होगा सुकून भी खुला कलेक्टर दरबार लगाने के साथ गरीब के प्रति दर्द और उनकी समस्या के लिए सदा तत्पर रहने की शैली आम जनता को खूब भाती है। आम जनता ने अब उनको न्याय प्रिय कलेक्टर के साथ एक और नया नाम दिया है स्मार्ट कलेक्टर।
भगत ——-नकल पर भी नकेल कर दी। बाबा –नकल में भी अकल चाहिए और अभी शहर में तो अंकुश लग गया है परंतु अकलदार ने अपनी दुकान ग्रामीण क्षेत्र में लगा ली है दूरी दोनों और 35 किलोमीटर से ज्यादा नहीं है परंतु कलेक्टर से ज्यादा खुफिया नकल वालों के पास है पहुंचने के पहले ही सब कुछ सामान्य फिल्मी स्टाइल में।
भगत —मिलावटखोरों के खिलाफ भी अभियान चल रहा है। बाबा—- अच्छी बात है परंतु यहां भी वही बात हो रही है कि उन तक खाद्य विभाग नहीं पहुंचता है बस शहर में छोटे-छोटे खुले रूप से डेरी से लेकर अन्य व्यापार करने वाले पर खाद्य विभाग की कार्रवाई होती है। मसाला उद्योग जो सीधा आमजन की सेहत पर प्रभाव डालता है। फिर नमकीन वालों का तो बोलबाला है और मावे वाले बड़े वाले हैं ।खैर अच्छा अभियान तो शुरू किया कुछ दिन तो मिलावट खोर आमजन को अच्छा खिलाएंगे।
भगत— ब्याज खोर भी वापस बाजार में आ गए हैं। बाबा ——ब्याज तो बैंक भी लेती है परंतु कहीं कागज लेने के साथ ऑफिस ऑफिस के चक्कर लगवा दी है और आमजन को जब जरूरत पड़ती है तब यह ब्याज खोर अवसर का फायदा उठाते हैं ।और मनपसंद ब्याज पर मजबूर पैसा लेता है फिर चक्रव्यूह में गरीब फसता चला जाता है इसके लिए पुलिस विभाग को कैंप लगाना चाहिए एक दशक पहले शिविर में कहीं ब्याज खोर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई थी। उसके बाद कुछ वर्षों तक ब्याज खोर बाजार से नदारद थे अब फिर मैदान में हैं साहूकारी ब्याज ठीक है लेकिन 5 से 10 परसेंट और फिर आगे ब्याज पर ब्याज पीड़ित को और मजबूर बना देता है। कलेक्टर और एसपी ने मिलकर एक शिविर लगाना ही चाहिए।
भगत —-कलेक्टर का अगला मिशन स्वास्थ्य विभाग है। बाबा— स्वास्थ्य विभाग में बिल्डिंग से लेकर आधुनिक चिकित्सा उपकरण तक में बदलाव हुआ है बस नहीं हुआ तो चिकित्सकों और कुछ स्टॉप के लोगों का ह्रदय परिवर्तन उनके लिए आज भी आम जनता एक ग्राहक है ।और शासकीय वेतन से ज्यादा निजी क्लीनिक पर निजी पर फीस फर्ज से ज्यादा अच्छी है खैर अब कलेक्टर इस विभाग मैं अपनी एंट्री करने वाले हैं तो कुछ सुधार तो होगा ही । कलेक्टर को सबसे पहले इनके मन परिवर्तन करने के लिए कुछ करना चाहिए आम जनता के मन में सरकारी हॉस्पिटल के प्रति जो विश्वास पहले उठ गया था वह भी कोरोना काल में वापस शासकीय हॉस्पिटल की ओर ले आया है ।उसे भुनाना होगा अगर चिकित्सक आर्थिक लोभ छोड़ दे तो वह भगवान की तरह हम जनता में पूजा जाएंगे आर्थिक लाभ कमा कर सम्मान होने से अच्छा है आर्थिक लाभ छोड़कर लोगों के दिल में जगह बनाने के साथ ईश्वर के यहां भी अपनी जगह सुरक्षित कर लो वरना कई चिकित्सकों के हाल आपके सामने हैं । कुछ चिकित्सक के नाम आज भी जनता में आदर के साथ सम्मान के साथ लिए जाते हैं ।
भगत— नेताजी मंत्री बनने जा रहे हैं। बाबा —-अगला विधायक का टिकट ले आए वही बहुत है अभी तो चारों और विरोध है नेता जी के विरोधी भी चाहते हैं कि नेता जी को मंत्री बना दो कम से कम क्षेत्र में पहले कम दिखते थे अब और नजर नहीं आएंगे।
भगत –इससे तो नेताजी का फायदा होगा।
बाबा– हां बेटा थोड़े दिन के लिए रुतबा बढ़ेगा परंतु अभी विधानसभा क्षेत्र में पहले ही नेताजी की उपस्थिति कम पर और अब बस कुछ महीने और यूं कहे की दिन भी बहुत कम है और नगर विधायक मंत्री बन जाते हैं तो आधा समय भोपाल और अन्य शहरों में बीत जाएगा फिर गई विधानसभा हाथ से। विरोधी तो चाहते ही यही है कि मंत्री बनने के बाद दूसरे शहर और भोपाल में नेताजी समय दे और हम क्षेत्र में जो पहले से ही सक्रिय है। अब देखना है ग्रामीण क्षेत्र के यह नेताजी को मंत्रिमंडल में स्थान मिलता है या नहीं।
भगत — भरत चौधरी विधायक प्रतिनिधि बने। बाबा— राजे के दरबार में भले ही आप कितनी उछल कूद कर लो बनेगा उनकी पसंद का ही वह भी सादगी सीधा सरल व्यक्ति। भरत सीधे सरल व्यक्ति के साथ सभी में मिश्रित हो जाते हैं अब अपना दायित्व निभाने का समय आ गया है। जितना विश्वास पैलेस में किया है उतना ही कार्य करना चाहिए जो दायित्व मिला उसे अगर ईमानदारी से निभाओ थोड़ी मेहनत करो तो वह पद भी यादगार बन जाता है।
भगत— देवास में कई विधायक प्रतिनिधि के नाम चले हैं। बाबा —फिर वही बात विधायक प्रतिनिधि पूरे जिले में अभी तक मनोज राजानी, दुर्गेश अग्रवाल ,सुभाष शर्मा और सुनील पुरोहित, रवि जैन का नाम चला है ।जिन्होंने विधायक प्रतिनिधि का दायित्व बखूबी निभाया है। आप विधायक प्रतिनिधि हो तो प्रशासनिक क्षेत्र के साथ क्षेत्र की आम जनता जो विधायक तक नहीं पहुंच पाती उन तक पहुंचना। विधायक ने कॉलेज से लेकर और भी कई जगह जनप्रतिनिधि के रूप में दायित्व दिया है पॉलिटेक्निक कॉलेज से लेकर के पी कॉलेज जीडीसी और भी जगह पर अगर वह लोग भी इमानदारी से वहां पर कार्य करें तो वह स्थान अलग ही नजर आएगा कॉलेज में भी बहुत कुछ करने के अवसर है युवाओं की नई टीम जोड़ने के साथ कॉलेज को भी स्मार्ट कॉलेज बना सकते हैं परंतु हर बात के लिए जुनून जज्बा चाहिए और मेहनत भी।
भगत — पति परमेश्वर भी विधायक प्रतिनिधि का लेटर पैड उपयोग में लाते हैं। बाबा —सही बात है महापौर हो या जिला पंचायत जनपद या मंडी या और कोई जगह जहां नेता जी की पत्नी निर्वाचित होकर आई है वहां पर अभी तक पिछले दरवाजे से एंट्री के लिए विधायक प्रतिनिधि का लेटर पैड उपयोग में आता है। अब बात करें मनोज राजानी की तो वह सज्जन वर्मा के परमानेंट विधायक प्रतिनिधि है सोनकच्छ ही नहीं पूरे जिले की नब्ज मालूम है प्रशासनिक क्षेत्र में भी सत्ता हो या विपक्ष अच्छी पकड़ बरकरार है। दूसरा दुर्गेश अग्रवाल दो दशक से विधायक प्रतिनिधि का दायित्व निभा रहे हैं और प्रशासनिक पकड़ के साथ क्षेत्र में अंदर ही अंदर आमजन के बीच केवल विधायक के लिए कार्य करते रहे विरोधी भले ही कितने ही विरोध करे विधायक जानते हैं उनके लिए क्या किया और उन्होंने उसका पुरस्कार भी विरोध के बाद भी दे दिया। सुभाष शर्मा ने भी प्रतिपक्ष नेता से लेकर सभापति और महापौर तक विधायक प्रतिनिधि का दायित्व की साथ में निभाया बस लंबे समय सत्ता में रहने के कारण थोड़ा इनको विरोध झेलना पड़ा वरना विधायक प्रतिनिधि का दायित्व अच्छी तरह निभाया इसी तरह रवि जैन ने सोशल मीडिया से लेकर कोरोना आपदा में जनता के बीच अपनी जगह बनाई। ऐसे ही ग्रामीण क्षेत्र से सुनील पुरोहित ने ग्रामीण क्षेत्र से विधायक प्रतिनिधि का दायित्व निभाने के साथ कोरोना आपदा में पूरे क्षेत्र में सेवा कर नाम कमाया। पुरोहित के विधायक हारने के बाद पुरोहित ने इंदौर में अपना वर्चस्व जमा लिया। विधायक प्रतिनिधि हार फूल पहनकर फूल का कुप्पा होने की जगह सीधे जनता के बीच सुख-दुख में साथ खड़े रहे फ्लेक्स पर फोटो की जगह जनता के दिल में जगह बनाए तो विधायक प्रतिनिधि का पद सार्थक होगा वरना स्टेज पर कुछ कुर्सी और कुछ समय के लिए हार फूल स्वागत सत्कार के बाद फिर वही हार है।
भगत –बीमारी का मौसम आ गया। बाबा —- ऋतु परिवर्तन के साथ ही कुछ समय के लिए नई नई बीमारी आती है इस समय बच्चों के लिए यह नई बीमारी परेशान कर रही है ।डॉक्टरों के यहां लाइन लगी है खांसी से लेकर बुखार तक और फिर यह लंबे समय तक चलने के कारण आम जनता परेशान है। डॉक्टर चाहे जो भी नाम दे परंतु यह बीमारी कुछ अलग ही है। आम जनता ऋतु परिवर्तन के साथ खान-पान पर ध्यान दें और खासकर बच्चों में खांसी 8 से 10 दिन में जा रही है। चिकित्सकों का मेडिकल स्टार्स वालों का मौसम है ।
भगत –शहर कोतवाली खाली है। बाबा —बेटा प्राधिकरण में भले ही विरोधी बोर्ड बैठ जाए परंतु शहर कोतवाली में तो राजे की मर्जी चलेगी अब किस पर कृपा होगी यह अंदर की बात है।
भगत —प्राधिकरण अध्यक्ष कितने दिन के लिए बनेगा। बाबा —-बेटा देखा जाए तो यह भी अभी पैलेस के पास ही है और अगर पैलेस की पसंद का नहीं बन रहा है तो हो सकता है कि मुख्यमंत्री की कृपा भी विरोधी नेता पर नहीं हो। पैलेस के पास अभी भी प्राधिकरण हे। नगर निगम में अपने महापौर सभापति के बाद अब कमिश्नर के लिए वहां पर इतना स्थान नहीं जितना प्राधिकरण मैं सर्वे सर्वा है। कमिश्नर भी तो आनंद भवन के ही है। और अब समय भी बहुत कम है विधानसभा चुनाव सामने हैं मतलब गई भैंस पानी में।
