जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि ध्यान दें, जी.डी.सी. महाविद्यालय की प्राचार्य द्वारा छात्राओं से वसूला जा रहा अतिरिक्त शुल्क, अभाविप ने धरना देकर सौंपा ज्ञापन, छात्र-छात्राएं इंदौर पढ़ने जाने के लिए मजबूर ना हो

देवास। एक तरफ पूरे जिले में चुनाव चल रहे हैं वही छात्र-छात्राओं के भविष्य का समय भी यही है जब महाविद्यालय में भी प्रवेश चल रहा है। वैसे तो देवास की अधिकांश छात्राएं इंदौर अप डाउन कर इंदौर के कॉलेज में पढ़ना पसंद करती है कुछ वर्षों से देवास में जीडीसी में छात्राओं का रुझान बड़ा था परंतु यहां प्रबंधन के अड़ियल रवैया के कारण छात्राओं को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उज्जैन रोड़ स्थित जी.डी.सी. महाविद्यालय में प्राचार्य द्वारा स्किल डेवलपमेंट एवं सेल्समैनशिप के नाम अतिरिक्त 1200/- रू वसूले जाने का आरोप लगाते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सोमवार को धरना प्रदर्शन कर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। नगर मंत्री राजेश्वर यादव ने बताया कि देवास जिले के एक मात्र छात्राओं के महाविद्यालय जी.डी.सी. कॉलेज में प्राचार्य द्वारा स्किल डेवलपमेंट एवं सेल्समैनशिप के कोर्स के नाम पर छात्राओं से बिना कोई नियम के 1200/- रुपए प्रति छात्रा वसूली की जा रही है। प्राचार्य द्वारा छात्राओं से यह कहा जा रहा है कि यह शुल्क नहीं दिया तो प्रैक्टिकल में नहीं बैठने दिया जायेगा। जिससे छात्राओं को आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभाविप ने मांग की है कि जो अतिरिक्त शुल्क छात्राओं से न वसूला जाये एवं जिनसे यह राशि वसूली गई उन्हें पुन: वापस की जायें। साथ ही पूरे मामले की जाँच करवाई जाकर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए। ऐसा न होने की स्थिति में अभाविप उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की रहेगी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सही समय पर मुद्दा उठाया है जब सभी राजनेता और जिला प्रशासन तक चुनाव में लगे हैं तब एक मुख्य युवा छात्र-छात्राओं के सामने समस्याएं खड़ी है फीस भरने का समय से लेकर सबसे बड़ी समस्या होती है कि नई छात्राएं जब प्रवेश के लिए जाती है तो वहां उन्हें मार्गदर्शन के लिए कोई नहीं मिलता है एक तरफ हम पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं देवास में स्कूल कॉलेज में पढ़ाने के लिए और दूसरी तरफ कालेज प्रबंधन का गैर जिम्मेदार रवैया शासकीय कॉलेजों से अच्छे छात्राओं को दूर जाने का कारण बन सकता है गरीब वर्ग मजबूरी में भी शासकीय कॉलेज में जाता है क्या जिला प्रशासन जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान देंगे ।

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