भगत •••••••बाबा प्रणाम दीपावली की शुभकामनाएं। बाबा••••••नमस्कार बेटा कैसी मनी दीपावली।
भगत••••••••••• कोरोना आपदा के बाद पहली बार बाजार में धूमधाम रही अच्छा चल बाजार और अब तो चुनाव का बाजार भी चल रहा है ।धन बरस रहा है बाबा धन। देवास में तो अब लग रहा है कि चुनाव है फिर देवास विधानसभा में बहुत रोमांचक चुनाव हो गया है। बाबा •••••••बेटा पहली बार ऐसी सीधी टक्कर का मामला देखने को मिल रहा है और परिणाम किसी को नहीं पता क्या होगा। भगत•••••••••••• पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत चुनाव हो गया है। बाबा देवास में इस बार रोमांचक चुनाव होने के पीछे कांग्रेस भाजपा के दमदार उम्मीदवार है ।भारतीय जनता पार्टी ने दो बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाली गायत्री राजे पवार को मौका दिया । सामने कांग्रेस ने अंतिम समय में प्रदीप चौधरी को टिकट देकर यह साबित कर दिया कि उनका सर्वे बहुत हद तक सही है। भगत ••••••बाबा गायत्री राजे ने तो देवास शहर में रिकार्ड विकास कार्य कराए उसके बाद भी अगर मुकाबला टक्कर कहे तो फिर जनप्रतिनिधि क्या करें। बाबा •••••••••••••बेटा इस बार प्रदीप चौधरी का जो पीछे दिमाग है उसने गजब का मैनेजमेंट जमाया है ।सीधी राजा को चुनौती दी है सीधा चुनावी टारगेट भी विधायक पुत्र विक्रम सिंह पवार को बनाया है ।और सबसे ज्यादा मुद्दे उनके संबंधित ही उठाए हैं ।वह तो विधायक पवार द्वारा लगातार 2 वर्ष से आम जनता से सीधी संपर्क और मेहनत का परिणाम है पकड़ बरकरार है ।वरना इस चुनाव में देखने को मिल गया कि आप कितने ही विकास कार्य कर लो अगर एक दो छोटी गलती कर दी तो पूरे चुनाव में आपके सारे विकास कार्य एक तरफ और गलतियां एक तरफ। भारतीय जनता पार्टी के पास अपना महापौर सभापति और सर्वाधिक पार्षद होने के बाद भी मामला बराबर पर आकर अटक गया है ।तो इसके पीछे प्रदीप चौधरी की धार्मिक यात्रा और कुछ मुद्दे हैं ,जो सीधे जनता में चर्चा का विषय है। कुल मिलाकर इस बार सीधी राजा को चेक लग रही है वह भी पैदल से वजीर बनकर। राजा चेक तो सरलता से बच सकते हैं लेकिन अपने ही हाथी और कुछ पैदल सामने खड़े हैं। कई बार खिलाड़ी अपने ही मोहरे चाह कर भी नहीं आगे बड़ा सकता।अच्छा यह है कि यहां भी कुछ माइनस पॉइंट है कुछ दिन से शेष है। और क्रिकेट की तरह चुनाव में भी अंतिम समय में क्या बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता बस खिलाड़ी चाहिए शतरंज का हो या राजनीति का।
भगत••••सोनकच्छ में माहौल कैसा है। बाबा•••••यह भारतीय जनता पार्टी ने नया चेहरा भेजा है हालांकि वह पहले सावेर विधानसभा से चुनाव हार चुके हैं। और वहां हारने का कारण भी अब सोनकच्छ में मुद्दा बन गया है। कांग्रेस से सज्जन वर्मा का सोनकच्छ विधानसभा से वर्षों से नाता रहा है। पल-पल का गणित में है जानते हैं। अभी तक वर्मा अग्रणी चल रहे थे लेकिन अब सोनकर भी बराबर में आ गए हैं यहां भी मुकाबला रोचक हो गया है एक तरफ प्रदेश के कांग्रेस के नेता सज्जन वर्मा की इज्जत दाव पर लगी है ।तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी यह सीट किसी भी हालत में जीतना चाहती है यहां पर दोनों ही बाहरी प्रत्याशी है इसलिए यहां पर स्थानीय का मुद्दा वही धरा का धरा रह गया है। सोनकच्छ की जनता को दोनों ही पार्टी ने बाहरी नेता दिया है बस निर्दलीय और कुछ पार्टी के नेता जरूर स्थानीय और मुद्दे वहां पर अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग चर्चा का विषय बन गए हैं।
भगत ••••••••••••••हाटपिपलिया में अलग मामला है। बाबा ••••••••••••••••••••••देवास जिले की जनता को पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि जो कभी कांग्रेस से चुनाव लड़ते थे वह भारतीय जनता पार्टी से लड़ रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी से चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस से लड़ रहे हैं तो यहां पर ऐसे ही भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से दल बदल कर भाजपा में आए मनोज चौधरी को लगातार दो बार टिकट दिया है और मनोज चौधरी पहले ऐसे विधायक के जो 5 वर्ष में दो बार विधायक बन गए हैं। और इनका यह तीसरा टर्न है एक बार तो इन्होंने भारतीय जनता पार्टी कोई हराया दूसरी बार कांग्रेस को और फिर तीसरी बार कांग्रेस के सामने चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने फिर दूसरी बार राजवीर सिंह बघेल को मौका दिया है। बीच में उपचुनाव में भी इनको मौका दिया था लेकिन उपचुनाव सत्ताधारी दल द्वारा पूरी ताकत से लड़ा था और मनोज चौधरी नंबर मार गए थे। लेकिन इसके बाद भी राजवीर सिंह बघेल क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे और मनोज चौधरी की हर कमजोर कड़ी पर प्रहार किया नतीजा यह है कि इस बार यहां पर भी व्यक्तिगत चुनाव हो गया है। मनोज चौधरी विकास पर चुनाव लड़ रहे तो राजवीर सिंह बघेल व्यक्ति का छवि और विरोधी की व्यक्तिगत छवि के मुद्दे पर जनता के बीच जा रहे हैं कुल मिलाकर यहां भी मामला बिल्कुल 50-50 है कहां नहीं जा सकता इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा हाटपिपलिया में।
भगत••••••• बाबा खातेगांव में भी तो यही है। बाबा•••••••••••••••••हां बेटा खातेगांव में भी तीन बार भारतीय जनता पार्टी के टिकट से चुनाव जीतने वाले और एक बार हारने वाले दीपक जोशी को इस बार कांग्रेस ने मौका दिया है। दीपक जोशी के पास बस कांग्रेस की छवि और स्वयं की व्यक्तिगत छवि के साथ आशीष शर्मा के विरोधियों को साथ मिलकर चुनाव लड़ने का मामला है। तो आशीष शर्मा के पास पिछले 10 वर्ष में भारतीय जनता पार्टी द्वारा कराए गए विकास कार्य और स्थानीय का मुद्दा है। खातेगांव कन्नौद विधानसभा में स्थानीय का बड़ा मुद्दा है। यहां अभी तक कोई बाहरी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया है टक्कर जरूर अच्छी दे देते हैं लेकिन अंतिम समय में यहां की जनता स्थानीय उम्मीदवार को ज्यादा महत्व देती है। फिर खातेगांव को जिला बनाने का मामला लगातार 10 वर्षों से चल ही रहा है इस बार भी मुद्दा है इस बार देखना है कि स्थानीय या जनता बदलाव को महत्व देती है ।यहां पर भी दीपक जोशी ने भारी विरोध के बाद भी अपना माहौल बना लिया है मुकाबला टक्कर पर ले आए हैं। बाकी जो होगा ठीक है नर्मदे हर।
भगत••••••• बागली विधानसभा।
बाबा •••••• बागली में भी यही हाल है यहां भी बागली जिला बनाने का मुद्दा और क्षेत्र में रोजगार का मुद्दा प्रमुख है भारतीय जनता पार्टी ने यहां पर इस बार फिर टिकट चेंज किया है तो कांग्रेस ने भी यही किया है भारतीय जनता पार्टी ने शिक्षक मुरली भंवरा को मौका दिया जो स्थानीय तो कांग्रेस से गोपाल भोंसले शासकीय सेवा के छोड़कर जनता की सेवा में आए हैं। इसके पहले भारतीय जनता पार्टी ने सेवानिवृत कर्मचारियों को मौका दिया था। जो बागली की जनता की कसौटी खरे नहीं उतरे। परंतु इस बार कांग्रेस ने विश्वास जताया है अब जनता उन पर विश्वास जताती है या नहीं यह अलग मुद्दा है ।यहां मुख्य मुद्दा बागली जिले का और रोजगार का है क्षेत्र वही का वही पिछड़ा हुआ है सघन सुंदर वन क्षेत्र और नदियों के बीच में बागली विधानसभा के ग्राम परंतु यहां के स्थानीय सभी सुविधा से वंचित है। बस यहां की खासियत यह है कि यहां अभी तक केवल एक बार कांग्रेस जीती है इसके पहले लगातार आठ बार पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी और उनके पुत्र एक बार चुनाव जीत चुके हैं बार-बार चुनाव होने के बाद एक बार मात्र स्वर्गीय श्याम होलानी यहां से चुनाव जीतने में सफल हुए हैं। यहां भी संघर्ष की स्थिति है कांग्रेस को भाजपा से सीट जीतने के लिए संघर्ष तो भाजपा को अपनी सीट बचाने के लिए। इस तरह पहली बार पांचो विधानसभा पर मुकाबला रोचक होने जा रहा है।
भगत•••••••••• इस बार चुनाव में खूब धन बरस रहा है। बाबा•••••••••••• बेटा नेताजी के खाने के दांत अलग और दिखाने के अलग है खर्चा सभी को मालूम है कितना हो रहा है परंतु कागज और कागजी खानापूर्ति कर औपचारिकता पूरी की जा रही है। उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन भी कैसे इस पर नियंत्रण करें क्योंकि लेने वाले और देने वाले जब राजी होते हैं तो उनका पता लगाना मुश्किल इस तरह है कि जिस तरह मछली का पानी में रहकर पानी पीना। मछली कब पानी पीले पकड़ नहीं सकते और पकड़ ले तो साबित नहीं कर सकते इसलिए जिला प्रशासन और उच्च चुनाव अधिकारी कई बार देखकर भी नजरअंदाज कर जाते हैं। चुनाव में इस तरह धन बटना बहुत गलत है कानूनी अपराध है और आने वाली पीढ़ी के लिए घातक भी है लेकिन अभी की साथ सीधी सी बात करें तो छोटी सी बात यह भी है कि कैसे भी हो गरीब की झोली में कोई धन तो तिजोरी से निकल कर बाहर आ रहा है। और यही धन बाजार में तेजी भी लाएगा। इस बार तो वह नेता भी धन खर्च कर रहे हैं जो धन खर्च करने के नाम पर जेब में बिच्छू रख कर चलने के लिए पहचाने जाते हैं और अंतिम समय में हार का कारण भी बन जाता है खैर जो भी हो सब अंदर ही अंदर हो रहा है लेकिन गरीबों के घर कुछ तो आ रहा है।
भगत••••••••• इसीलिए प्रदेश में दीपावली की धूम रही। बाबा •••••••••••वर्ष में हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली महापर्व है जो कल भी व्यक्ति किसी भी स्थिति में हो धूमधाम से बनता था और आज भी। वर्षा ऋतु के बाद जब हल्के से सर्द मौसम में दीपावली का त्योहार कहीं खुशियां लेकर आता है उत्साह लेकर आता है प्यार स्नेह की मिठास लेकर आता है। बारिश के मौसम के बाद घर से लेकर ऑफिस दुकान तक साफ सफाई होने के बाद देखिए दिवाली पर कितने लोगों को रोजगार मिलता है। मिट्टी के दिए बनाने वाले कलाकार से कपड़े ज्वेलर्स पटाखे हार फूल फोटो पूजा की सामग्री बेचने वाले सभी दुकानदार से लेकर कहीं व्यापारी तो केवल दीपावली पर ही अच्छा व्यापार कर लेते हैं रिश्तो को जोड़ने का खुशहाली का महापर्व दीपोत्सव सभी को एक बार कलयुग टाइम की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और सभी से अपील है कि मतदान अवश्य करें।
भगत •••••••••••••••बाबा मालवी भाभी देवास विधानसभा में छा रही है।
बाबा••••••••••••••मालवी भाभी भी प्रचारक बन गई है। और फिर जब सब तरफ व्यावसायिक माहौल है तो हमारी मालवी भाभी भी व्यावसायिक हो गई । भाभी में तो यही कहूं कि लाडो भी नहला दिया और लाड़ी भी नहला दी की कहावत चरितार्थ कर दी तुमने बुरा मत मान जो।
