—————————————————- श्रीमंत के 13 खासों के कटेंगे टिकट! श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के जो 21 विधायक भाजपा में शामिल हुए थे, उन सबकी भाजपा में फजीहत शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव में इनमें से श्रीमंत के 6 खास-रघुराज कंसाना, गिरिराज दंडोतिया, रणवीर जाटव, मुन्ना लाल गोयल, इमरतीदेवी और जसवंत जाटव के टिकट तो कट ही रहे हैं। ये वो श्रीमंती हैं, जो विधानसभा उपचुनाव में हार गए थे। इसके अलावा सरकार में बैठे श्रीमंत के 11 मंत्रियों में से 7 मंत्रियों के टिकट कट सकते हैं। नारदजी कहते हैं कि, इन श्रीमंतियों के इसलिए टिकट कटेंगे, क्योंकि संघ और भाजपा संगठन के जमीनी सर्वे में इन श्रीमंतियों की रिपोर्ट अत्यंत खराब आई है। इसके साथ इन श्रीमंतियों का इनके अपने ही क्षेत्र में भाजपा में जबरदस्त विरोध हो रहा है।
— भाजपा के चार पूर्व विधायक कांग्रेस में जाएंगे! कटनी जिले के भाजपा के चार पूर्व विधायकों-ध्रुवप्रताप सिंह, अलका जैन, सुकीर्ति जैन और गिरिराज किशोर पोद्दार ने भाजपा के जिम्मेदारों-रणनीतिकारों की रीति-नीति पर सवाल उठाकर ऐन विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को मुश्किल में डाल दिया है। ये नाराज पूर्व विधायक उपेक्षा और अनदेखी का आरोप लगाते हुए कह रहे हैं कि सत्ता-संगठन में भागीदारी नहीं, कम से कम सम्मान तो दिला दो। कटनी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता बताते हैं कि, ये चारों पूर्व विधायक इतने उद्वेलित हो चुके हैं कि, कभी भी कांग्रेस में जा सकते हैं। नारदजी कहते हैं कि इन पूर्व विधायकों के बगावती स्वरों की भोपाल से दिल्ली तक इसलिए भी गूंज हो रही है, क्योंकि ये चारों पूर्व विधायक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद वीडी शर्मा के संसदीय क्षेत्र से आते हैं।
— भाजपा के पांच प्रभारी, अंधेरे में हाईकमान ! मध्यप्रदेश भाजपा में पांच प्रभारियों को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने कुछ दिन पहले कहा था कि, ‘पांच पतियों’ वाली ‘द्रौपदी’ की जैसी दुर्दशा हुई थी, वैसी ही दुर्दशा मप्र में ‘भाजपा’ की हो रही है। रघुनंदन शर्मा की इस पीड़ा के भाजपा के पांचों प्रभारियों ने क्या मायने निकाले, यह तो वो जाने। लेकिन इससे यह तो साफ हो गया कि, मप्र में अबकी बार ‘200’ पार का नारा देने वाली भाजपा की जमीनी स्थिति ठीक नहीं है। भाजपा के एक पुराने वरिष्ठ कार्यकर्ता नारदजी से कहते हैं कि, पार्टी की ‘सेहत’ इतनी बिगड़ने के बाद भी यदि मप्र भाजपा संगठन का उपचार नहीं किया जा रहा है, तो इसका सीधा मतलब है पांचों प्रभारी भाजपा हाईकमान को लगातार अंधेरे में रखे हुए हैं। संभवत: पांचों प्रभारियों को पार्टी के डायलिसिस पर जाने का इंतजार है।
—- शोभा, भूपेंद्र बने पीसीसी में मीडिया की धुरी कर्नाटक चुनाव में भारी जीत और उसके बाद राहुल गांधी का दावा कि, अगले विधानसभा में मध्यप्रदेश में हम 150 सीटें जीत रहे हैं, के बाद से मप्र कांग्रेस उत्साह से लबरेज है। पार्टी का ये उत्साह ठंडा न पड़ जाए, इसके लिए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने ‘प्रभावी औरा’ वाले दो पदाधिकारियों को अहम जिम्मेदारी सौंपी है । इसमें शोभा ओझा को कांग्रेस के सभी मोर्चा संगठनों का संयोजक बनाने के साथ पीसीसी में दोबारा बैठा दिया गया है। इसी तरह से प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता, जिनको मप्र कांग्रेस का थिंक टैंक माना जाता है, का कद बढ़ाकर मीडिया समन्वयक की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। नारदजी कहते हैं कि शोभा और भूपेन्द्र विधानसभा चुनाव तक पीसीसी में मीडिया की धुरी रहेंगे और मैदान में कांग्रेस और आक्रामक मुद्रा दिखाई देगी। –
— भाजपा के प्रवक्ताओं का ग्लेमर खत्म हुआ! मध्यप्रदेश भाजपा में पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस, सांसदद्वय महेंद्र सिंह सोलंकी और केपी यादव सांसद सरीखे 17 प्रवक्ता और करीब इतने ही टीवी वार्ताकारों की लंबी-चौड़ी फौज है। लेकिन प्रवक्ताओं की यह फौज अभी वैसी सक्रिय और आक्रामक दिखाई नहीं देती, जैसी पहले टीवी चैनलों पर लड़ती, जूझती और पार्टी का पक्ष रखती दिखाई देती थी। भाजपा के एक पुराने नेता कहते हैं कि जैसे पिछले चार सालों में भाजपा के प्रवक्ताओं का ग्लेमर ही खत्म हो गया है। पार्टी ने जिनको प्रवक्ता बनाया, वे राजनीति करते तो नजर आते हैं। लेकिन न तो विपक्ष के हमलों का जवाब देते दिखाई देते हैं, न पार्टी का सकारात्मक पक्ष रखते नजर आते हैं। नारदजी कहते हैं पार्टी ने हाल ही में आशीष अग्रवाल को मीडिया प्रभारी और गोविन्द मालू को प्रवक्ता बनाकर भाजपा के तेवरों को धार देने की कोशिश तो की है। लेकिन देखना यह कि ये प्रयोग भाजपा के कमजोर मीडिया सेल में कितनी दम फूंक पाता है? —– Email id-maheshdixit66@gmail.com/ (mb)-9893566422
