देवास। मल्हार स्मृति मंदिर परिसर स्थित वरिष्ठ नागरिक संस्था सभागृह में गुरूवार को आयोजित प्रेस वार्ता में गजरा गियर्स प्रा. लि. से जुड़े 62 श्रमिक परिवारों ने अपने आवासीय अधिकारों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच एवं न्याय की मांग की। पीडि़त श्रमिक परिवारों ने बताया कि वर्ष 1981 में मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड द्वारा गजरा गियर्स प्रा. लि. के 62 श्रमिकों को जवाहर नगर स्थित आवास आवंटित किए गए थे। श्रमिकों के अनुसार इन मकानों की राशि वर्षों तक उनके वेतन से किस्तों के माध्यम से काटी गई और निर्धारित भुगतान पूरा होने के बावजूद आज तक मकानों की रजिस्ट्री एवं वैधानिक स्वामित्व उनके नाम नहीं किया गया है।
प्रेस वार्ता में श्रमिकों ने आशंका जताई कि कंपनी प्रबंधन एवं संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इन मकानों को अन्य व्यक्तियों अथवा भू-माफियाओं को हस्तांतरित करने के प्रयास किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि श्रमिकों से मकानों की पूरी राशि वसूल की जा चुकी है, तो स्वामित्व अधिकार न देना गंभीर अनियमितता है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होना आवश्यक है। श्रमिक परिवारों ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में धोखाधड़ी, आर्थिक अनियमितता, आपराधिक विश्वासघात, षड्यंत्र एवं भ्रष्टाचार जैसे पहलुओं की जांच की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने आशंका व्यक्त की कि अधिकारों की मांग करने पर उन्हें दबाव, धमकी या जबरन बेदखली का सामना करना पड़ सकता है। प्रेस वार्ता के माध्यम से श्रमिक परिवारों ने प्रशासन से मांग की कि गजरा गियर्स प्रा. लि. एवं मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए, विवादित मकानों के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर रोक लगाई जाए तथा सभी 62 परिवारों को सुरक्षा प्रदान की जाए। उन्होंने मामले की जांच पूरी होने तक यथास्थिति बनाए रखने की भी मांग की। पीडि़त परिवारों ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन एवं शासन कानून एवं संविधान की भावना के अनुरूप श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। इस दौरान पीडित श्रमिक परिवार के सदस्य उपस्थित थे।







