मप्र भाजपा संगठन: दर्द-ए-दिल सुनाएं किसको! सांसद के सवा सौ ‘सांसद प्रतिनिधि’ पंडितजी की तलवारबाजी ! निमाड़ के गांधी की दो बेटियां आमने-सामने… गुड्डू के खिलाफ बेटी हुई विद्रोही ( लोकप्रिय स्तम्भ ‘नारद संहिता’ ——— -महेश दीक्षित)

मध्य प्रदेश भाजपा संगठन : दर्द-ए-दिल सुनाएं किसको! —————————————- मप्र भाजपा संगठन की हालिया स्थिति को लेकर भाजपा के एक वरिष्ठ एवं पुराने नेता की टिप्पणी काबिले गौर है कि, भारतीय जनता पार्टी के स्थापना काल से लेकर अब तक मप्र में चुनाव की रणनीति बनाने, चुनाव समितियों के गठन, किसे टिकट देना है और किसको नहीं देना है, यह सब मप्र भाजपा संगठन और उसके नेता भोपाल में बैठकर तय करते थे। दिल्ली के नेता सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए बतौर स्टार प्रचारक मध्यप्रदेश आते थे। वो भी बुलावे पर। लेकिन ऐसी अनहोनी मध्यप्रदेश भाजपा के इतिहास में पहली बार हुई है, जब मध्यप्रदेश का रिमोट दिल्ली के पास है और मप्र में चुनावी रणनीति बनाने, चुनाव प्रबंधन और चुनावी घोषणा पत्र समितियों के गठन, टिकट किसे देना है, किसे नहीं, दिल्ली के नेता तय कर रहे हैं। नारदजी कहते हैं कि, मध्यप्रदेश भाजपा के साथ हुई इस ‘ऐतिहासिक’ अनहोनी से भीतर ही भीतर हरेक भाजपा कार्यकर्ता दुखी है, लेकिन सवाल है कि ‘दर्द-ए-दिल’ सुनाएं किसको?

सांसद के सवा सौ ‘सांसद प्रतिनिधि’ कहने-सुनने में अजीब लगता है कि जो खुद किसी का प्रतिनिधि है, वह अपने जिम्मे सौंपे गए कार्यों के लिए भी प्रतिनिधि नियुक्त कर देता है। यही नहीं, ये प्रतिनिधि शासन-प्रशासन में हर स्तर पर हस्तक्षेप करते मिलते हैं। अब देखिए न, भोपाल की माननीय सांसद ने तो ‘सांसद प्रतिनिधि’ नियुक्त करने का रिकार्ड ही बना डाला है। भोपाल में उनके सवा सौ से ज्यादा समर्थक गाड़ियों पर ‘सांसद प्रतिनिधि’ लिखी तख्तियां और ‘हूटर’ लगाए घूम रहे हैं। माननीय सांसद ने राज्य और केन्द्र सरकार के तमाम विभागों के साथ भोपाल नगर निगम के सभी 85 वार्डों में बाकायदा ‘सांसद प्रतिनिधि’ नियुक्त किए हुए हैं। नारदजी कहते हैं ये ‘सांसद प्रतिनिधि’ काम क्या करते हैं, यह अलहदा बात है। लेकिन कुछ नहीं तो, इतने सारे समर्थकों का गाड़ी पर ‘सांसद प्रतिनिधि’ लिखने और ‘हूटर’ लगाने का शौक तो पूरा हो ही रहा है। इसके साथ माननीय सांसद की भोपाल भर में जय-जय हो रही है, सो अलग है।

—- पंडित जी की तलवारबाजी ! प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री पंडित गोपाल भार्गव अपने अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 71 साल के पंडितजी आठ बार से लगातार गढ़ाकोटा (सागर) विधानसभा सीट से चुनाव जीतते रहे हैं। कुछ दिन पहले ही पंडितजी ने ‘महत्वाकांक्षी’ बयान दिया था कि उनके गुरु का आदेश है कि वे तीन चुनाव और लड़ें, जो भाजपा के राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा का विषय रहा। हाल ही में पंडितजी ने गृह नगर गढ़ाकोटा में मोहर्रम के अवसर पर निकले ताजिया जुलूस में तलवारबाजी का जबरदस्त प्रदर्शन किया। शायद यह ‘महत्वाकांक्षा’ बताने के लिए कि अभी तो ‘मैं जवान हूं।’ नारदजी को भाजपा के सूत्रों ने बताया है कि इस बार विधानसभा चुनाव में 70 की उम्र पार कर चुके दिग्गज नेताओं के टिकट सकते हैं और पंडितजी की उम्र 71 साल हो चुकी है। अब देखना यह है कि ‘तलवारबाजी’ पंडितजी के कितनी काम आती है।

निमाड़ के गांधी की दो बेटियां आमने-सामने… मध्यप्रदेश में निमाड़ (खरगोन) के गांधी के रूप विख्यात सीताराम साधौ की दो सगी बेटियों-डा. विजयलक्ष्मी साधौ और प्रमिला साधौ में इन दिनों आमने-सामने की जंग छिड़ी हुई है। बड़ी बेटी डा.विजयलक्ष्मी कांग्रेस शासनकाल में मंत्री-सांसद रहने के साथ महेश्वर विधानसभा से चार बार से विधायक हैं। छोटी बेटी प्रमिला साधौ चाहती हैं कि, बड़ी बहन विजयलक्ष्मी ने खूब राजनीतिक सुख खूब भोग लिया, अब यह हक उन्हें मिलना चाहिए। बस, इसी राजनीतिक हक के लिए प्रमिला साधौ ने हाल ही में बड़ी बहन विजय लक्ष्मी पर पिता (निमाड़ के गांधी) के सिद्धांतों से भटकने और पार्टी पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। नारदजी को भाजपा के एक निमाड़ी पदाधिकारी बताते हैं कि प्रमिला में लोग ‘निमाड़ का गांधी’ देख रहे हैं। उनके मैदान में आने से महेश्वर विधानसभा सीट विजयलक्ष्मी और कांग्रेस दोनों के लिए ‘बेहद’ कठिन डगर हो गई है। –

गुड्डू के खिलाफ बेटी हुई विद्रोही ! पूर्व सांसद एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रेमचंद गुड्डू जितने अपने राजनीतिक विरोधियों से परेशान नहीं हैं, उससे कहीं ज्यादा परिवार में चल रही कलह से परेशान हैं। दरअसल, गुड्डू के खिलाफ उनकी बेटी रीना बौरासी (सेतिया) ने ही विद्रोह कर दिया है। रीना, पिता (गुड्डू) को भरोसे में लिए बगैर कांग्रेस के टिकट पर मंत्री तुलसी सिलावट के खिलाफ सांवेर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि ‘तुलसी पहलवान’ के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए रीना को गुड्डू से खुन्नस रखने वाले कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ही उकसाया है। यह कहकर कि, तुम ही ‘तुलसी पहलवान’ को हरा सकती हो। जबकि, राजनीतिक विज्ञानियों का कहना कि, पिता गुड्डू से विद्रोह कर ‘तुलसी पहलवान’ के खिलाफ चुनाव लड़ना और फिर जीतने का ‘मुगालता’ पालना, मुंगेरी लाल के सपने देखना जैसा है। —- Email id-maheshdixit66@gmail.com/(mb)-9893566422

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