— प्रदेश में सर्वे माफिया सक्रिय
जब से भाजपा-कांग्रेस के रणनीतिकारों ने यह ऐलान किया है कि विधानसभा चुनाव में उन्हीं नेताओं को टिकट दिए जाएंगे, जिनके नाम गोपनीय सर्वे में आएंगे, तब से प्रदेश में सर्वे माफिया सक्रिय हो गया है। प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें हैं कि, सर्वे टीमें प्रत्याशियों के सर्वे में फर्जीवाड़ा कर रही हैं। आधारहीन नेताओं को जिताऊ-प्रभावी शाली बताकर नाम जोड़ रही हैं, और जिताऊ-प्रभावी को कमजोर बता नाम सर्वे लिस्ट से काट रही हैं। कहने का मतलब ले-देकर कोई भी संभावित प्रत्याशियों की सर्वे सूची में अपना नाम जुड़वा और दूसरे का कटवा रहा है। नारदजी कहते हैं कि, अब ऐसे सर्वे पर भरोसा करके पार्टियां टिकट वितरण करें, तो यह उनकी मर्जी है। लेकिन इससे सर्वे की शुद्धता तो संदिग्ध तो हो ही गई है। —
— मंत्री जी के पीए का करोड़ों का रिसार्ट! शिवराज सरकार के सबसे कमाऊ महकमे के मंत्रीजी और अफसरों के तो ठाठ हैं ही, मंत्रीजी के ‘करोड़ीमल पीए’ भी ठाठ-बाट में मंत्रीजी से और दो कदम आगे है। रुतबा भी मंत्रीजी से कम नहीं है। दरअसल, मंत्रीजी के इस ‘करोड़ीमल पीए’ के रसूख और ठाठ-बाट राजनीतिक-गलियारों में चर्चा है। मंत्रीजी के ‘करोड़ीमल पीए’ ने खजुराहो में करोड़ों रुपए की लागत से ‘रिसोर्ट’ जो बनवाया है। मंत्रीजी के ‘करोड़ीमल पीए’ ने तनख्वाह की आमदनी में करोड़ों रुपए का रिसोर्ट कैसे बनवाया है, यह अलग जांच का विषय है। लेकिन नारदजी कहते हैं कि ‘करोड़ीमल पीए’ के रिसोर्ट ने मंत्रीजी की कार्य प्रणाली को जरूर संदेह के दायरे में ला दिया है। इसके साथ यह भी खुलासा कर दिया है कि विपक्षी मंदसौर के माननीय पर ‘भ्रष्टाचार’ के जो आरोप लगाते हैं वे झूठे तो कतई नहीं हैं।
— भाजपा दफ्तर में उपल साहब की हैसियत ..! क्या हालत है कि, प्रदेश भाजपा चुनाव आयोग समन्वय विभाग के संयोजक उप्पल साब को इन दिनों भाजपा मुख्यालय के अदने एवं नवेले पदाधिकारियों को अपनी हैसियत बतानी पड़ रही है। दरअसल, उप्पल साब को भाजपा ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग को आचार संहिता उल्लंघन पर कांग्रेस की शिकायतें करने और चिट्ठी-पत्री लिखने का जिम्मा सौंपा है। इसके लिए उप्पल साब ने पार्टी के संबंधित विभाग के पदाधिकारी से एक ‘प्रिंटर’ की डिमांड की। इस पर पदाधिकारी ने ‘प्रिंटर’ क्यों चाहिए, किसलिए चाहिए? तमाम सवाल कर दिए। बस फिर क्या था, उप्पल साब का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। नारदजी कहते हैं कि, जिसने इस पूर्व नौकरशाह का पुराना जमाना और रसूख नहीं देखा है, वो क्या जाने ‘उप्पल’ भला क्या चीज हैं?
—- कांग्रेस ने खोजा ‘विश्वास ‘ हराने का फार्मूला मप्र कांग्रेस ने भोपाल की सबसे मुश्किल नरेला विधानसभा सीट को जीतने और ‘विश्वास’ को हराने का फार्मूला खोज निकाला है। दरअसल, कांग्रेस के तीन नेता लंबे समय से अपने-अपने आकाओं के जरिए भोपाल से दिल्ली तक नरेला से टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस को डर है कि, यदि इनमें से किसी एक को टिकट दे दिया, तो दो उसको हराने में लग जाएंगे। इसके लिए पार्टी ने ‘फार्मूला’ निकला है कि, क्यों न ‘पचौरी’ को नरेला से मैदान में उतार दिया जाए। इससे नरेला की जनता के मन में बैठा ‘विश्वास’ तो डगमगाएगा ही, साथ ही ‘पचौरी’ फार्मूले पर तीन ‘दावेदार’ भी बजाय लाबिंग के मुंह पर अंगुली रखकर कांग्रेस को जिताने में लग जाएंगे। तथा ‘पचौरी’ के नाम के आगे हार का ‘तमगा’ भी जीत के ‘तमगे’ में बदल जाएगा। अब देखना यह है कि कांग्रेस ‘नरेला’ में ‘पचौरी’ फार्मूले पर कितना अमल करती है। ——– Email id-maheshdixit66@gmail.com/(mb)-9893566422
