देवास। पैरों में भले फटे जूते हो मगर सर पर सतगुरू की कृपा होगी तोे आप महाराजा है। जहां गुरू की कृपा संत का मिलन होता है वहां अंतस का विचार बदल जाता है। गुरू कैैसा भी हो शिष्यत्व पूरा होगा तभी ज्ञान और अध्यात्म की चेतना जाग्रत होगी। गुरू की कृपा से नारायण को प्राप्त करने की दृष्टि प्राप्त होती है। सतकर्म से पुण्य उदय होता है। संतों की कृपा से ज्ञान प्राप्त होता है। जानकारी किसे से भी मिल सकती है किंतु ज्ञान सतगुरू के चरणों में बैठकर ही प्राप्त होता है। जीवन सत्संग और कथा मनोरंजन का साधन नहीं आत्मरंजन का साधन है। किसी को पाने के लिए दूर जाना पड़ता है, परंतु पाने के लिए उसे जानना पड़ता है। वह सर्व व्यापक है, आकाश दूर नहीं है जहां देखोगे वहां आकाश है। भगवान का अर्थ है भ से भूमि, ग से गगन, अ से अग्नि, वा से वायु, न से नीर ये पंच तत्व ही परम तत्व है। ये परम तत्व हमारी आत्मा में है। इसे जिसने जान लिया उसने परमात्मा को जान लिया। उस चित्त को जाग्रत करने के लिए गुरू की कृपा प्राप्त करना होेती है। भगवान राम के नाम की महिमा है कि कलि काल में जिसने राम का नाम लिया समझना वहां हनुमान मौजूद थे। भगवान का नाम व्यक्ति के कलमश को धोता है। तुलसीदास जी ने कहा है कि कलियुग केवल नाम अधारा। सतयुग में भगवान को प्राप्त करने के लिए बहुत तपस्या करना पड़ती थी तब जाकर भगवान के दर्शन की अनुभूति होती थी, किंतु कलियुग में तोे केवल भगवान का नाम स्मरण करने से ही भव सागर पार किया जा सकता है। प्रभु राम की कृपा और गुरू के आशीर्वाद तभी प्राप्त होते हैं जब प्रभु श्रीराम की कथा को श्रवण करने का सौभाग्य जागता है। यह आध्यात्मिक विचार चैत्री नवरात्रि पर कैलादेवी मंदिर में प्रारंभ हुई श्रीराम कथा के दौरान महान आध्यात्मिक प्रवक्ता ऋतुम्भरा दीदी मां की परम शिष्या साध्वी सत्यप्रिया दीदी ने श्रीराम कथा के प्रथम दिवस पर आध्यात्मिक चित्रण के साथ कहे। बालकांड में गुरू की महिमा का सुंदर वर्णन करते हुए आपने राम कथा के श्रवण करने वाले श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। व्यासपीठ की पूजा दीपक गर्ग, अनामिका गर्ग, जयेश गर्ग, प्राची गर्ग, हितेष गर्ग एवं परिवार ने की। साध्वी सत्यप्रिया का स्वागत संयोजक रायसिंह सेंधव, रमण शर्मा, देवकृष्ण व्यास, वीणा महाजन, पिंकी पंवार, विनोद अग्रवाल, अजय अग्रवाल इंदौर, नितिन गुप्ता, सौरभ सचान, दिनेश सांखला ने किया। कथा के एक दिन पूर्व कैलादेवी मंदिर चौराहा एबी रोड पर साध्वी सत्यप्रिया दीदी का भव्य स्वागत कर मंदिर समिति एवं कार्यकर्ताओं ने भव्य कलश यात्रा के साथ कैलादेवी मंदिर तक शोभा यात्रा निकाली।
जन्म जन्मांतर का पुण्य उदय होता है जब प्रभु श्रीराम की कृपा और गुरू के आशीर्वाद प्राप्त होते हैं तब प्रभु श्रीराम की कथा श्रवण करने का सौभाग्य जागता है- साध्वी सत्यप्रिया दीदी
