मुख्यमंत्री से पहले भी और मुख्यमंत्री के बाद भी ,अब करारी हार के बाद क्या बदलेंगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और जिलों के जिला अध्यक्ष, कांग्रेस में समर्पित कार्यकर्ताओं में बना चर्चा का विषय

कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश में परिवर्तन करने निकले थे। प्रदेश में जनता ने उनकी बात को तो नकार दिया लेकिन एक और बात है कि वह अपनी पार्टी में ही परिवर्तन नहीं कर पाए । अब बानगी देखिए की मध्य प्रदेश में सन 2018 के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ इसके पहले प्रदेश अध्यक्ष थे । उसके बाद बने मुख्यमंत्री और यह माना जा रहा था कि इनके नेतृत्व में ही प्रदेश में सरकार बनी है और इनको मुख्यमंत्री का दायित्व दिया। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद भी कमल नाथ ने प्रदेश अध्यक्ष का पद नहीं छोड़ा। इस पद पर किसी दूसरे प्रदेश के प्रभावित व्यक्ति को मौका दिया जा सकता था लेकिन उन्होंने दोनों पद अपने पद अपने पास रखें यह केवल कांग्रेस में ही संभव है कि एक व्यक्ति मुख्यमंत्री रहने के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी रहता है। अब इनका प्रदेश अध्यक्ष से इतना मोह देखकर शायद किस्मत ने इनको वापस मुख्यमंत्री से प्रदेश अध्यक्ष ही बना दिया। पूरे 5 वर्ष बीतने के बाद फिर एक मौका था कि केंद्र का नेतृत्व प्रदेश में युवा पीढ़ी को मौका दे मौका मिला भी तो जीतू पटवारी तत्कालीन विधायक को प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया। यहां भी वापस प्रदेश अध्यक्ष से मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री से प्रदेश अध्यक्ष तक रहने वाले फेविकोल के जोड़ की तरह जमे कमलनाथ को नहीं हटाया कभी केंद्रीय मंत्री और मुख्य पदों पर रहने वाले कमलनाथ के पुत्र भी अभी सांसद है । अगर कमलनाथ चाहते तो नई युवा पीढ़ी को मौका देखकर दूसरी लाइन तैयार कर सकते थे भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश से लेकर जिला स्तर पर दूसरी लाइन तैयार कर दी संसद से लेकर विधायक स्तर तक के टिकट बदल दिए। जिला अध्यक्ष युवाओं को मौका देने के साथ महापौर से लेकर पार्षद तक के टिकट बदल दिए इस बार भी भारतीय जनता पार्टी ने कई पुराने वरिष्ठ नेताओं को मौका दिया तो कई जिलों में नई युवा टीम उतारी और उनके साथ अपनी ही पार्टी के नए युवा पदाधिकारी ने पूरी मेहनत के साथ कार्य किया जबकि कांग्रेस में वही पुराना चेहरा तो प्रदेश में ही यह हालत नहीं थी कई जिलों में वही पुराने चेहरे सबसे बड़ी बात की जो प्रदेश स्तर के नेता है वह भी जिले में या नगर में पोस्ट लेकर बैठे रहे हालांकि कई जगह इन्होंने विपक्ष की अच्छी भूमिका निभाई लेकिन उनके मुख्य पद पर बैठने के कारण नई टीम तैयार नहीं हो सकती और कांग्रेस वही की वहीं खड़ी दिखाई दी।अब करारी हार के बाद फिर एक बार मांगने लगी है कि क्या अब भी कमलनाथ इसी पद पर जमे रहेंगे या इस्तीफा देंगे दूसरी लाइन के नेता प्रदेश में नेतृत्व करेंगे और जिले में भी यही मांग उठ रही है। अब देखिए एक व्यक्ति एक पद की बात जहां भारतीय जनता पार्टी करती है तो कांग्रेस में इसके विपरीत मुख्यमंत्री के पहले भी कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष मुख्यमंत्री रहते हुए भी दोनों हाथों में लड्डू और उसके बाद भी प्रदेश अध्यक्ष बने रहे और टिकट देने में अपनी मुख्य भूमिका निभाई। कांग्रेस पार्टी बुरी तरह प्रदेश में हारने के बाद भी अभी तक प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ही है इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं जो अभी भी कांग्रेस के लिए समर्पित है वह प्रदेश में बदलाव के साथ अपनी पार्टी में भी बदलाव चाहते हैं जिले की और शहर की भी यही मांग है आगे देखिए।

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