मोदी जी अमित शाह ने दी पहलवान डॉक्टर को मध्य प्रदेश की कमान……………. कई दावेदार को लगा करारा झटका………………………..भारतीय जनता पार्टी ने दूसरी लाइन तैयार कर ली ……. सांप निकलने के बाद लकीर पीट रहे नेताजी……………. भैया के बिगड़े बोल निपटा गए, राजे का धैर्य संयम और टीम… मनोज चौधरी बाल बाल बचे……………………………..मंत्रिमंडल में तीन नहीं चार विधायक दावेदार…….. सभापति और अतिक्रमण अभियान…………… भाग्यशाली भाजपा जिला अध्यक्ष तो कांग्रेस…

भगत………………. समीक्षा बैठक चल रही है प्रदेश में और जिले मेंबाबा…………………..कुछ तो सांप निकलने के बाद लकीर पीटने का काम कर रहे हैं लेकिन होना चाहिए समीक्षा और मंथन भी कि हम क्यों हर और जीतने वाले को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि हम कितने वोट से जीतने वाले थे और कम से क्यों जीते हैं हमारा वोट बैंक कहां गया कहां भूल हुई जिसे सुधारा जा सकता है। हर जिले में हर विधानसभा में कुछ न कुछ खोया है तो किसी ने कुछ पाया है। फिर भारतीय जनता पार्टी की जीत की बात कहे तो यहां सबसे बड़ी बात यह है कि यहां हर नेता कार्यकर्ता है। और कार्यकर्ता की टीम संगठन को जीत ही लाती है ।जबकि कांग्रेस में कार्यकर्ता कम नेता ज्यादा है ।हर कार्यकर्ता अपने आप मैं बड़ा नेता है संगठन इसीलिए धीरे-धीरे पीछे  जा रहा है। हम तो हारने वाले से यही कहेंगे कि अभी भी तुम रेस में आगे पीछे रहे हो जिंदगी की जंग नहीं हारे हो फिर हौसला बुलंद कर मैदान में आओ और जीत लो अगली जंग । राही हो राही रुक जाना नहीं तू कहीं हार के।

भगत ——  मुख्यमंत्री वाला झटका सबसे करारा है

बाबा……..

यह झटका बड़े जोर का लगा। देश के प्रधानमंत्री मोदी जी और गृहमंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश में डॉक्टर मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनकर कई बड़े नेताओं को करारा झटका दिया है जो लंबे समय से मुख्यमंत्री की दौड़ने थे तो वर्तमान मुख्यमंत्री भी सब देखते रह गए । पहलवान के नाम से पहचाने जाने वाले उज्जैन मालवा के मोहन यादव संघ की पृष्ठभूमि के साथ अनुभवी नेता है और बहुत सोच समझकर केंद्रीय संगठन ने इनको मध्य प्रदेश का दायित्व सोपा है ।।जनता में भी आश्चर्य है तो नेताओं में सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात है कि यह नाम अचानक कैसे सामने आ गया। भारतीय जनता पार्टी ने जहां उत्तर प्रदेश में और अन्य प्रदेश में नए चेहरों को मंत्री मुख्यमंत्री का मौका दिया तो कहीं अन्य प्रदेश में भी इसी तरह के बदलाव कर प्रदेश की स्थिति बदली है आज उत्तर प्रदेश पूरे देश में अलग शासन के नाम से पहचाना जाता है। जबकि मध्य प्रदेश में विकास कार्य बहुत हुआ और रेवड़ी की तरह लोक लुभावन योजना बहुत लागू की लेकिन व्यवस्था वही की वही भ्रष्टाचार वही अपराधों का बढ़ावा और माफिया का राज बड़ा है। जबकि आम व्यक्ति चाहता है कि वह ऑफिस ऑफिस की व्यवस्था और भ्रष्टाचार से मुक्ति मिले साथ ही माफिया राज की जगह सुशासन हो अभी तो एक छोटी सी बात है कि भारतीय जनता पार्टी ने शुद्ध रूप से संघ का चेहरा मैदान में उतारा है आम जनता को बहुत उम्मीद है कि अब बहुत कुछ बदल सकता है वरना पूर्व मुख्यमंत्री अगर वापसी रिपीट होते तो सब वही का वही जैसा का तैसा चलता रहता अभी तो कुछ अच्छे की उम्मीद है और भी बात करेंगे अभी तो इतना ही हमारे मालवा के मुख्यमंत्री सबसे करीबी मुख्यमंत्री मोहन यादव जी को बधाई । भगत बाबा चुनाव निपट गए और कई निपट भी गए। बाबा हां बेटा पहली बार इतना कशमकश का चुनाव उसके बाद परिणाम इतना चौंकाने वाला आया कि कई को सदमा है अभी तक उबर नहीं पा रहे है।

भगत ……………………………………………….

राजे का धैर्य संयम और मेहनत रंग लाई। बाबा   …………… देवास में इस बार चुनाव रोचक हुए और किसी ने कल्पना भी नहीं करी थी वही सब हुआ। परंपरागत बोट इधर से इधर हो गए। राजनीति में सब चलता है

विचारधारा अपनी जगह व्यक्तिवाद अपनी जगह और इस बार कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप चौधरी बहुत दमदारी से चुनाव लड़े जनता का समर्थन भी खूब मिला लेकिन सामने कौन था यह सब जानते हैं।  कांग्रेस से देवास की विधानसभा सीट छीनकर भारतीय जनता पार्टी के पाले में लाने वाले राज परिवार ने अभी तक एक भी चुनाव नहीं हारा है। और अपराजित योद्धा की तरह हर चुनाव लड़ा है। इस बार कुछ मुद्दे उनके लिए माइनस रहे तो 2 वर्ष में लगातार राजे और महाराज  आम जनता से सीधा संपर्क और रिकॉर्ड विकास कार्य प्लस रहे । उनके समर्थक और टीमवर्क भी सफल रहा ,फिर विधायक राजे द्वारा स्वेच्छा अनुदान की राशि जो सबसे ज्यादा जरूरमंद के साथ सामाजिक धार्मिक संगठनों को दी गई वह भी चुनाव में बहुत काम आई । इन सबसे बड़ा कारण रहा की प्रदीप चौधरी ने व्यक्तिगत मुद्दे ज्यादा उठाएं और इधर राजे ने बहुत ही धैर्य रखा संयम रखा पूरे चुनाव में विरोधी का नाम तक नहीं लिया यही धैर्य संयम उनके लिए प्लस रहा राजे समर्थक कई जो घर बैठे थे कुछ नाराज भी थे ।अंतिम समय में व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप के कारण राजे के साथ हो गए। यह पहला चुनाव था कि विकास कार्य और अपनी लाइन बड़ी करने से ज्यादा पूरे प्रदेश में विरोधियों ने व्यक्तिगत आप ज्यादा लगाए ।तो देवास में भी यही रहा लेकिन परिणाम सामने है ।जीतने वाले के लिए अब पूरे 5 वर्ष है । तो प्रदीप चौधरी ने भी चुनाव अच्छा लड़ा लेकिन व्यक्तिगत मुद्दे की बजाय अब सामाजिक कार्य के साथ जन समस्या उठाना चाहिए। सत्ता ही मंजिल ना होकर आम जनता के बीच दिल में अपनी जगह बनाना है जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी जीत है।

भगत……… पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा के बड़े बोल ने निपटा दिया। बाबा ……

सही बात है बेटा विपक्ष विरोधी को बोलते बोलते  कथा वाचक तक को बोलना भारी पड़ा फिर सोनकच्छ विधानसभा मैं हारे भी तो इतने मतों से की अब वापसी के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ेगा। 15 महीने के कार्यकाल में सत्ता रहने के बाद कई लोगों को निपटाया व्यक्तिगत ज्यादा मामले निपटाए वह भी दुख दे गए जब आप सत्ता में रहते हैं तो उस समय केवल अपनी बड़ी लाइन करने के साथ संगठन के लिए कार्य करें तो वह चुनाव में और व्यक्तिगत भी अच्छी छवि बनाते हैं लेकिन कई नेता सत्ता आने के बाद घमंड गुरूर में चकनाचूर हो जाते हो जाते हैं और उसका परिणाम अंततः अच्छा नहीं होता है। ऐसा ही 15 माह के कार्यकाल में किया सोनकच्छ ही नहीं आसपास इंदौर तक लोगों से बुरामदी ले ली ।आम व्यक्ति छोटी से छोटी बात याद रखना है नेताजी भूल जाते हैं। जिले में और प्रदेश में टिकट बांटने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सज्जन वर्मा अपने क्षेत्र से ही भारी अंतर से हार गए सबसे बड़ी टीम और सबसे बड़ा चेहरा लेकिन एक नए चेहरे वह भी बाहरी राजेश सोनकर ने बड़ी सरलता से हरा दिया ।राजेश सोनकर ने भी धैर्य संयम के साथ चुनाव लड़ा और सोनकच्छ में नया चेहरा होने के कारण इनका ज्यादा विरोध नहीं था ।कुछ विरोधी अंतिम समय तक लग रहे लेकिन सफल नहीं हुए। सोनकच्छ में जो विरोधी की टीम थी उसमें से आधे से ज्यादा राजेश सोनकर के साथ पूरे समय रहे और सोनकर को जीत कर ही लाए। प्रदेश के ना मी और चर्चित नेता को हराने के कारण राजेश सोनकर का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है पूरे प्रदेश में।

भगत ……….दीपक जोशी का भी यही हाल रहा। बाबा ना माया मिली ना राम। बाबा ……………….पूर्व मंत्री दीपक जोशी में पार्टी बदलने में बहुत जल्दी कर दी इतने वर्षों से जिस संगठन के लिए उनका नाम था उसे छोड़ दिया। दीपक जोशी आशीष शर्मा के गृह क्षेत्र से लड़े। जहां आशीष शर्मा एक दशक से मेहनत कर रहे हैं और इस बार मुकाबला उनके लिए सहज था। लेकिन दीपक जोशी के जाने के बाद मुकाबला टक्कर का हो गया और अंतिम समय में आशीष शर्मा ने बाजी मार ली वरना आखिरी तक यही लग रहा था कि खातेगांव सीट का क्या होगा अब आशीष शर्मा मंत्री के दावेदार भी है और एक पूर्व मंत्री को हरा चुके हैं अब आशीष शर्मा को इस बात पर मंथन करना चाहिए कि इतने वर्ष काम करने के बाद भी आखिर क्या कमी रह गई की कड़े संघर्ष के बाद सीट निकालना पड़ी। इधर जोशी जी को माया मिली ना राम दोनों तरफ से गए पहले जिलों की तीन सीट जीतने की बात कर रहे थे खातेगांव, बागली और हाटपिपलिया अपनी ही सीट नहीं बचा पाए। भगत बागली में एक तरफ मामला रहा। बाबा यह सीट परंपरागत भाजपा की है। आजादी के बाद से केवल एक बार कांग्रेस यहां पर जीती है उसके बाद से भारतीय जनता पार्टी का लगातार जीत का रिकॉर्ड रहा है इसके बाद इस बार पूर्व मंत्री दीपक जोशी यहां पर पुराने अनुभव के आधार पर गोपाल भोंसले कांग्रेस के प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहे थे परंतु संघ के मुरली भवरा ने उन्हें आसानी से हरा दिया दीपक जोशी का पुराना अनुभव पुराने साथी अपने संगठन के साथ खड़े रहे यहीं पर मात हो गई ।

भगत……….  मनोज चौधरी बाल बाल बच गए।

बाबा……… देवास में भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे कमजोर सीट इस बार हाटपिपलिया रही। जहां मनोज चौधरी को जीत के लिए संघर्ष करना पड़ा वहां भी व्यक्तिगत मुद्दे सबसे ज्यादा चले विकास के साथ भूमि अधिग्रहण मुद्दा और स्थानी मुद्दे ज्यादा प्रभावी रहे। फिर राजवीर सिंह बघेल ने पूरे 5 वर्ष मेहनत की थी सेमीफाइनल में लीड बड़ी थी लेकिन इस बार लीड बहुत कम कर दी ,अंतिम किनारे पर जाकर नैया डूब गई। मनोज चौधरी ने हैट्रिक मार ली पहले ऐसे विधायक है जो 5 वर्ष में दो बार विधायक बन गए। और अब तीसरी बार विधायक है इनका कार्यकाल मात्र 5 वर्ष का है परंतु विधायक तीन बार का मतलब राजनीति की डिग्री तो तीन बार मिल गई लेकिन अनुभव मात्र 5 वर्ष का ऐसे ही विधायक  गायत्री पवार राजे पवार को भी 8 वर्ष ही हुए हैं दोनों  उपचुनाव के कारण कम समय में तीसरी बार विधायक है। अब  विरोधी राजवीर सिंह बघेल की बात करें तो पहले तो उपचुनाव में उन्होंने अच्छे ढंग से सरकार के खिलाफ चुनाव लड़ा इस बार ऐसा लग रहा था कि मुकाबला बिल्कुल राजवीर बघेल के पक्ष में है लेकिन अंतिम समय में लाडली बहना और आर्थिक आधार पर मैच पलट गया यहीं पर बघेल थोड़े से मात खा गए । एक छोटी सी बात और देखने में आई की मनोज चौधरी के विधायक बनने के बाद उनके पिता नारायण सिंह चौधरी ने घोषणा कर दी थी कि अब हमारे परिवार का कोई भी सदस्य दूसरा चुनाव नहीं लड़ेगा इसका लाभ भी उन्हें मिला जबकि राजवीर सिंह बघेल के परिवार में जिला पंचायत और स्थानीय सोनकच्छ नगर पंचायत में भी पदाधिकारी है । किसी परिवार के इस निर्णय का आम जनता में बहुत फर्क पड़ता है। नारायण सिंह चौधरी ने अपने समर्थकों को इन पदों पर बनाने का प्रयास किया। इसी तरह देवास विधायक गायत्री राजे पवार ने भी अपने परिवार में दूसरा पद नहीं लिया उनके पुत्र जरूर काला पीपल से विधानसभा की दावेदारी कर रहे थे लेकिन संगठन ने टिकट केवल एक दिया जबकि इन्होंने महापौर सभापति और कहीं पर अपने समर्थकों को दिलवाएं । ऐसे ही प्रदीप चौधरी द्वारा भी महापौर के चुनाव से अपनी पत्नी की टिकट देने की बात पर मना कर दिया था एक ही उद्देश्य था ।विधानसभा चुनाव लड़ूंगा और अच्छा लड़े बस अगली बार से व्यक्तिगत मुद्दे से दूर रहे तो अच्छा होगा। अब 5 वर्ष मेहनत और फिर किस्मत का मामला है मनोज बाबू की फिर लग बैठी है। देवास से मंत्री के दावेदार है।

भगत …………………………भारतीय जनता पार्टी ने तीसरी लाइन तैयार कर ली जबकि कांग्रेस में अभी वही पुराने चेहरे विरोध का सामना कर रहे हैं। बाबा ……….हां बेटा भारतीय जनता पार्टी ने पहले लाइन से लेकर तीसरी लाइन तैयार कर ली। मुख्यमंत्री तक तीसरी लाइन का लाकर खड़ा कर दिया और मंत्रिमंडल में भी इस बार नए चेहरे आने की संभावना है जबकि कांग्रेस में वही पुराने प्रदेश अध्यक्ष से मुख्यमंत्री और वापस प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर करने वाले कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ही चल रहे हैं। तो जिले में वही पुराने कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशोक कप्तान और शहर अध्यक्ष मनोज राजानी।

भगत…….. भाजपा जिला अध्यक्ष भाग्यशाली हैं। बाबा…….. हां बेटा भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष राजू खंडेलवाल पहले जिला अध्यक्ष है जो संगठन की लाइन पर चलने के साथ सबसे सफल जिला अध्यक्ष है जो अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम है वरना पहले पूर्व मंत्री दीपक जोशी या महाराज के ही समर्थक बनने के साथ उनके हिसाब से ही कार्य करते थे। फिर राजू खंडेलवाल के कार्यकाल में पांचो विधानसभा जीतने के साथ पूर्व में नगर निगम महापौर और नगर परिषद के साथ नगर पंचायत और अब तो जिला पंचायत भी है फिर अब तो राजू खंडेलवाल के खास प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बनने के बाद और ज्यादा चलने लगेगी ।

भगत ……

प्राधिकरण अध्यक्ष राजेश यादव की भी । बाबा ……. वैसे तो पूरी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और संघ के सभी नेता देवास में पावरफुल हो गए हैं लेकिन अभी पद पर राजू खंडेलवाल और राजेश यादव होने से इनको ज्यादा लाभ मिलेगा फिर पूर्व प्राधिकरण अध्यक्ष राय सिंह सेंधव विधायक आशीष शर्मा ,राजेश सोनकर, भी मोहन यादव के खास है।

भगत …………………………

चुनाव परिणाम के बाद से ही सभापति रवि जैन भी सक्रिय हो गए हैं । बाबा ………….सभापति रवि जैन ने शहर की मुख्य समस्या एमजी रोड अतिक्रमण और पार्किंग की समस्या के निराकरण का मुद्दा उठाया है क्या बहुत दिन बाद इन सड़कों की किस्मत बदलेगी देखना यह है।

भगत ….

महापौर भी।

बाबा ..

बहुत अच्छी बात है आचार संहिता के हटते से ही महापौर ने जनसुनवाई तुरंत शुरू कर दी नगर निगम में महापौर जनसुनवाई यानी आ बैल मुझे मार, परंतु महापौर ने इस चैलेंज को स्वीकार कर वापस तुरंत जनसुनवाई शुरू कर इरादे स्पष्ट कर दिए की नगर निगम में इस बार बहुत कुछ अच्छा करना चाहते है अब देखना है आगे क्या-क्या होता है। भगत जिले के विधायक और सांसद को भी एक दिन जनता दरबार लगाना चाहिए। बाबा वैसे तो जिले के सांसद और विधायक आम जनता के बीच स्वयं जाते हैं और मिलते हैं घर पर भी सप्ताह में कुछ दिन मिल जाते हैं लेकिन एक दिन यदि यह भी फिक्स कर ले जहा अधिकारीगण भी मौजूद रहे तो जिले और शहर की हालत बहुत कुछ बदल सकती है आम जनता की समस्या कुछ हद तक वहीं पर सुलझ सकती है अभी तो जिले में कलेक्टर जनसुनवाई के बाद महापौर ने स्वयं जनसुनवाई शुरू की है।

भगत ………..कई प्रत्याशी ने कहा था कि वह जिला चिकित्सालय में भी बैठेंगे आम जनता की समस्या के लिए क्या चुनाव हारने के बाद बैठेंगे। बाबा …….

हां बेटा क्या केवल चुनाव तक ही आम जनता की सभी समस्या याद आती है हार गए तो क्या आम जनता की समस्या के लिए कुछ समय विपक्ष के प्रतिनिधि भी नहीं दे सकते क्या पूरे जिले के पांचो कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी के साथ निर्दलीय भी यही बात कर रहे थे। जिसमें प्रदीप चौधरी तो बहुत ज्यादा सेवा की बात कर रहे थे अभी तक तो कोई नजर नहीं आ रहा है देखना है पहले सत्ता पक्ष जिले के चिकित्सालय और मुख्य जगह जहां पर आम जनता की ज्यादा समस्या रहती है वहां पर अपने प्रतिनिधि बिठाते हैं या विपक्ष को थोड़े बहुत भी अपना वादा याद रहता है।

भगत ………………….मुख्यमंत्री बनने के बाद अब  जिले से फिर मंत्री बनाने की मांग आम जनता द्वारा उठाई जा रही है

बाबा……………… वैसे मंत्री तो पिछले कार्यकाल में ही बनाना था लेकिन मुख्यमंत्री ही आधे सफर में बने थे और फिर कोरोना आपदा और बाकी समय ऐसे ही निकल गया इस बार देवास जिले को प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता है । देवास में पांचो सीट जीत कर दी है देवास जिले से सबसे पहले देवास विधायक श्रीमंत गायत्री राजे पवार का महिला और इस परिवार द्वारा लगातार कांग्रेस से यह सीट भाजपा की झोली में डालने के कारण इनका दावा मजबूत बनता है। दूसरे पर खातेगांव विधानसभा के आशीष शर्मा है जो विदिशा संसदीय सीट से आते हैं लेकिन देवास जिले के लगातार तीसरी बार जीतने वाले विधायक है और मुख्यमंत्री के करीबी भी। तीसरे हाटपिपलिया विधायक मनोज चौधरी भी वैसे तो नए चेहरे हैं लेकिन तीन बार विधायक का रिकॉर्ड बना चुके हैं और इनका आसरा प्रदेश के प्रमुख नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया है इनको अगर स्थान मिलता है तो वही मात्र कारण है। इन सब तीनों के साथ देवास जिले में एक और नेता जो राजेश सोनकर अनुसूचित जाति सीट से चुनाव लड़कर प्रदेश के नामी नेता सज्जन वर्मा को हरा चुके हैं। इस तरह देवास में तीन नहीं चार मंत्री के दावेदार है यह बात अलग है ।कि अब उज्जैन संभाग में एक मुख्यमंत्री और एक उपमुख्यमंत्री मिलने के बाद देवास जिले को प्रतिनिधित्व मिलता है या नहीं परंतु अभी तक तो एक उम्मीद है देवास जिले की जनता की कि इस बार देवास के विधायक को प्रदेश में स्थान मिल सकता है।

More posts