——————————————— —————————————— साहब की 16 प्रेमिकाए ! मध्यप्रदेश के एक रंगीन मिजाज आईपीएस अफसर, जो कि तीन महीने बाद रिटायर्ड होने वाले हैं, को इन दिनों प्रेम का भूत चढ़ा हुआ है…वे प्रेम पर प्रेम करे डाल रहे हैं… प्रेम करते-करते साहब ने एक के बाद एक ‘सोलह प्रेमिकाएं’ ईजाद कर डाली हैं…खास बात है कि, सोलह में से तीन के साथ तो वे बाकायदा प्रेम की पीगें भर रहे हैं, बिल्कुल सच्चे प्रेमी की तरह…खैर यह तो साहब के दिल और निजता का मामला है…साहब सोलह से प्रेम करें या सोलह हजार से, इससे नारदजी को क्या?…पर नारदजी सरकार के इस जिम्मेदार किरदार के दुश्चरित्र का बखान कर यह बताना चाहते हैं कि, आखिर हमने कैसे-कैसे बागड़-बिल्लों को खेत (समाज) की रखवाली का जिम्मा सौंप रखा है, जो खेत को ही नष्ट- भ्रष्ट करने पर आमादा हैं।
—-, सात मंत्रियों का कटने वाला है पत्ता! मध्यप्रदेश सरकार में अब जब भी रि-सफल होगा, उन सात मंत्रियों का पत्ता कटना तय है, जिनकी वजह से इन दिनों भाजपा सरकार और पार्टी संगठन की खासी फजीहत हो रही है। इन सातों मंत्रियों पर भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप हैं। सातों के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायतें पहुंची हैं। तथा बताते हैं कि, लोकायुक्त ने इनके खिलाफ शिकायतों की गोपनीय ढंग से जांच-पड़ताल करने के साथ सबूती दस्तावेज जुटाने भी शुरू कर दिए हैं। इसमें खास बात यह है कि सातों मंत्रियों के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायतें विपक्ष दलों के नेताओं ने नहीं, बल्कि पिछले कई सालों से प्रताड़ित भाजपा की ही दुखियारों आत्माओं (नेताओं) ने पहुंचाईं हैं। नारदजी कहते हैं कि, इनमें दो मंत्री तो सीएम के अत्यंत करीबी माने जाते हैं, जबकि पांच मंत्री श्रीमंती हैं।
— मंत्री जी के तीन राज भोगी शहर में शॉपिंग मॉल के तीन राजभोगी शहरों में शापिंग माल शिवराज सरकार के एक कद्दावर मंत्रीजी जल्द मध्यप्रदेश के तीन राजभोगी शहरों (संस्कारधानी छोड़कर) में ‘शापिंग माल की चेन’ शुरू करने जा रहे हैं। इसके लिए मंत्रीजी ने तीनों शहरों में शापिंग माल बनवाने का काम शुरू कर दिया है। मंत्रीजी द्वारा तीनों शहरों में कुल चार शापिंग माल बनाए जा रहे हैं। हालांकि, मंत्रीजी के दिमाग में ‘शापिंग माल की चेन’ शुरू करने का आइडिया कहां से आया या किसने दिया यह तो पता नहीं, लेकिन शापिंग माल शुरू करने के लिए मंत्रीजी के पास इतनी सारी ‘लक्ष्मी’ कहां से आई या कौन पार्टनर लगा रहा है? इसको लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। नारदजी कहते हैं कि, मंत्रीजी की ‘शापिंग माल चेन’ पर सत्ता के साकेत से भी निगाहें रखी जा रही हैं। देखना यह है कि ‘शापिंग माल चेन’ मंत्रीजी के राजनीतिक रसूख को बढ़ाती है, या फिर भाजपा हाईकमान की आंखों में किरकिरी कराती है?
—- भाजपा मुख्यालय में विभीषण की तलाश भाजपा मुख्यालय में विभीषणों की तलाश! मप्र भाजपा मुख्यालय में उन विभीषणों की तलाश हो रही है, जो पार्टी की अंदरूनी रणनीति, फैसलों और प्लानिंग की जानकारियों को विपक्षी दल कांग्रेस और मीडिया को पहुंचा रहे हैं। बताते हैं कि भाजपा संगठन के जिम्मेदार भाईसाबों ने पार्टी के प्रशासन एवं मीडिया विंग से जुड़े दो पदाधिकारियों को शक के दायरे में लिया है। तथा दोनों की विभीषण होने के शक में निगहबानी करानी शुरू कर दी है। संगठन के जिम्मेदारों को शक है कि ये पदाधिकारी पार्टी की गोपनीय रणनीति, फैसलों और प्लानिंग की जानकारी बाहर लीक कर रहे हैं। जिससे पार्टी की जनता में तो छबि खराब हो ही रही है, विपक्षी दल कांग्रेस के सामने भाजपा का हर दांव उल्टा पड़ रहा है। इसे कहते हैं कि, घर का भेदी लंका ढहाय।
— कांग्रेसमें आकर पछता रहे हैं भाजपा के भूतपूर्व! भूतपूर्व हो चुके भाजपा के जिन नेताओं की पार्टी में पूछ परख नहीं हो रही थी और आगे विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की संभावनाएं भी लगभग समाप्त हो गई थी, ऐसे कुछ भूतपूर्व नेताओं ने कांग्रेस से टिकट मिलने की प्रत्याशा में दल-बल और गाजे-बाजे के साथ कमलनाथ की मौजूदगी में सिर पर कांग्रेस का सेहरा तो बांध लिया। लेकिन यह क्या? विधानसभा चुनाव के पहले ही भाजपा के इन भूतपूर्वों का कांग्रेस से मोह भंग होने लगा है। कांग्रेस के वातावरण और कमलनाथ के रवैए से पछताने लगे हैं। हाल ही में कांग्रेसी हुए भाजपा के एक भूतपूर्व पीड़ा बयां करते हुए कहते हैं कि, कांग्रेस में भगवान से मिलना तो सरल है, लेकिन कमलनाथजी से मिलना नामुमकिन है!
