जिले की दो सीटों पर टिकट पर सबकी नजर, खातेगांव में दीपक जोशी का पलड़ा भारी तो देवास में प्रदीप चौधरी का टिकट दावेदारों में

देवास जिले में भारतीय जनता पार्टी ने तो चार विधानसभा में अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं ।बस एक विधानसभा बागली रह गई है ।जबकि कांग्रेस यहां पर भी पीछे रह गई है। कांग्रेस में मात्र दो सीट जो पहले से ही लगभग तय माना जा रहा था सोनकच्छ में सज्जन वर्मा और हाटपिपलिया में राजवीर सिंह बघेल को टिकट देने के बाद अब पेज उलझ गया है। पहले सबसे ज्यादा देवास विधानसभा के लिए ऊपर दावेदारों में संघर्ष चल रहा था। तो अभी हाल ही में सबसे ज्यादा खातेगांव विधानसभा के लिए प्रदेश के नामी नेता अपने समर्थन के लिए लगे हुए हैं। खातेगांव विधानसभा जब भारतीय जनता पार्टी ने आशीष शर्मा को वापस रिपीट किया है ।उन पर भरोसा जताया है। तो कांग्रेस में यहां पर सबसे ज्यादा दावेदार है स्थानीय में ओम पटेल लक्ष्मी नारायण बंडे वाला ,बंटू मनीष चौधरी का पहले खूब नाम चला ।लेकिन अंतिम समय में पूर्व विधायक कैलाश कुंडल की पत्नी राजकुमारी कुंडल का नाम सामने आने के बाद अब सबसे ज्यादा देवास से खातेगांव गए पूर्व मंत्री दीपक जोशी के लिए रोड़ा बन गए हैं। खातेगांव की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए पूर्व मंत्री दीपक जोशी की वहां पर नजर थी और हाटपिपलिया के साथ वे खातेगांव पर भी नजर गड़ाए थे जिस प्रकार पहले वह बागली विधानसभा विधायक रहते हुए हाटपिपलिया में अपनी फील्डिंग जमा कर वहां से विधायक का टिकट लाकर जीत गए इस तरह वे हाटपिपलिया में हारने के बाद खातेगांव सुरक्षित सीट मान रहे थे लेकिन अचानक किस्मत ने पलटा खाया और वह भाजपा के शीर्ष नेता से अब कांग्रेस के नेता बन गए हैं और पार्टी बदलने के बाद उनके टिकट को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है तभी तो खातेगांव में विरोध के बाद भी लगभग दीपक जोशी का टिकट तय माना जा रहा है उसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि प्रदेश के दो टिकट वितरण करने वाले नेता ही उनके लिए प्रयासरत है और सबसे बड़ी बात की दीपक जोशी वहां से पिछले दो माह से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके हैं यहां तक की सेक्टर प्रभारी तक बना दिए गए हैं देवास के उनके कई समर्थक को वहां पर सेक्टर तक दे दिए हैं अब इसके बाद यदि श्रीमती राजकुमारी कुंडल को टिकट मिल जाता है तो अलग बात है वरना कुछ ही समय बाद किसी भी समय खातेगांव की घोषणा हो सकती है।

अब दूसरा मामला आ रहा है देवास विधानसभा का जहां पर देवास की अपराजित योद्धा श्रीमंत गायत्री जी पवार और उनके पति स्वर्गीय महाराज तुकोजी राव पवार के सामने अभी तक कोई चुनाव नहीं जीत पाया है। देवास में रिकार्ड विकास के साथ उनकी बड़ी टीम और राजमहल से जन सेवक की छवि के कारण देवास में दो दशक लगातार सक्रिय रहने वाले जनता की नब्ज को समझने वाले जय सिंह ठाकुर, जय शास्त्री तक चुनाव हार चुके हैं। क्योंकि इनसे ज्यादा जमीन स्तर पर गली मोहल्ले से लेकर गांव-गांव में बहुत ही कम नेताओं का संपर्क है और ऐसे ही लगातार आंदोलन और जनता के बीच रहने वाले मनोज राजानी तो टिकट लेने से ही बच गये। जबकि उनके लिए सबसे आसान टिकट था ऐसे में देवास में कांग्रेसी नेता प्रदीप चौधरी जो पार्षद रह चुके और उनके पिता स्वर्गीय रतनलाल चौधरी महाराज से बहुत कम मतों से हारे थे उनका नाम नंबर वन पायदान पर चल रहा है तो दूसरे नंबर पर प्रवेश अग्रवाल जिन्होंने अभी 1 वर्ष पहले ही महापौर चुनाव के पहले राजनीति में प्रवेश किया और एक वर्ष में ही विधायक के इतनी प्रबल दावेदार बन गए कि देवास की जनता भी अब सोचने लग गई की प्रवेश भी प्रबल दावेदार और टक्कर देने वाले प्रत्याशी है वरना पहली बार में तो प्रवेश को बाहरी प्रत्याशी मानकर केवल रेडीमेड नेता भी माना जा रहा था लेकिन धीरे-धीरे जनता के बीच धार्मिक सामाजिक आयोजन में कार्य कर अपनी अलग छवि बना ली और स्पष्ट वादी छवि के कारण बहुत जल्द वह प्रदीप चौधरी को क्रॉस कर गए प्रदीप चौधरी के पास कावड़ यात्रा मे आई श्रद्धालु जनता का रिकॉर्ड है और फिर देवास विधायक का विरोध भी इनके द्वारा सबसे द्वारा सबसे ज्यादा किया गया है संगठन में इनके द्वारा भले ही काम कार्य क्या हो लेकिन विरोध कार्य में अग्रणी रहे हैं अब देवास में प्रदीप चौधरी और खातेगांव में दीपक जोशी प्रथम पायदान पर है सूची कभी भी आ सकती है और भी दावेदार थे लेकिन ज्यादा टकराव की स्थिति में उनका नाम आ सकता नहीं तो देवास में दोनों सीट पर इन चार नाम में से दो नाम फाइनल है तीसरा बागली विधानसभा का तो वहां से पूर्व मंत्री दीपक जोशी अपने खास समर्थक जो पूर्व में भारतीय जनता पार्टी से विधायक थे स्वर्गीय चंपालाल देवड़ा की पुत्री को टिकट दिलाना चाहते हैं और संभव है कि इनका टिकट देने के साथ यह टिकट भी कांग्रेस फाइनल कर दे नहीं तो वहां पर नंदू रावत जो दो दशक से मेहनत कर रहे हैं और कहीं दावेदार है लेकिन लगता है कि वहां भी भाजपा से कांग्रेस में आए दोनों परिवार को चांस मिल सकता है अभी तो शहर में इन राजनीतिक गलियारों में चारों के नाम की चर्चा चल रही है अब देखना है इन चारों में टिकट लाने में भाग्यशाली कौन है जीत हार अलग बात है।

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