कलेक्‍टर श्री गुप्‍ता ने देवास जिले को “जल अभावग्रस्त क्षेत्र’’ घोषित किया, जिले में जल स्त्रोतों से किसी भी साधन से सिंचाई करना प्रतिबंधित, ट्यूबवेल (बोरिंग) खनन पर लगा पूरे जिले में प्रतिबंध,

कलेक्‍टर श्री गुप्‍ता ने देवास जिले को “जल अभावग्रस्त क्षेत्र’’ घोषित किया, जिले में जल स्त्रोतों से किसी भी साधन से सिंचाई करना प्रतिबंधित ———– जिले में स्थित समस्त जल स्त्रोतों में संग्रहित जल को पेयजल एवं घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित करने के लिए निर्देश जारी किये ———— जल संरक्षण की दृष्टि से सम्पूर्ण जिले में नलकूप खनन प्रतिबंधित रहेगा ———— आदेश के उल्‍लंघन पर प्रथम अपराध के लिए 5 हजार रूपये और पश्‍चातवर्ती प्रत्‍येक अपराध के लिए 10 हजार रूपये के जुर्माने या 02 वर्ष तक के कारावास का दण्‍ड मिलेगा ————- देवास, कलेक्‍टर श्री ऋषव गुप्‍ता ने जिले में संभावित घरेलू/पेयजल संकट से निपटने एवं आमजन सहित पशु-पक्षी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मध्‍य प्रदेश पेयजल परीक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 में प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए देवास जिले को “जल अभावग्रस्त क्षेत्र’’ घोषित कर सभी जल स्त्रोतों बांध, नदी, नहर, जलधारा, झरना, झील, जलाशय, नालाबंधान, नलकूप या कुओं से किसी भी साधन से सिंचाई करना 30 जून 2024 तक प्रतिबंधित किया है। आदेश का उल्‍लंघन करने पर प्रथम अपराध के लिए 05 हजार रूपये के जुर्माने से और पश्‍चातवर्ती प्रत्‍येक अपराध के लिए 10 हजार रूपये के जुर्माने या 02 वर्ष तक के कारावास से दंडनीय होगा। कलेक्‍टर श्री गुप्‍ता ने जिला स्थित समस्त जल स्त्रोतों में संग्रहीत जल को पेयजल एवं घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित करते हुए निर्देश जारी किये हैं। कोई भी व्यक्ति किसी भी जल स्त्रोत से सिंचाई के लिए जल उपयोग नहीं करेगा। जल संरक्षण की दृष्टि से सम्पूर्ण जिले में नलकूप खनन प्रतिबंधित रहेगा। जिले की राजस्व सीमा क्षेत्र में नलकूप/बोरिंग मशीन द्वारा किसी भी प्रकार का खनन नहीं किया जायेगा। वर्तमान जल स्त्रोतों से पेयजल/घरेलू या निस्तार प्रयोजन को छोड़ अन्य किसी प्रयोजन के लिए भी जल उपयोग प्रतिबंधित होगा। आवश्यक होने पर अनुभाग अंतर्गत संबंधित “अनुविभागीय अधिकारी राजस्व/ अनुविभागीय दण्‍डाधिकारी किसी क्षेत्र में नल जल योजना न होने अपेक्षित स्थान के आसपास हेण्डपम्‍प कुंओं न होने अपेक्षित स्थान से 150 मीटर के रेडियस में नलकूप या कुंआ न होने, अन्य पेयजल स्त्रोतों पर विपरीत प्रभाव न पड़ने आदि का परीक्षण पीएचई विभाग के सक्षम तकनीकी अधिकारी से करवाकर नलकूप खनन की अनुमति जारी कर सकेंगे। यदि नलकूप खनन की अनुमति प्रदान की जाती है तो आवेदक को निर्धारित फीस का भुगतान करना आवश्यक होगा। शासकीय संस्थाओं के लिए उपरोक्त प्रतिबंध लागू नहीं होंगे, किन्तु तत्संबंधी कार्यों की जानकारी संबंधित विभाग द्वारा क्षेत्र में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व/अनुविभागीय दण्डाधिकारी को अनिवार्य रूप से प्रदान करना होगी। किसी जल स्त्रोत से पूर्व अनुमति प्राप्त अन्य प्रयोजन के जल उपयोग पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

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