देश में कई मंदिरों पर यह फ्लेक्स लग गया है ।और मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर आखिर यह फ्लेक्स लगाना क्यों पड़ा ।आज ऐसी परिस्थितियां क्यों निर्मित हो गई कि हमें यह निवेदन मंदिरों पर करना पड़ रहा है। आजादी के नाम पर कितना कुछ केवल चंद युवतियों -महिलाएं ने कर दिया की मजबूरी में और सख्त रवैया के साथ यह फ्लेक्स देश के कई मंदिरों के साथ अब देवास के खेड़ापति मंदिर पर लगने के बाद चर्चा का विषय बन गया है। सनातन धर्म में नारी शक्ति को पहला स्थान दिया गया है। यहां नारी को देवी का स्वरूप भी मानते हैं। नारी के बिना घर संसार अधूरा है। जिस घर मे नारी होती है वह घर संस्कार और संस्कृति में फलफूलता है। यहां नर के पहले नारी का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। यहां तक की सनातन धर्म मे भगवान भी अपनी अर्धांगिनी के साथ पूजे जाते है। हमारे धार्मिक त्यौहार आयोजनों में पति पत्नी को एक साथ बैठकर बराबरी से पूजा पाठ करने का विधान है। लेकिन आज ऐसा क्या हुआ जो, हमारे धर्म से मिली आज़ादी से कुछ नारीयो ने अपना मूलस्वरूप ही बदल लिया। आज फैशन के नाम पर अंगप्रदर्शन का दिखावा ज्यादा हो चुका है। नारी को श्रगार करने का पूरा अधिकार है। लेकिन आज श्रंगार कम और दिखावा ज्यादा हो गया है। हमारी महिला शक्ति आखिर किस विचार की शिकार हो गई है। फैशन के नाम पर रोज नित नए डिजाइनर नारी के कपड़ो को क्यो छोटा करते जा रहे है। अब समय आ गया है कि इस पर समाज को हर परिवार को गहरा विचार करने की आवश्यकता है। ताकि आने वाली पीढ़ी संस्कारवान बने वरना आज छोटे कपड़ो के लिये विचार हो रहा है… हो सकता है भविष्य में पूरे ही कपड़े नही पहनने पर समाज को विचार करना पड़े। आज इस विषय पर नई पीढ़ी मैं भी 90% युवती अपने पारंपरिक पहनावे के साथ आधुनिक पहनावे में भी सुसज्जित सम्मान के साथ पहने जाने वाले कपड़े को बढ़ावा दे रही है । मात्र 10% के कारण यह सब माहौल बिगड़ रहा है ।आजादी के नाम पर यह कैसी आजादी। सबसे ज्यादा फिल्म और विदेशी संस्कृति के कारण यह सब आया था ।लेकिन आज् विदेश में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है ।तो देश में कुछ चंद 10% के कारण मंदिर में यह बोर्ड लगाना पड़ रहा है।
इस संबंध में महिला जनप्रतिनिधि क्या कहती है । सबसे पहले प्रतिपक्ष नेता अहिल्या पवार नगर निगम अहिल्या पवार का कहना है कि हमें सादगी पूर्ण और हमारी सनातन संस्कृति के अनुरूप ही कपड़े पहनना चाहिए। हमारे व्यक्तित्व को सादगी पूर्ण कपड़े और महत्वपूर्ण बनाते हैं।
, इस पर भारतीय जनता पार्टी पदाधिकारी अनीता राजपूत —-इस तरह के फ्लेक्स को एक अच्छी पहल बताती है और कहती है कि पूरे देश में हर मंदिर पर इस तरह के फ्लेक्स लगना चाहिए।
युवा खिलाड़ी और गायक निकिता मारु कहती है— मेरी यह बात है कि लड़की अपनी हिंदू सभ्यता में ही रहे और ऐसी वेशभूषा से दूर रहे ताकि कोई गलत नज़रिए से न देख सके मंदिर जैसी पवित्र जगह पर ये गलत है सही बात लिखी हे इसमें।
इस संबंध में महिला पार्षद रितु सवनेर के स्पष्ट विचार है —इस विषय में मंदिर समिति ने जो जन जागरण चलाया है उसका मैं सम्मान करती हूं एवं उससे सहमत हूं क्योंकि इसमें जो कुछ भी लिखा गया है वह हमारे समाज की भलाई के लिए ही लिखा गया हम लोगों की संस्कृति ऐसी नहीं है जिसमें हम फटे और अश्लील कपड़े पहन कर भगवान के मंदिर में जाएं यह बात महिला पुरुष बच्चे युवा सभी पर लागू होती है इस तरह के नियम अगर बनाए जाते हैं इसमें कोई बुराई नहीं है इसमें हम लोगों की ही कमजोरी है जो हम लोग अपने धर्म संस्कृति के प्रति जागरूक नहीं हैं हमें अपने धार्मिक स्थलों में अपनी मान मर्यादा का स्वयं ध्यान रखना चाहिए।
इस फ्लेक्स के संबंध में महिला पार्षद आस्था पिंटू देशमुख कहती है कि ऐसे फ्लेक्स सभी जगह लगाना चाहिए यह एक अच्छी पहल है और नारी शक्ति को सबसे पहले अपने पहनावे पर ध्यान देना चाहिए अपने संस्कार अपनी संस्कृति पर।
इस तरह नारी शक्ति के विचारों में ज्यादा समर्थन में ही है परंतु अभी सवाल यह उठता है कि हमें इतना मजबूर क्यों होना पड़ेगी मंदिर में यह सब लगाना पड़ेगी मंदिर अच्छी जगह है जहां पर हम जाएं तो हमारी सनातन संस्कृति के पहनावे के साथ जाएं और मंदिर ही क्यों हम हर जगह पहनाने का ध्यान रखिए चाहे स्कूल हो कॉलेज हो या घर या शादी विवाह हम अपने व्यक्तित्व को निखारे । और व्यक्तित्व का निखार अच्छे पहनावे से ही आता है। अब धीरे-धीरे फिर हम सनातन संस्कृति की ओर जा रहे हैं। अब ऐसे कपड़े पहनने वाले की ना कोई इज्जत होती ना कोई सम्मान केवल वह अपनी नजर में और फैशन की दुनिया में जरूर अभिमान के साथ घूम सकती है। लेकिन सादगी से कपड़े पहनने वाली का हर जगह सम्मान और सुरक्षा मिलती है। अब जो नहीं बदले वह 10% जल्द बदल जाए तो ठीक है ।वरना उनको छोड़ो उनके हाल पर । ना हमारे मंदिर में इनको जगह दो ना हमारे घरों में जगह ।इनकी जगह सादगी वालों को संस्कार वालों को बढ़ावा दो । देवास में खेड़ापति मंदिर समिति को साधुवाद जिन्होंने एक अच्छी पहल की ऐसा अब सभी मंदिरों में फ्लेक्स लग जाए तो बहुत जल्द बदलाव आ जाएगा सबसे पहले देव प्रबंध समिति को मां चामुंडा टेकरी और अन्य देव स्थान पर ऐसे फ्लेक्स लगाना चाहिए और अगर इसी जगह पर इस तरह के कपड़ों के साथ कई बार अन्य लड़कों के साथ भी कहीं लड़की दिखाई देती है तो उनको भी सार्वजनिक रुप से सत्कार करना चाहिए हमारे देवस्थल धर्मस्थल पर अब यह सब नहीं चलेगा ।खेड़ापति मंदिर से एक अच्छी पहल कई महिलाएं और युवतियों ने नाम नहीं देने का निवेदन करते हुए इसका भरपूर समर्थन किया है।
