बहिष्कार का करें बहिष्कार, नोटा को बोले नो, अपने क्षेत्र में रिकॉर्ड मतदान कर रिकॉर्ड बनाएं,अपने शहर को मतदान में भी नंबर वन बनाएं, जागरूक दिव्यांग कर्मचारी ने बदल दी ड्यूटी निरस्त करने वालों की मानसिकता, पुस्तक मेला और लगना चाहिए,मालीपुरा मैं बही धर्म की ज्ञान गंगा, पटवारी का निलंबन, श्रमिक नेता नहीं रहे
भगत – बाबा प्रणाम।
बाबा -बेटा प्रणाम सबसे पहले वोट देकर ही इधर आना चाहे कितनी ही बड़ी लाइन लगे और कड़ी धूप हो सबसे पहले वोट देना।
भगत -बाबा इस बार माहौल नहीं बना है वैसा जैसा बनना बनता है।
बाबा —बेटा और कैसा माहौल चाहिए पीले चावल तक तुम्हारे घर पर देने आ गए। मतदाता पर्ची से लेकर फोन मैसेज और रैली रंगोली क्या तुम्हारे घर के सामने ढोल बजा कर लेकर जाए तब वोट डालने जाओगे यह तो अपना कर्तव्य है सरकार को इतना करने की जरूरत नहीं अगर मतदाता जागरूक हो जाए तो । परंतु हमारे देश में वोट डालने से लेकर कचरा फेंकने तक के लिए समझाना पड़ता है कि कचरा पेटी में ही डालें और उसके लिए करोड़ों रुपए खर्चा करना पड़ते हैं तो वोट डालने से ज्यादा वोट डालने के लिए प्रेरित करने के लिए निर्वाचन आयोग को और सरकार को रुपए खर्च करना पड़ते हैं प्रचार प्रसार में ही और समझने के लिए ही फिर भी प्रतिशत के लिए शासन प्रशासन को जूझना पड़ता है।
भगत -इस बार तो देवास जिले में अच्छा प्रतिशत रहेगा।
बाबा- हां बेटा जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता दिन रात एक कर केवल शांतिपूर्ण मतदान के साथ सर्वाधिक मतदान करने के लिए प्रयासरत है। और इस बार प्रतिशत 100% बढ़ेगा। क्योंकि सबसे बड़ा कारण शादी विवाह लग्न नहीं होना। दूसरा दूसरे जिलों में कम मतदान देखकर भी शासन प्रशासन के साथ सभी संगठनों ने अच्छी मेहनत की है।
भगत—- कहीं पर तो फूफा जी रूठ गए हैं।
बाबा- हां बेटा समझ गया बहिष्कार की बात कर रहा है ना तो जो गांव वाले या किसी मोहल्ले में अगर बहिष्कार होता है वह भी लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व का ।तो मेरी नजर में तो सबसे बड़े नादान वही है क्योंकि आपके बहिष्कार करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इतने बड़े आठ विधानसभा के चुनाव में एक लोकसभा बनती है उसमें दो-चार गांव केवल अपनी क्षेत्रीय समस्या के लिए ब्याव मैं फूफा जी बनते हैं तो अब नए जमाने में फूफा जी को ज्यादा मनाते नहीं ऐसे ही ब्याव सफलतापूर्वक संपन्न हो जाते और फूफा जी मुंह फूलाए घर निकल जाते है। और फिर जो ग्रामीण या मोहल्ले वाले बहिष्कार करते हैं ।तो फिर उनकी बात जीतने वाला नेता क्यों सुनेगा। इसलिए बहिष्कार करने वाले की बात का ही बहिष्कार करें और ऐसे भड़काऊ लोगों को सबक सिखाएं जो राष्ट्रीय मुद्दे की जगह स्थानीय छोटे मुद्दे पर आपका कीमती मत को नहीं देने के लिए बोल रहे हैं ।यह अवसर फिर 5 वर्ष बाद आएगा और इतना अच्छा मौका 5 वर्ष बाद मिलेगा इसलिए अपना कीमती वोट बहिष्कार के नाम पर भी ना बर्बाद करें।
भगत – नोटा भी तो हे ना।
बाबा– बेटा वह तो वह ऑप्शन है की आपको उम्मीदवार में से कोई भी उम्मीदवार पसंद ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता है इतने उम्मीदवार है । निर्दलीय भी है उसके बावजूद भी अपना कीमती में वोट नोटा को देकर कुछ नहीं मिलना। अब नोटा को भी नो बोलना है। जब इतने ऑप्शन है तो क्यों ना हम अपने पसंद के किसी भी उम्मीदवार को वोट दें और उनका उत्साह बढ़ाएं । सबसे बड़ी बात बेटा इस बार अगर सभी ईमानदारी से लग जाए तो देवास शहर में या और अन्य शहर में भी रिकॉर्ड मतदान कर एक नया रिकॉर्ड बना सकते हैं अपने जिले को नंबर वन बनाएं केवल सफाई में ही नंबर नहीं मतदान में भी हमारा जिला नंबर वन बने बस एक छोटी सी यही बात है और इस बार लग रहा है कि हमारा शहर नहीं पूरा जिला नंबर वन होगा।
भगत – इस बार कर्मचारियों में भी उत्साह है ड्यूटी भी उत्साह के साथ कर रहे हैं ड्यूटी कैंसिल करने के लिए ज्यादा बहाने बाजी नहीं चली।
बाबा —-देवास जिला कलेक्टर अपनी टीम को अच्छी तरह लेकर चल रहे हैं उनका उत्साह वर्धन करते हैं हाल ही में खातेगांव चुनाव में दिव्यांग विमल गोस्वामी द्वारा दिव्यांग होने के बाद ड्यूटी पर हाजिर होना और ईमानदारी से ड्यूटी करने से चुनाव में बहाने बाजीगर ड्यूटी कैंसिल करवाने वाले इस बार कम ही नजर आए और जो कर रहे हैं वह भी उत्साह के साथ मैदान में डटे हैं सबसे बड़ी बात की कप्तान अच्छा हो तो पूरी टीम उत्साह के साथ करती है काम कि हमारे कप्तान इतनी मेहनत कर रहे हैं तो हम भी क्यों ना हम भी उसी तरह काम करें और उनके साथ दे। इस बार जागरूक दिव्यांग कर्मचारी विमल गोस्वामी अच्छा सबक दे गए।
भगत -अभिभावकों के लिए पुस्तक मेला भी लाभदायक रहा।
बाबा —देवास जिला कलेक्टर के प्रयास की जितनी सराहना की जाए उतना कम है अभी आचार संहिता चल रही है इसलिए ज्यादा तो नहीं बोलेंगे इतनी ही बात है कि उन्होंने कोई सा भी मुद्दा है उसका शांति के साथ स्थाई निराकरण किया है। अभी स्टेशनरी की दुकान पर अभीभावको के साथ मनमाने दाम की बात सामने आ रही थी। तो जिला प्रशासन के निर्देशन में शिक्षा विभाग द्वारा पुस्तक मेले का आयोजन एक अच्छी पहल रही ।बस इसमें इतना सा रहा कि कई कोर्स छात्रों को नहीं मिले अगली बार से एक और मेला लगे और उसमें बड़े स्टेशनरी वाले को भी किसी भी तरह शामिल किया जाए नहीं हो तो इंदौर से बुलाया जाए ताकि छात्रों को अपना कोर्स होने का दर्द ना रहे जो भी हो पुस्तक मेला एक अच्छी पहल थी एक बार और शिक्षण सत्र शुरू होने के पहले इसे लगाया जाना चाहिए जिसमें स्टेशनरी वालों का भी लाभ है कि आपके यहां पर वह ग्राहक भी मिल जाएंगे जो आपकी दुकान तक नहीं आते हैं और जनता का भी भला हो जाएगा।
भगत —मालीपूरा मैं धर्म ज्ञान की गंगा बही।
बाबा —-ऐसा लग रहा है कि सतयुग वापस आ रहा है क्योंकि शहर में बड़े यज्ञ हवन होना भी इसका संकेत है इस बार मालीपुरा के धर्मालु भाग्यशाली रहे जिन्होंने यह धार्मिक आयोजन किया गुरुदेव गरुड़ दास जी महाराज द्वारा विगत वर्षों से हवन यज्ञ और धार्मिक आयोजनों में युवाओं की टीम को भी जोड़कर देवास को धर्म में बनाने का अच्छा प्रयास है यहां पर आचार संहिता में भी इतनी शांति के साथ आयोजन संपन्न हुआ आयोजक बधाई के पात्र है।
भगत —पटवारी का निलंबन हो ही गया।
बाबा —-ज्यादा करो दूसरे के लिए कम करो अपने लिए ऐसे ही यह पटवारी साहब सारे रिकॉर्ड तोड़ चुके थे ।और अति हो गई थी जिसका अंत भी होना ही था। फिर पहली बार ऐसा हुआ कि देवास के कर्मचारियों को इंदौर में रिश्वत लेते गिरफ्तार किया लोकायुक्त पुलिस ने ।पटवारी मनोहर बिलावलिया को पकड़े जाने के बाद भी निलंबन नहीं किया गया था। जिसको लेकर बहुत चर्चा चल रही थी । किसी के भी निलंबन के लिए थोड़ी सी प्रक्रिया लंबी जरूर रहती है लेकिन कोई बच नहीं सकता और आखिर जिला कलेक्टर ने पटवारी को निलंबित कर ही दिया। देवास में पटवारी को लेकर बहुत चर्चा चलती है ।जमीन के भाव आसमान पर है तो पटवारी के भी भाव उस हिसाब से ही है मजबूर किसान है अपनी जमीन चाहे भले व महंगी दे रहा हो लेकिन दे तो कलेजा का टुकड़ा रहा है उसमें से भी केवल उसे नापने के लिए इतने रुपए देना पड़े तो लोकायुक्त को तो याद करेगा ही फिर बहुत कम प्रकरण लोकायुक्त में जाते हैं ।जब आप ज्यादा सताओगे तो मजबूरन लोकायुक्त में जाएगा नहीं तो आटे में नमक तो हमेशा चलेगा ही।
भगत —बाबा अच्छे श्रमिक नेता ब्रज दादा नहीं रहे।
बाबा –हां बेटा देवास श्रमिक क्षेत्र में बहुत कम नेता थे जो श्रमिकों की लड़ाई दबंगता के साथ लड़ते थे इसमें बैंक नोट प्रेस के सबसे लोकप्रिय नेता स्वर्गीय ब्रज श्रीवास्तव थे । जो श्रमिक क्षेत्र के साथ किसानों में भी लोकप्रिय थे और उनकी दबंगता के कारण देवास में बैंक नोट प्रेस में इंटर मजबूत हुआ था श्रमिक नेता स्वर्गी ब्रज दादा को कलयुग टाइम की ओर से श्रद्धांजलि शत-शत नमन
भगत- बाबा मैं तो चला चाहे कोई काम हो ना कैसी स्थिति हो वोट डालूंगा।
बाबा –हां बेटा स्वयं वोट डालना और फिर परिवार को और आसपास पड़ोसी फिर रिश्तेदार और परिचित को मोबाइल पर फोन कर केवल वोट के लिए प्रेरित करो यह भी पुण्य का कार्य है लोकतंत्र के महापर्व में अपना योगदान चाहे गिलहरी की तरह दो लेकिन दो जरूर जय हिंद जय भारत
