विवादित नेताओं पर कौन है कृपालु, मध्य के माननीय की बेइज्जती… ‘ध्रुव’ और “मम्मा’ कहां गायब हो गए? अटलजी को भूला भाजपा मुख्यालय ! ये सौरभ कौन है? ( लोकप्रिय स्तम्भ ‘नारद संहिता) वरिष्ठ पत्रकार महेश दीक्षित जी की कलम से

विवादित नेताओं पर कौन है कृपालु? मध्यप्रदेश में पुन: सत्ता वापसी के लिए भाजपा इतनी बेताव हो रही है कि, लगता है उसने ‘चाल-चरित्र-चेहरे’ के सिद्धांत को खूंटी पर टांग दिया है। हाल ही में उसने कुछ ऐसे भाईसाब को विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी है, जिन पर कई गंभीर हैं। बताते हैं राजगढ़ जिले में जिन भाईसाब को प्रभारी बनाया गया है, वे रागात्मक संबंधों के लिए चर्चित रह चुके हैं। इसके साथ इन भाईसाब परआजीवन सहयोग निधि में गड़बड़झाले के आरोप लग चुके हैं। इसी तरह दो और ऐसे भाईसाब को चुनाव कमेटी में नवाजा गया है, जिन्हें तीन साल पहले भाजपा मुख्यालय में प्रतिबंधित कर दिया गया था। नारदजी कहते हैं भाजपा संगठन ने इन दागी चेहरों की नियुक्तियां अज्ञानता में की हैं या किसी के दबाव में, यह तो वो जाने। लेकिन भाजपा के भीतर ये सवाल उठ रहे हैं कि, क्या पार्टी में ‘उजले-काबिल’ चेहरों की कमी थी, जो दागियों को सिर पर बिठाया लिया गया।

—- मध्य के माननीय की बेइज्जती… भोपाल के तुर्रमखां कांग्रेस विधायक की खुद के विधानसभा क्षेत्र में बेइज्जती क्या हुई, राजनीतिक विरोधी चटखारे ले-लेकर मजे ले रहे हैं। दरअसल, माननीय और इनके चहेते आधा दर्जन पूर्व पार्षदों ने ‘यौमे आजादी’ की दिली मुबारक का बड़ा होर्डिंग भोपाल टाकीज पर लगा ही था कि, ‘माननीय मियां’ के कट्टर राजनीतिक दुश्मन उत्तर विधानसभा के माननीय और उनके बंदों ने यह कहकर उक्त होर्डिंग हटवा दिया कि, हमारी मर्जी के बिना यहां कोई होर्डिंग कैसे लग सकता है? बताते हैं कि, जिस स्थान पर मध्य के माननीय ने होर्डिंग लगवाया था, वो स्थान है तो भोपाल मध्य विधानसभा में, लेकिन वहां रसूख चलता है भोपाल उत्तर विधानसभा के माननीय का। जिनकी तबियत इन दिनों बेहद नासाज चल रही है। नारदजी को कांग्रेस के एक स्थानीय नेता बताते हैं कि, जब से होर्डिंग हटाया गया है तब से मध्य के माननीय के क्षेत्र के लोग जमकर मजे ले रहे हैं। कह रहे हैं कि जो भाई मियां अपने ही क्षेत्र में अपनी इज्जत नहीं बचा पाए, वो जनता की इज्जत क्या बचाएंगे?

— ‘ध्रुव,’ और “मम्मा’ कहां गायब हो गए? विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत से जुटी भाजपा इन दिनों पूरे प्रदेश में विधानसभा-वार कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर रही है। हाल ही में भाजपा ने कांग्रेस काबिज वाले भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया। प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की मौजूदगी में हुए इस सम्मेलन में मध्य के दो पूर्व भाजपा विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह (मम्मा) और ध्रुव नारायण सिंह की गैर-मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। सम्मेलन में ‘मम्मा’ और ‘ध्रुव’ क्यों नहीं आए, यह तो वे ही बता सकते हैं। लेकिन सम्मेलन में गैरहाजिरी दोनों के लिए महंगी पड़ सकती है। वो भी तब जबकि, इनमें से एक पूर्व विधायक आगामी विधानसभा चुनाव में दमखम से टिकट के लिए पुन: दावेदारी जता रहे हैं। नारदजी से भाजपा के एक पदाधिकारी कहते हैं कि, जो पूर्व विधायक यहां से पुन: दावेदारी कर रहे हैं, वो इसलिए भी भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में नहीं आए, क्योंकि वे हमेशा से खुद को पार्टी से ऊपर मानते रहे हैं।

—- , अटल जी को भूला भाजपा मुख्यालय ! यह बात किसी भी शुद्ध भाजपा निष्ठ कार्यकर्ता के लिए बुरी लगना स्वाभाविक है कि, जिन पितृ पुरूषों की बदौलत भाजपा ने विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का गौरव हासिल किया है, भाजपा मुख्र्यालय के भाईसाब लोग, अपने उन्हीं पितृ पुरूषों को विस्मृत करते जा रहे हैं। दरअसल, भाजपा के नेताओं ने हाल ही में ‘गोलोकवासी’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्य तिथि तो मनाई और भोपाल में एमपी नगर स्थित अटलजी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। लेकिन इस दौरान भाजपा मुख्यालय ने अटलजी को पूरी तरह से ‘विस्मृत’ कर दिया। भाजपा मुख्यालय में न अटलजी की पुण्यतिथि मनाई गई और न भाजपा के भाईसाब लोगों ने उन्हें याद करना जरूरी समझा। नारदजी से भाजपा के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता कहते हैं कि, आखिर दुनिया को ‘संस्कार-संस्कृति’ का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा को पार्टी के जिम्मेदार संस्कारी भाईसाब लोग कहां ले जा रहे हैं, समझ से परे है।

ये सौरभ कौन है सौरभ कौन है? सत्ता के गलियारों में इन दिनों सौरभ नामक शख्स के रसूख और जलवे की चर्चा है। आखिर ये सौरभ है कौन? हर कोई यह जानना चाहता है। दरअसल, सौरभ ने हाल ही में होशंगाबाद रोड स्थित एक मैरिज गार्डन में काकटेल पार्टी का आयोजन किया। जिसमें सरकार और प्रशासन में रसूख रखने वाले तमाम अफसर, राजनेता और रसूखदार शामिल हुए। सौरभ के रसूख का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि, काकटेल पार्टी में मेहमानों की मेहमान-नवाजी के लिए चार थानों के टीआई मौजूद थे। नारदजी को पार्टी में पहुंचे एक अफसर ने बताया कि, सौरभ का सत्ता के गलियारों में इतना रसूख है कि जिस काम का कहीं तोड़ नहीं है, कहते हैं उसका तोड़ सौरभ के पास होता है। कहने का मतलब है आपके पास धन-धनाधन है, तो सौरभ के पास हर मर्ज की दवा है। —— Email id-maheshdixit66@gmail.com/ (mb)-9893566422

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