देवास भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री दीपक जोशी इस समय अपनी उपेक्षा होने के कारण पार्टी छोड़ने की खबरों को लेकर चर्चा में हैं और इस संबंध में उन्होंने पत्रकारों को 6 मई के बाद निर्णय की बात कही है। अब तक उपेक्षा और संगठन से अलग रह रहे पूर्व मंत्री दीपक जोशी अचानक पूरे प्रदेश में राजनीति गलियारों में चर्चा में आ गए हैं । हर तरफ कयास लगाए जा रहे हैं कि यह कहीं भारतीय जनता पार्टी को अपना वजूद अपनी और ध्यानाकर्षण की खबर तो नहीं तो समर्थक इसे लगातार संगठन द्वारा उपेक्षा बता रहे हैं और उधर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस के नेता लगातार पूर्व मंत्री के जोशी के संपर्क में है तो अब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता संपर्क में आ गए हैं और वह दावा कर रहे हैं कि दीपक जोशी कहीं नहीं जाएंगे अपने ही संगठन में रहकर कार्य करेंगे।
चलो अब चलते हैं कि दीपक जोशी है कौन ? भारतीय जनता पार्टी में जनसंघ के समय से मेहनत कर विपरीत परिस्थिति में संगठन मैं कार्य करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी ने बागली विधानसभा से लगातार विधायक रहने का रिकॉर्ड बनाया तो प्रदेश में ईमानदार नेता के नाम से भी पहचाने जाते थे। उनके पुत्र दीपक जोशी ने भोपाल में छात्र राजनीति से राजनीति का श्रीगणेश किया और पहली बार में ही संगठन के समांतर छात्र मोर्चा पूरे प्रदेश में गठित किया। बाद में संगठन की समझाइश पर अपना मोर्चा भंग कर दिया। भोपाल मैं छात्र राजनीति के बाद वे देवास में भाजपा की राजनीति में पूरी तरह उतर गए और कुछ ही समय में उन्होंने अपना गुट पूरे जिले में बना लिया। भारतीय जनता पार्टी में देवास में महाराज गुट और सामने जोशी गुट का ही वर्चस्व रहा कभी जोशी गुट भारी तो कभी महाराज गुट भारी दोनों के जिलाध्यक्ष बनते रहे। जोशी गुट की महाराज से कभी नहीं बनी कभी-कभी समझौते जरूर होते रहे परंतु रही दूरी की दूरी। बागली विधानसभा के साथ जोशी देवास में भी वर्चस्व जमाना चाहते थे सबसे पहले अपने समर्थक अनिल झवर अशोक सोलंकी को पार्षद का टिकट दिला का लाए परंतु दोनों ही हार गए अनिल तो जोशी के साथ रहे अशोक सोलंकी ने पाला बदल दिया जब की पहली लड़ाई महाराज से अशोक सोलंकी के टिकट के पीछे ही थी ।इसके बाद अनु द्विवेदी और अंजू खंडेलवाल का टिकट संगठन से दिलाया वह भी हार गए। पूर्व महापौर शरद पाचूनकर का टिकट दिलाने में भी सहयोग रहा परंतु पहला चुनाव पाचूनकर हार गए। दीपक जोशी ने पहला चुनाव बागली विधानसभा से लड़ा जहां उनके पिता चुनाव हार चुके थे और जोशी ने उसी विधानसभा सीट से चुनाव पिता का बदला 2003 में पूरा किया। दूसरा चुनाव दीपक जोशी ने जीत के साथ हाटपिपलिया क्षेत्र में लड़ा जहां पर सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व स्वर्गीय ठाकुर राजेंद्र सिंह बघेल से बहुत कम मतों से जीते और तीसरा चुनाव भी जीते और सीनियर के कारण मंत्री पद मिला मंत्री बनने के बाद अपने क्षेत्र के बजाय पूरे प्रदेश पर ध्यान देने और कई कार्यकर्ताओं की नाराजगी के कारण इनको हार का सामना करना पड़ा। वह भी मनोज चौधरी जो आज स्वयं भारतीय जनता पार्टी में है उस समय जनता ने विरोध में जोशी को हराया था ।मनोज को जिताने के बजाय उनका जोशी को हराना मुख्य मुद्दा था। फिर 2020 में उपचुनाव आए और प्रदेश के उच्च नेताओं ने जोशी को टिकट ना देते हुए मनोज चौधरी को अपनी पार्टी से टिकट दिया कल तक कांग्रेस से चुनाव लड़ने वाले भाजपा से लड़े और यहां पर दीपक जोशी को मनाने के लिए प्रदेश के नेताओं ने कई आश्वासन दिए लेकिन चुनाव के बाद फिर वही सब उपेक्षा का रवैया। संगठन और सत्ता के दोनों के नेताओं द्वारा लगातार उपेक्षा के बाद भी वे हाटपिपलिया क्षेत्र में सक्रिय रहे और इस बार उनके प्रति वापिस सहानुभूति आम कार्यकर्ता और जनता में आने लगी परंतु संगठन और विरोधी गुट द्वारा उन पर ध्यान नहीं दिया गया। क्या बड़े क्या छोटे सभी आयोजन में जोशी को दूर रखा गया । इस कारण इनमें भारी नाराजगी है।
3 विधानसभा में प्रभाव पूर्व मंत्री दीपक जोशी भले ही चुनाव हार गए ।कांग्रेसमें जाने के बाद इनको टिकट मिले या ना मिले और मिले भी तो जीते या हारे भरोसा नहीं लेकिन पिछले 5 वर्षों में इन्होंने 3 विधानसभा में वापस अपनी पकड़ बनानी है सबसे पहली इनको विरासत मैं मिली बागली विधानसभा जहां उनके समर्थक को ही विधानसभा का टिकट मिलता है और जीत मैं भी बहुत कुछ योगदान इनका रहता है लेकिन इस बार इनका बागली विधायक पहाड़ सिंह कन्नौजे से तालमेल बिगड़ गया और इनके खिलाफ प्रदर्शन तक हो गया । विधायक बने खिलाफ आओगे लेकिन कई समर्थक इनके आज बागली में अच्छी पकड़ रखते हैं बागली विधानसभा में दीपक जोशी बहुत कुछ कर सकते हैं। दूसरी विधानसभा है उनकी खुद की हाटपिपलिया जहां की जनता ने इनको दो बार जिताया यहां दो बार विधायक रहने के कारण इनको पूरी विधानसभा अंदर बाहर की स्थिति मालूम है और यहां भी यह विधानसभा प्रभावित कर सकते हैं। तीसरा दीपक जोशी ने दो नाव में पांव रखने जैसी स्थिति विधानसभा के लिए भी कर रखी है एक हाटपिपलिया तो दूसरी कन्नौद खातेगांव के जो ब्राह्मण बहुल होने के कारण ब्राह्मण नेताओं के लिए अच्छी सीट मानी जाती है। जोशी वहां लंबे समय से सक्रिय है और इनकी टीम भी बन गई है अच्छा नहीं तो बुरा तो कर ही देंगे। देवास जिले में पांच विधानसभा है सोनकच्छ और देवास में इनके समर्थक जरूर है परंतु यहां ज्यादा बिगाड़ नहीं सकते देवास में पहले ही बहुत कोशिश के बाद भी परिणाम जीरो रहा तो सोनकच्छ में इनके खास को ही टिकट मिलता रहा है बस इनका दावा 3 सीट पर बनता है जहां पर खाओ नहीं तो ढोल दो वाली स्थिति रहेगी इसी कारण प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी के नेता इन को रोकना चाहते हैं दूसरा कांग्रेसी जो सत्ता बिल्कुल अपने करीब मानकर चल रहे हैं वह इनको मनाने के लिए प्रयासरत हैं अब देखना है दीपक जोशी 6 जून बाद संगठन बदलते हैं यहां भारतीय जनता पार्टी संगठन इनके मन को बदल देता है अब जोशी के मन की बात तो जोशी ही जाने। जो भी हो अभी तो प्रदेश की राजनीति में जोशी अच्छे हाईलाइट हो रहे हैं।
