नाम चलने से क्या होता है जी यह आम नेता उनका नाम नहीं चलने पर अक्सर कहते हैं। लेकिन यह भी कड़वा सच है कि नगर निगम हो या विधानसभा लोकसभा जिसका नाम चला जिसके नाम की हवा बन गई उसे हराना बहुत मुश्किल हो जाता है ।जनता एक बार मन बना लेती है तो उसने आधा गढ़ तो जीत ही लिया। अभी नगर निगम चुनाव की बात कर रहे हैं तो सबसे पहले 1999 में जय सिंह ठाकुर के नाम की हवा बाजार में पहले ही बन गई थी जय सिंह ठाकुर ने विकास प्राधिकरण में आमजन से मेलजोल बहुत बड़ा कर माहौल बना लिया था कशमकश के बीच आखिर जय सिंह ठाकुर को टिकट मिल ही गया सामने से भी भारी उम्मीदवार शरद पाचुनकर थे जिन को हराना मुश्किल था परंतु हवा पहले ही जयसिंह ठाकुर की बन गई थी ।जनता में माहौल बन गया था आखिर जय सिंह ठाकुर ही महापौर बने। दूसरा 200 4 मैं जय सिंह ठाकुर के सामने चुनाव हारे शरद पाचुनकर का नाम और सहानुभूति की लहर पहले से ही बन गई थी। जहां बाद में उनको टिकट नहीं मिलने के बाद भी निर्दलीय जितना इस बात का सबूत है कि जिसका नाम पहले चल गया जनता में हवा बन गई तो वह निर्दलीय जीत गया। तीसरा 2009 में महिला पिछड़ा वर्ग घोषित होने के साथ ही कांग्रेश से रेखा वर्मा के नाम का माहौल पहले से ही जनता में बन गया था सामने भारतीय जनता पार्टी की बबली यादव के लिए विधायक और पूरे संगठन के साथ मुख्यमंत्री तक ने कोशिश की परंतु आखिर रेखा की रेखा पार नहीं कर सके रेखा वर्मा को पहले बनी हवा का फायदा मिला। इसके बाद लगातार टिकट की दौड़ में टिकट से वंचित रहे सुभाष शर्मा का नाम 2014 मै आमजन में था और हुआ भी यही उनके सामने कांग्रेस के सबसे दमदार उम्मीदवार मनोज राजानी को हार का सामना करना पड़ा। जबकि मनोज राजानी ने भी प्राधिकरण में रिकॉर्ड कार्य कर माहौल बनाया था परंतु जिसका नाम पहले चल गया ।इस तरह अब तक 4 चुनाव में जिसका नाम पहले चला आम जनता में माहौल बन गया वह आसानी से चुनाव जीत गया। इस बार देखना है पहले से जनता में किस का माहौल बन रहा है।
इसी तरह विधानसभा में भी हाटपिपलिया से मनोज चौधरी की पहले से ही लहर बनने के साथ नाम चल गया था जिसमें उन्होंने आसानी से मंत्री दीपक जोशी को हरा दिया। नगर निगम देवास महापौर सभापति का देवास विधानसभा टिकट से गहरा नाता रहा है सबसे पहले हम बात करें पहले महापौर पति हारून शेख को विधानसभा का टिकट मिला हालांकि वे चुनाव हार गए दूसरा उनके कार्यकाल में ही सभापति रहे स्वर्गीय रतन लाल चौधरी को भी विधानसभा का टिकट मिला तीसरा महापौर रहे जय सिंह ठाकुर को विधानसभा का टिकट मिलने के बाद चौथा महापौर रेखा वर्मा को भी विधानसभा का टिकट मिला महापौर जय सिंह ठाकुर को दो बार विधानसभा टिकट मिल चुका है हालांकि सभी कांग्रेस के बैनर तले लड़े चुनाव हार गए परंतु सबसे बड़ी बात यह है कि अभी तक निगम में चुनकर गए पदाधिकारी को लगातार विधानसभा के टिकट मिले हैं यह एक संयोग कहें या नगर निगम और कांग्रेस विधानसभा टिकट के लिए लकी होना भी मानते हैं। पार्षद मैं भी अधिकांश जगह पर जिस प्रत्याशी का नाम पहले चला है जनता में हवा बन गई है उसे हराना बहुत मुश्किल हो जाता है।
