भगत ••••••बाबा प्रणाम ।
बाबा ••••••••• प्रणाम अब तो पूरे प्रदेश का माहौल उल्टा पुल्टा हो गया है।
भगत•••••• बाबा मंत्री बनने की बड़ी उम्मीद थी जिले से कोई तो मंत्री बनेगा एक भी नहीं बनाया। हमारे देवास जिले को ऐसा क्यों हमेशा छोड़ा जाता है।
बाबा•••••••बेटा इस बार बड़ी उम्मीद थी देवास जिले के तीन विधायकों ने हैट्रिक मारी थी और जिले में सांसद से लेकर सब दूर भाजपा को बहुमत मिला है ।लेकिन देवास को कांग्रेस सरकार के बाद भाजपा की दूसरी पारी में भी मंत्री नहीं मिला है। जबकि पहले एक मंत्री जरूर मिलता था जबकि कांग्रेस की सीट भी थी ।लेकिन पूरे जिले में जब भाजपा ने जीत दर्ज की तो उसका परिणाम सामने है।
भगत ••••मोदी राज है आगे उम्मीद है।
बाबा••••••••••• सही बात है मोदी जी और अमित शाह ने पूरे प्रदेश की कामना हाथ में ले रखी है । अब वही होगा जो केंद्र चाहेगा फिर देवास में जिले से चार दावेदार हो गए थे ।
और चार क्या मानो तो पूरे पांच ही दावेदार थे।
अब आम जनता को थोड़ी सी निराशा है तो समर्थक भी निराश है परंतु विरोधी खुश है। फिर कुछ विधायक की बात करें तो दावेदार विधायक भी इसलिए खुश है कि मेरी कमीज से उसकी कमीज सफेद कैसे मतलब मुझे नहीं बनाया कोई बात नहीं दूसरे पड़ोसी विधायक को भी नहीं बनाया इस बात का पांचो विधायक को संतोष है। वे तो अब यही गाना गा सकते हैं। तुम हमको ना चाहो तो कोई बात नहीं किसी गैर को चाहोगे तो मुश्किल होगी।
भगत •••••• जीतू पटवारी ने थोड़ी ऑक्सीजन दे दी।
बाबा••••••अभी एक माह पहले तो हुए विधानसभा चुनाव में पूरे जिले में पूरी तरह से पराजित कांग्रेसियों में उत्साह ठंडा पड़ गया था और वे हताश और निराश थे ।लेकिन अचानक प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद फिर कांग्रेस में एक ऊर्जावान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बनने के बाद फिर कांग्रेसियों में वही जोश उत्साह है वैसे तो पूरे प्रदेश में यही माहौल है लेकिन देवास जिले में जहां कांग्रेस बहुत बुरी तरह पराजित हो चुकी हे ।
वहां पर जीतू पटवारी नाम का ऑक्सीजन फिर मिल गया है।
देवास जिले में अभी सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं तो जिले की पांचो विधानसभा की सीट भी भारतीय जनता पार्टी के पास ही है। फिर एकमात्र जिला पंचायत अध्यक्ष का बड़ा पद कांग्रेस के पास था लेकिन कुछ समय पहले ही पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा वह उनके साथियों से नाराज होकर कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में चला गया है। अब ऐसे में कांग्रेस के पास बस विपक्ष में विपक्ष की भूमिका निभाने के सिवा और कुछ नहीं रह गया है।
भगत••••बाबा जीतू पटवारी के कारण मनोज चौधरी फिर पावरफुल सकते हैं ।
बाबा•••••••कभी बड़े भाई छोटे भाई की तरह कांग्रेस में एक साथ रहने वाले जीतू पटवारी सबसे ज्यादा देवास में यदि किसी को आगे बढ़ते थे तो वह थे मनोज चौधरी लेकिन मनोज चौधरी ने जब संकट की स्थिति आई और जीतू पटवारी को बेंगलुरु भेजा । तब जीतू पटवारी से सारे रिश्ते खत्म हो गए थे और दोनों के रिश्ते के साथ पार्टी भी बदल गई। यह थी आपस में साथ रहने की बात लेकिन अब विपक्ष में रहने के बाद भी जीतू पटवारी का लाभ जातिगत समीकरण के आधार पर मनोज चौधरी को मिल सकता है क्योंकि खाती चंद्रवंशी समाज देवास की मालवा की कई सीटों पर प्रभाव रखता है और कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष का पद दे दिया है तो भारतीय जनता पार्टी में मात्र तीन विधायक है जिसमें एक वरिष्ठ है तो युवा मनोज चौधरी हैट्रिक बनाकर मंत्री के दावेदार थे। वैसे इनका नंबर इस बार नहीं लगने लगा । लेकिन विपक्ष में प्रमुख नेता समाज के आने के कारण मनोज चौधरी को भाजपा में मजबूत बना दिया है।
भगत••••••• बाबा राजू भैया ने सहकारिता में अंदर ही अंदर तैयारी शुरू कर दी है।
बाबा•••••••बेटा सहकारिता में कभी कांग्रेस का राज था तो धीरे-धीरे भारतीय जनता पार्टी ने अपना वर्चस्व यहां पर जमा लिया पिछले कार्यकाल में देखे तो जिला कोऑपरेटिव से लेकर अधिकांश जगह भारतीय जनता पार्टी भारी रही फिर देवास में तो सहकारी बैंक सेक्टर में जिला अध्यक्ष राजू खंडेलवाल , वरिष्ठ नेता मदन कहार ने अपना वर्चस्व कायम रखा है। जिला अध्यक्ष के पास पूरा जिला है और इस बार वे सहकारिता में भी जिले में वर्चस्व बनाना चाहते हैं इधर विरोधी पवार गुट मैं पूर्व में सहकारिता में जिले मैं अच्छी पकड़ रखने वाले महेंद्र सिंह मकवाना ने अपना वर्चस्व कायम रखा था और विधानसभा चुनाव में भी इन्होंने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है सहकारिता में और भी ग्रामीण क्षेत्र में नेता है लेकिन पवार वोट में एक दमदार नेता स्वाभिमान के कारण मैदान में कम दिखाई दे रहे हैं। पवार गुट में ही पूर्व जिला अध्यक्ष नंदू पाटीदार , फूल सिंह चावड़ा और कई नेता है जो जिला कोऑपरेटिव के लिए मैदान में आ सकते हैं।
इधर कांग्रेस में सब दूर से हारने के बाद अब सहकारिता में ग्रामीण नेताओं के भरोसे ही नैया पार लगाते दिखाई दे रही है वरना इस बार तो भारतीय जनता पार्टी का जिले में सहकारिता में भी पूर्ण रूप से वर्चस्व होने जा रहा है अभी तो जिला अध्यक्ष पूरी तरह सहकारिता विशेषज्ञों को लेकर अपनी गोट जमा रहे हैं।
भगत •••••••शहर कांग्रेस अध्यक्ष विरोधियों को फिर निराशा हाथ लगी।
बाबा ••••सत्ता में सत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर विपक्ष को सत्ता चलाने का अंदाज दिखाने वाले मनोज राजानी विपक्ष में भी तर्क के साथ विरोध प्रदर्शन करते हैं और कई बार सफल भी होते हैं अबकी बार इनकी अपने वाले ही इनको पद से मुक्त करने के लिए लगातार प्रयासरत थे और जब प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ जी के हटने के बाद यह माना जा रहा था कि नए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आने के बाद मनोज राजानी का जाना आता है लेकिन हुआ उल्टा समझने वाले ही समझ सकते हैं कि यह सब कैसे हो गया। एक तो सामने लोकसभा चुनाव तो कोई भी लोकसभा चुनाव तक रिस्क नहीं लगा फिर कांग्रेस की हालत में सभी खराब है जीतू पटवारी ज्यादा से ज्यादा कांग्रेसी को सक्रिय कर सकते हैं लेकिन परिणाम मालूम है मोदी लहर में ठीकरा किसके हाथ फूटेगा । और फिर नई टीम बनाकर पूरी टीम को बुरी तो नहीं बना सकते लोकसभा चुनाव बाद मनोज राजानी विरोधीयो को राहत के चांस है तब तक झेलो और उसके बाद भी भरोसा नहीं प्रदेश में प्रमुख पद पर बैठ गए तो फिर बस चौराहे चौराहे कोसते रहो ।
भगत•••राजे ने अभी से सक्रियता बढ़ा दी।
बाबा•••••भारतीय जनता पार्टी में देवास विधायक राजे की अपनी शैली है ।इस बार इनको जीत भी अलग ही तरीके से मिली है। अंतिम समय में इन्होंने माहौल बदलकर अच्छी लीड ली, जो इनकी 2 वर्ष की लगातार सक्रियता थी उसका ही लाभ मिला। अब फिर नहीं एक पारी की शुरुआत नए अंदाज के साथ शुरू की है वैसे इन्होंने पहले भी 2015 में एक अलग शुरुआत की थी। जिसमें विरोधियों को भी खासकर जब दीपक जोशी गुट विरोध में था उनको भी स्वीकार कर नई पारी की शुरुआत की थी । लेकिन समय बदलने के बाद बहुत कुछ बदल गया अब फिर एक नहीं पारी की शुरुआत कर दी है।
भगत•••••••प्रदीप चौधरी ने भी बैठक ले ली है।
बाबा••••कांग्रेस में हारे हुए प्रत्याशी भले ही हताश निराश हो लेकिन देवास में कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप चौधरी ने भी अभी तक वार्डों में 500 लोगों की दो वार्डो में बैठक ले ली है हारने के बाद भी प्रदीप फिर निकल पड़ा है।
भगत ••••••••बाकी जिले के हारे हुए प्रत्याशी क्या कर रहे है।
बाबा•••••••अभी तक तो किसी की खबर नहीं है लेकिन जो जीते हुए प्रत्याशी है उसमें सभी लगभग मैदान में आ गए हैं और अपने-अपने क्षेत्र में कार्य पर लग गए हैं। कुछ विधायक है जो अपने 5 वर्ष का कार्यकाल गिनते हैं लेकिन कुछ विधायक है जो 5 वर्ष नहीं वह दिन गिनते हैं कि मेरे कार्यकाल में इतने दिन है और मुझे कार्य करने के लिए इतना दिन मिलेंगे और आखिर में उनका कोई नहीं हर पता है क्योंकि दिन ही महत्वपूर्ण है आज ही महत्वपूर्ण है कल कभी नहीं होता।
भगत•••••नगर निगम में हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
बाबा•••••नई परिषद बनी बहुत से वादे और साल दूसरा साल आ गया लेकिन बात वही की वही महापौर ने जरूर कुछ सुधार के प्रयास किया लेकिन कर्मचारी अधिकारी का अपना राज है ठेकेदार का अपना राज है पार्षद कुछ सुधार करने भी आएंगे तो टकराव होगा ही और यही सब हो रहा है जनप्रतिनिधि नहीं यहां पर अधिकारी राज की आदत कोरोना काल में पड़ गई है। कुछ कर्मचारी है जो इमानदारी से कार्य कर रहे हैं लेकिन उनको इस माहौल में ढालना पड़ता है जैसा ऊपर से चल रहा है। नए कमिश्नर कुछ नया करने के प्रयास भी किए थे बात वही की वही अब कुछ महापौर सभापति और कमिश्नर को ठोस निर्णय लेकर नगर निगम की व्यवस्था में सुधार का प्रयास करना पड़ेगा नहीं तो हालत वही के वही और देखते ही देखते पूरा कार्यकाल बीत जाएगा। अधिकारी कर्मचारी और पार्षद विवाद चलते रहेंगे।
