मध्यप्रदेश में चार प्रकार की भाजपा, और कितने दीपक?, कांग्रेस को सीटों पर नहीं मिल रहे उम्मीदवार, महा आर्यमन को लेकर भाजपा में हड़कंप, पर्यटन निगम की गलती( प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार” महेश दीक्षित “का लोकप्रिय कॉलम” नारद संहिता”)

मध्य प्रदेश में चार प्रकार की भाजपा कर्नाटक विधानसभा चुनाव में हार के बाद मध्यप्रदेश में भाजपा राजनीतिक एवं मनोवैज्ञानिक दबाव में तो आ ही गई है, इसके साथ भीतर-भीतर ही चार भाजपा बन जाने से पूरी पार्टी खतरे के निशान पर पहुंच गई है। ये चार भाजपा हैं-श्रीमंत भाजपा, शिवराज भाजपा, नाराज़ भाजपा और निराश भाजपा। ऊपर से एकजुट और मजबूत नजर आ रही कैडरबेस पार्टी भीतर से छिन्न-भिन्न होकर न जाने कितने नाराज-असंतुष्ट दीपकों से लड़ रही है। नारदजी कहते हैं कि इसी कारण विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कराए गए संघ के सर्वे में 127 सीटिंग एमएलए में से 51 एमएलए हार के मुहाने पर खड़े नजर आ रहे हैं।

—- और कितने दीपक ? जिस तरह शिवराज सिंह चौहान-नरेंद्र सिंह तोमर की जोड़ी कांग्रेस में घुसपैठ कर उसके कई दिग्गज नेताओं को तोड़कर भाजपा में लाई थी, ठीक उसी तर्ज पर कांग्रेस भी घुसपैठ कर भाजपा के नेताओं की तोड़फोड़ की तैयारी में है। पूर्व सीएम कैलाश जोशी के सुपुत्र दीपक जोशी को भाजपा से तोड़ने के बाद कांग्रेस की निगाहें पार्टी से असंतुष्ट पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा के सुपुत्र पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा और पूर्व मंत्री कुसुम मेहदेले पर हैं। हाल ही में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह सुरेंद्र पटवा और कांग्रेस नेता मुकेश नायक कुसुम मेहदेले से मिलने उनके घर पहुंचे थे। भाजपा में सुगबुगाहट हैं कि, यदि पार्टी में मान-सम्मान नहीं मिला, तो जल्द पटवा-मेहदेले भी कांग्रेस में जा सकते हैं। नारदजी बताते हैं कि, कांग्रेस ने ऐसे दर्जनभर असंतुष्ट नेताओं को भाजपा से तोड़ने की रणनीति बना रखी है।

कांग्रेस को इन सीटों पर नहीं मिल रहे उम्मीदवार बुंदेलखंड के दिग्गज नेता एवं शिवराज सरकार में वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह और गोविन्द राजपूत को कांग्रेस ने अगले विधानसभा चुनाव में वाक ओवर देने का मन बना लिया है। गोपाल रहली, भूपेंद्र खुरई और गोविन्द सुखी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते आ रहे हैं और ये अगला चुनाव भी ये नेता इन्हीं क्षेत्रों से लड़ेंगे यह भी तय है। लेकिन इन तीनों नेताओं के सामने चुनाव लड़वाने के लिए कांग्रेस को कोई उम्मीदवार नहीं मिल रहा है। नारदजी कहते हैं कि, उम्मीदवार मिल क्या नहीं रहे, कांग्रेस का कोई नेता इन तीनों नेता के सामने चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है।

महा आर्यमन को लेकर भाजपा में हड़कंप ज्योतिरादित्य सिंधिया जब से भाजपा में आए हैं, अपने बेटे महाआर्यमन को राजनीति में प्रोजेक्ट करने में लगे हैं। वे महाआर्यमन को ग्वालियर की किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाना चाहते हैं। बताते हैं महाआर्यमन के राजनीति में पदार्पण के मंसूबों से ग्वालियर-चंबल संभाग के दिग्गज भाजपा नेताओं में हडक़ंप मचा हुआ है। महाआर्यमन के राजनीति में एंट्री से खासतौर से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर अपने बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह, प्रभात झा अपने बेटे तृणमूल झा और पूर्व मंत्री माया सिंह अपने बेटे पीताम्बर सिंह को लेकर परेशान हैं। महाआर्यमन की राजनीतिक एंट्री से इन तीनों नेताओं को अपने पुत्रों का राजनीतिक भविष्य शुरू होने के पहले ही खतरे में दिखाई देने लगा है। —

पर्यटन निगम की गलती सरकार से हर महीने मोटी-मोटी तनख्वाह ले रहे हैं पर्यटन विकास निगम के अफसरों की लापरवाही देखिए की, उन्हें अब तक यही पता नहीं है कि भोपाल के ‘इस्लाम नगर’ का नाम अब ‘जगदीशपुर’ हो चुका है। दरअसल, पर्यटन विकास निगम द्वारा हाल में ही टेंडर नोटिस विज्ञापित किया गया है, जिसमें जगदीशपुर (पुराना नाम इस्लाम नगर ) किले के इल्युमिनेशन एवं फसाड लाइटिंग एवं किले के बाह्य विद्युतिकरण के लिए निविदाएं ‘इस्लाम नगर’ किले के नाम से आमंत्रित की गई हैं। हालांकि जगदीशपुर को इस्लाम नगर लिखने की ग़लती के लिए निगम के एमडी ने जिम्मेदारों से जवाब-तलब किया है। बताते हैं कि, पर्यटन निगम के दस्तावेजों में अभी सब जगह ‘जगदीशपुर’ नहीं ‘इस्लामनगर’ ही चढ़ा हुआ है। ———– Email-maheshdixit66@gmail.com/(mb)-9893566422

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