लोकप्रिय स्तम्भ ‘नारद संहिता’ —— -महेश दीक्षित शिवराज मप्र में अभी सर्वशक्तिमान हैं …! नए प्रवक्ता पुरानों से परेशान भाजपा के नेताजी को घोषणा पत्र की जल्दी क्यों? संस्कृति विभाग में प्रतिनियुक्त साहब की चिंता! एक जिला अध्यक्ष के लिए कांग्रेस के बड़े नेताओं में घमासान

————————— शिवराज मप्र में अभी सर्वशक्तिमान हैं …! राज्य मंत्रिमंडल विस्तार में न भाजपा हाईकमान की चल रही और न मप्र भाजपा संगठन की… सीएम शिवराज सिंह चौहान अभी भी सब पर भारी हैं…जिस तरह से सीएम शिवराज आज-कल में मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रहे हैं, उससे तो यही लगता है। शिवराज अपने मंत्रिमंडल में राजेंद्र शुक्ला, गौरीशंकर बिसेन, राहुल लोधी और जालम सिंह पटेल को शामिल करने जा रहे हैं..इनमें राहुल लोधी को छोड़कर बाकी तीनों नेता पहले भी शिवराज मंत्रिमंडल में रह चुके हैं। शिवराज एक दिन पहले अपने खास पूर्व मंत्री रामपाल सिंह को अंत्योदय समिति के अध्यक्ष पद से नवाज चुके हैं। नारदजी का कहना है कि शिवराज ने विधानसभा चुनाव के पहले अपने ‘प्रिय नेताओं’ को उपकृत कर यह तो जता ही दिया है कि, मध्यप्रदेश भाजपा में अब भी वे ‘सर्वशक्तिमान’ हैं।

—- नए प्रवक्ता पुरानों से परेशान मप्र भाजपा ने पिछले दिनों जिन प्रतिभावान युवाओं को प्रवक्ता और मीडिया पैनलिस्ट बनाया है, वे संगठन के पुराने प्रवक्ताओं और मीडिया पैनलिस्ट से परेशान हैं। वो इसलिए कि पुरानों को लगने लगा है कि, यदि नए प्रवक्ताओं को मीडिया में तवज्जो मिलने लग गई, तो वर्षों से जमी उनकी दुकान बंद हो जाएगी। दरअसल, अब पार्टी घिसे-पिटे चेहरों से किनारा कर चमकदार युवा चेहरों को राजनीतिक तौर पर संगठन में आगे लाना चाहती है। इसी तारतम्य में पार्टी ने हाल ही में भाजपा संगठन में तीन प्रदेश प्रवक्ताओं के साथ चार नए चेहरों को मीडिया पैनलिस्टों की नियुक्तियां की हैं। लेकिन ‘नयों’ को  ‘पुराने’ न सहयोग कर रहे हैं और न आगे बढ़ने दे रहे हैं। नारदजी बताते हैं कि इसकी शिकायत भाजपा हाईकमान तक पहुंची है। इसके बाद पार्टी ने जो-जो ‘पुराने’ पार्टी के फैसलों और ‘नई नियुक्तियों’ से इत्तफाक रखते हैं, उन पर नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है।

—- भाजपा के नेताजी को घोषणा पत्र की जल्दी क्यों? भाजपा ने मप्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव घोषणा पत्र समिति का गठन किया है। इस समिति में एक नेताजी को पार्टी का ‘चुनाव घोषणा पत्र’ बनाने की इतनी जल्दी रही कि, वे समिति की दूसरी बैठक में खुद ही 100 पेज का ‘घोषणा पत्र’ बनाकर ले आए। ये वो नेताजी हैं, जो समिति की पहली बैठक में नाराजगी की वजह से नहीं आए थे। क्योंकि नेताजी को लगता था कि उन्हें समिति में यथोचित नहीं दिया गया है। एक पदाधिकारी ने बताया कि, ये नेताजी इसलिए भी जल्दी ‘घोषणा पत्र’ बनाकर लाए, ताकि भाजपा हाईकमान की नजर में अपने नंबर बढ़वा जा सकें और खुद को न  सही अपने बेटे को विधानसभा का टिकट दिलवा सकें। नारदजी बता दें कि, ये  नेताजी मप्र भाजपा संगठन के प्रमुख पदाधिकारी रह चुके हैं। तथा भाजपा के तेज तर्रार नेताओं में शुमार माने जाते हैं।

— संस्कृति विभाग में प्रतिनियुक्त साहब की चिंता! सत्ताधारी दल भाजपा की पहली लिस्ट आने के बाद प्रदेश में  लगभग चुनावी ‘शंखनाद’ हो ही चला है। राजनीतिक प्रेक्षक प्रदेश में बदलाव की संभावनाओं से इंकार नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सरकार से गले-गले तक उपकृत लोगों की छटपटाहट भी बढ़ने लगी है। बदलाव की आहटों के बीच संस्कृति विभाग की एक अकादमी में काबिज अफसर को जनवरी 2024 में क्या स्थिति होगी? इसकी चिंता सताने लगी है। ये साहब अपने नजदीकियों गाहे-बगाहे ही नहीं, अक्सर अपनी चिंताओं को साझा करते दिखाई देते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक मित्र से आगे की स्थिति भांपते हुए पूछा कि सचमुच में निजाम बदला तो फिर अपना क्या होगा? क्या वापस बच्चों को पढ़ाना होगा? इनके बारे में बताते चलें कि उच्च शिक्षा विभाग से यह संस्कृति विभाग में  प्रतिनियुक्ति पर आए हैं। नारदजी बता दें कि आदिम संस्कृति का विशेषज्ञ प्रचारित करने वाले ये साहब मूल रूप से नर्मदा के अंचल के रहवासी हैं। तथा वर्ष 2003 के पहले कांग्रेस शासनकाल में भी ‘संस्कृति’ को खूब निचोड़ चुके हैं।

— एक जिला अध्यक्ष के लिए कांग्रेस के बड़े नेताओं में घमासान एक जिला अध्यक्ष के लिए प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं में घमासान मचा हुआ है। दरअसल, ब्राह्यणवाद के चक्कर में कांग्रेस के एक बड़े नेता ने विदिशा में अपने एक ऐसे पट्ठे को जिला अध्यक्ष बनवा दिया, जिसके खिलाफ नियुक्ति के पहले दिन से पूरे विदिशा जिले के कांग्रेसियों ने मोर्चा खोल रखा है। धरना दे रहे हैं। उसके  कारनामों का चिट्ठा भोपाल से लेकर दिल्ली तक पार्टी के जिम्मेदारों नेताओं भेजकर शिकायत कर रहे हैं कि, ऐसे अयोग्य एवं आधारहीन लोगों को कांग्रेस का खेवनहार बनाओगे तो बची-खुची पार्टी का भी बंटाढार हो जाएगा। बताते हैं कि शिकायत मिलते ही पीसीसी चीफ ने विवादास्पद जिला अध्यक्ष को हटाने का फरमान तो सुना दिया है। लेकिन नारदजी को पता चला है कि पार्टी के ब्राह्मणवादी बड़े नेताजी ऐड़ी-चोटी का जोर लगाकर अपने पट्ठे की जिला अध्यक्षी बचाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। अब देखना यह है कि नेताजी अपने पट्ठे की जिला अध्यक्षी बचा पाते हैं या नहीं। — Email id-maheshdixit66@gmail.com/(mb)-9893566422

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