सामाजिक समरसता मंच द्वारा किया ”कर्मयोद्धा” सम्मान

सामाजिक समरसता मंच द्वारा मल्हार स्मृति मन्दिर मे “कर्मयोद्धा सम्मान” समारोह आयोजित किया, इस अवसर पर नगर के विशिष्ट सेवाकर्मियों को आमंत्रित करके उन्हें “कर्मयोद्धा सम्मान” से अलंकृत किया गया, जो कई वर्षों से स्वच्छता के कार्य को पूर्णदक्षता, व्यवहार कुशलता व समर्पित भाव से संपूर्ण समाज की सेवा कर अपना कर्तव्य निभा रहे है l सामाजिक समसरसता मंच के माध्यम से ब्राह्मण समाज, क्षत्रिय समाज, सकल वैश्य समाज, सिख समाज नाथ समाज जायसवाल समाज आदि विभिन्न समाज प्रमुखों, वरिष्ठ चिकित्सको, समाजसेवी संस्थाओ के गणमान्य नागरिको , मातृशक्ति व पुरुषवर्ग द्वारा ससम्मान पुष्पवर्षा करते हुए प्रशस्ति पत्र, शाल व श्रीफल भेट कर सम्मानित किया गया l कार्यक्रम में अखिल भारतीय नाथ संप्रदाय के संत एवं भर्तहरि गुफा उज्जैन के मठाधीश पूज्यनीय श्री श्री 1008 पीर योगी रामनाथ जी महाराज के विशेष आतित्थ्य, कैलाश जैन के मुख्य आतिथ्य एवं समाज के गणमान्य नागरिको, उद्योगपतियों की गौरवमयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। सामाजिक समसरसता मंच, मालवा प्रान्त के सह-संयोजक श्री धर्मेंद्रसिंह मौर्य कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे। अतिथि परिचय श्री राजेंद्र कराहे ने दिया व सामाजिक समरसता मंच की प्रस्तावना का वाचन एवं स्वागत उद्बोधन समरसता मंच के जिला प्रमुख श्री संजय शुक्ला जी ने दियाl कार्यक्रम के मुख्यवक्ता श्री धर्मेंद्रसिंहजी मोर्य ने समरस हिन्दू समाज को परिभाषित कर अपने विचार व्यक्त किये। आपने २५०० वर्षो सप्रमाण इतिहास उद्धृत करते हुए बतलाया कि विदेशी आक्रंताओ-मुगलो एवं अंग्रेजो की भारत पर शासन करने की नीति के फलस्वरूप भारत में जातियों की संख्या में वृद्धि हुई। जो लोग मुगलो से लड़ते हुए हार गए उन्होंने अपना सम्मान भंग होना स्वीकार किया, अपनी जनेऊ एवं शिखा को त्यागना स्वीकार किया, समाज की गंदगी को दूर करना स्वीकार किया परन्तु अपना सनातन धर्म नहीं छोड़ा। श्री मौर्य ने भिन्न कार्यो के आधार पर अनेको जातियों के वर्गीकरण का कालखंड उद्धृत किया एवं भारत के विभिन्न प्रदेशो में रहने वाली जातियों के मूल गौत्रों के विषयो में जानकारी देते हुए कहा कि समाज में १५०० वर्षो पूर्व किसी भी प्रकार की जाति प्रथा नहीं थी अपितु सब हिन्दू अपने कार्य स्वयं करते थे। जिस तरह आज इस परिसर में ऊंच-नीच का भाव त्याग कर सम्पूर्ण समाज के प्रतिष्टित प्रबुद्धजनों द्वारा हमारे अपने सफाई मित्रो को सहर्ष अलंकृत किया जा रहा है, यही समरस हिन्दू राष्ट्र का आधार स्तम्भ होगा। ततपश्चात सामूहिक वन्देमातरम गीत के साथ कार्यक्रम के अंत मे श्री विमलजी अग्रवाल द्वारा आभार व्यक्त किया गया। उक्त जानकारी मंच सह प्रमुख श्री राजेश जी अग्रवाल ने प्रेक्षित की।

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