(नारद संहिता) ——————————— -महेश दीक्षित ——————————– पीएमओ करा रहा मप्र का सर्वे! ‘नदी का घर’ क्यों चर्चाओं में ‘, भाजपा नेत्री परिदृश्य में कहां खो गई ? होशंगाबाद में ‘शर्मास’ बनाम ‘शर्मा शायद टिकट मिल जाए, विधायक बन जाएं..!

——————————– पीएमओ करा रहा मप्र का सर्वे! भाजपा हाईकमान और पीएमओ आगामी विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है। भाजपा हाईकमान ने चुनाव को लेकर पार्टी और सरकार की जमीनी हकीकत जानने के लिए जो सर्वे कराया था, उसमें पार्टी की जो निगेटिव रिपोर्ट सामने आई, उसके बाद भाजपा हाईकमान ने तो मप्र का रिमोट अपने हाथ में ले ही लिया है। इसके बाद पीएमओ ने भी अपने भरोसेमंद अफसरों की टीम को मध्यप्रदेश में उतार दिया है। बताते हैं पीएमओ के अफसर प्रदेश के जिलों में जा-जाकर अफसरों से पार्टी और सरकार की जमीनी हकीकत जान रहे हैं। इसके साथ पीएमओ के अफसर प्रशासनिक मशीनरी को पीएमओ का संदेश समझा रहे हैं। नारदजी कहते कि, जिस तरह से दिल्ली हाईकमान ने मप्र में पार्टी का स्टेयरिंग संभाला है, उससे तो लगता है कि भाजपा ने ऐन-केन-प्रकारेण मप्र को जीतने की ठान ली है।

— ‘नदी का घर’ क्यों चर्चाओं में ! आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मध्यप्रदेश में भाजपा का स्टेयरिंग भले ही ‘शाह’ ने अपने हाथ में ले लिया हो… भले ही चुनाव प्रबंधन संयोजक के साथ सात-सात प्रभारी मप्र भाजपा के सिर पर बिठा दिए गए हों…टिकट भले ही दिल्ली से तय हों.. लेकिन न जाने क्यों भाजपा के टिकट के दावेदारों को यह लगता है कि टिकट तो ‘नदी का घर’ में निवासरत ‘गुरूजी’ की कृपा और सहमति से ही तय होंगे। इसलिए टिकट के दावेदार इन दिनों भोपाल-दिल्ली भाजपा मुख्यालय की परिक्रमा करने के साथ ‘नदी का घर’ को ‘प्रणाम’ करने पहुंच रहे हैं। नारदजी बता दें कि, ये गुरु जी मप्र भाजपा के पुराने सिद्ध रह चुके हैं। इनके खास शिष्य भाजपा संगठन के एक ‘बड़े पदाधिकारी’ के तौर पर जाने जाते हैं। नारदजी को भाजपा के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने बताया कि भाजपा संगठन के बड़े भाईसाब पार्टी सम्मत जो भी फैसले लेते हैं, उसके पहले ‘गुरूजी’ की सहमति लेते रहे हैं।

भाजपा नेत्री परिदृश्य में कहां खो गई? मप्र भाजपा की दो सुदर्शना नेत्रियां, जिन्हें संगठन के जिम्मेदार भाईसाबों ने सिर-आंखों पर बैठा रखा है। जिनका अपने क्षेत्र में कोई राजनीतिक जनाधार और प्रभाव नहीं है, फिर भी पार्टी ने कई-कई दायित्व और पद सौंप रखे हैं। अचानक ये नेत्रियां भाजपा संगठन के नए परिदृश्य से कहां नदारद हो गईं? यह सवाल विस्मय के साथ भाजपा के नेता-कार्यकर्ता एक-दूसरे से पूछ रहे है। दरअसल, मप्र भाजपा संगठन के कार्यक्रमों, आयोजनों और बैठकों में हमेशा अपनी मौजूदगी से केन्द्रीय मंत्रियों, संघ-संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने वाली ये ‘सुदर्शना नेत्रियां’ मोदी और शाह की हाल ही में हुई भोपाल यात्राओं के दौरान नदारद रहीं। कहां नदारद रहीं? यह तो नेत्रियां ही बता सकती हैं। हां, इतना जरूर है कि, दोनों नेत्रियों को संगठन में ज्यादा तवज्जो दिए जाने को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं ने भाजपा हाईकमान में शिकायत की थी। नारदजी कहते हैं कि भाजपा के नए परिदृश्य में नेत्रियों का नदारद होना इसी का ‘साइड इफेक्ट’ हो सकता है।

— होशंगाबाद में ‘शर्मास’ बनाम ‘शर्मा’ आगामी विधानसभा चुनाव में होशंगाबाद विधानसभा सीट से भाजपा किसको अपना उम्मीदवार बनाएगी? इस सवाल को लेकर यदि कोई सबसे ज्यादा परेशान हैं, तो होशंगाबाद की राजनीति के शर्माएदार ‘शर्मास बंधु’। क्योंकि पांच बार के एमएलए और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा. सीतासरण शर्मा को तो चाहने पर भी इस बार पार्टी उम्मीदवार नहीं बनाएगी, यह तय हो चुका है। हालांकि, सीताशरण के वारिस के तौर पर उनके भतीजे पीयूष शर्मा, जो कि मप्र तैराक संघ के अध्यक्ष हैं, टिकट के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। लेकिन पीयूष शर्मा की राह में डा.राजेश शर्मा, जो कि प्रदेश के जानेमाने चिकित्सक हैं, बड़ा रोड़ा बन रहे हैं। नारदजी को पता चला है कि भाजपा हाईकमान के सर्वे में डा. राजेश शर्मा को होशंगाबाद सीट पर सबसे प्रभावी और जिताऊ नेता बताया गया है। अब देखना यह है कि ‘शर्मास’ बनाम ‘डा.शर्मा’ में पार्टी किस पर भरोसा जताती है। —

शायद टिकट मिल जाए, विधायक बन जाएं..! मध्यप्रदेश कांग्रेस में जिस भी नेता को देखो वो इस मुगालते में है, जैसे कांग्रेस सरकार बनने वाली है। जिस भी नेता को देखो, जो जरा भी सक्षम है, कोई सीधे, तो कोई अपने आंका के जरिए टिकट के लिए दावेदारी कर रहा है। प्रदेश की 230 सीटों में से कुछ सीटों को छोड़ दें, हर सीट पर कई-कई नेता टिकट मांग रहे हैं। कहने का मतलब है-हर सीट पर ‘एक अनार, सौ बीमार’ की स्थिति है। मजेदार बात तो यह है कई सीटों पर तो एक से ज्यादा नेताओं ने इस उम्मीद से चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी है कि, जैसे उनका टिकट फायनल हो चुका है, बस उनके नाम की अधिकृत घोषणा होना बाकी है। नारदजी को कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि, इनमें कई तो ऐसे आधारहीन अचम्भे नेता हैं, जिन्हें अपने ही क्षेत्र में कोई नहीं पहचानता। पर, इस प्रत्याशा में दावेदारी कर रहे हैं, शायद किस्मत चमक जाए…टिकट मिल जाए, विधायक बन जाएं…! —- Email id-maheshdixit66@gmail.com/(mb)-9893566422

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