प्रातः भौर होने से पहले मधुर भजन कीर्तन और शंख बजाने की आवाज से कॉलोनी हो या मोहल्ले वासी या ग्रामीण क्षेत्र हर जगह राम की धुन सुनते ही नींद इस तरह खुलती थी जैसे बच्चों को मां उठा रही हो प्यार से। जी हां अभी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में रोज प्रातः निकलने वाली प्रभात फेरी अब आम जनता को बहुत याद आ रही है। रामलाल के मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में बहुत सारी यादें छोड़ गए एक इतिहास बना गए। जो कभी भुला कर भी नहीं भूल सकते। जिसमें आज हम बात कर रहे हैं सबसे पहले सुबह सुबह निकलने वाली प्रभात फेरी की पूरे देश में जैसे यह क्रांति लेकर आई हो और सबको जगा रही हो और जगा कर चली भी गई। अब आम जनता में रामलाल प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन में प्रभात फेरी के लिए यह बात हो रही है कि यह महीने में कभी एक बार जरूर निकल जाना चाहिए संघ और हिंदू संगठन और अन्य संगठन इस पर विचार करें। कितना अच्छा लगता था सुबह-सुबह सभी कॉलोनी मोहल्लेवासी जो एक दूसरे को कभी पहचानते भी नहीं वह केवल एक राम जी की धुन पर साथ चल रहे हो। संगठित होने का सबसे बढ़िया पहला कदम प्रभात फेरी। संगठित होने के साथ कई परिवार जो एकाकी जीवन जी रहे थे उनको तो बहुत ज्यादा लाभ हुआ। उनको मालूम भी पड़ा कि हमारे मोहल्ले में हमारी कॉलोनी में इतने अच्छे धार्मिक और समर्पित लोग हैं उनका आत्मविश्वास बड़ा सुरक्षा की भावना बड़ी साथ में एकता की। सुबह-सुबह अनजाने चेहरे और कब आपस में एक होंगे घुल मिल गए पता ही नहीं चला 15 से 20 दिन में पूरे देश में लाखों परिवार आपस में जुड़ गए। यहां बस एक ही धुन एक ही राग भगवान राम के पति सच्ची श्रद्धा और समर्पण के साथ अपने लोगों को जगाना और फिर से की भावना भी कई जगह स्वागत के साथ सुबह-सुबह ही भंडारे लगा दिए गए। अपने हाथों से बने प्रातः कालीन नाश्ते चाय दूध और फलाहार बांटने का आनंद ही कुछ और था। देर से उठने वाले भी कब सुबह जल्दी उठकर मैदान में आ गए और अब वही दिनचर्या बन गई प्रभात फेरी नहीं तो खेल मैदान बगीचे में योग व्यायाम के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख रहे हैं। प्रभात फेरी में कब राम भक्त कितने किलोमीटर चल लिए पता ही नहीं चला स्वास्थ्य में भी बहुत लाभदायक रही प्रभात फेरी। गांव से लेकर शहर के मोहल्ले और फिर कॉलोनिया जहां पर बच्चों से लेकर बुजुर्ग आशीर्वाद दाता तक एक साथ चल रहे थे। खासकर उन कॉलोनी में जहां पर पड़ोसी पड़ोसी को नहीं पहचानता वहां पर अब मजबूत संगठन बन गया है ।कुछ जरूर अधूरे इनमें से अलग अपने आप को रख कर रह गए हैं उनको रहने दो उनको अपने हाल पर छोड़ दो। एक बार फिर विचार करो महीने में सप्ताह में प्रभात फेरी जरूर निकले । इस जागरण को लगातार चलने दो स्वास्थ्य सुधार के साथ संगठित हिंदू के लिए प्रभात फेरी वरदान साबित हुई है इसे इसे किसी न किसी रूप में चलते रहने देना चाहिए महीने में कम से कम एक बार या किसी त्योहार के पहले प्रभात फेरी जरूर निकले। रामलाल प्राण प्रतिष्ठा के कई सुखद यादों में प्रभात फेरी भी अब आम जनता को बहुत याद आ रही है।
