सत्ता और संगठन दोनों पर आर आर आर का जलवा, प्रभारी मंत्री के बोल से हलचल, कलेक्टर का मिशन 3, पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता का मिलन, सट्टा लगा रहा सरकार की छवि पर बट्टा, नगर निगम की गले की हड्डी बना डैम का पानी, आशा कार्यकर्ता अब किससे करें आशा, वन संरक्षक का तबादला, अति का अंत

भगत —बाबा प्रणाम। बाबा —बेटा प्रणाम।

भगत —–बाबा प्रभारी मंत्री किसको जगाना आई थी और किसको जगा गई। बाबा —-बेटा बड़े लंबे समय बाद प्रभारी मंत्री देवास में सक्रिय दिखी और उनके द्वारा बोले गए बोल ने कई भारतीय जनता पार्टी के नेता के कान खड़े कर दिए तो कांग्रेसी नेताओं में सत्ता वापसी की उम्मीद जगा दी। प्रशासनिक हलके में भी इनके द्वारा बोले गए बोल चर्चा में है ।अब थोड़ी सी कांग्रेसियों की भी चलने लगी है। अधिकारी कर्मचारी वर्ग अब दोनों पार्टी के नेताओं में अपनी पकड़ बनाकर रख रहा है। आम नेता कुछ बोलता तो चल जाता लेकिन प्रदेश मैं बहुत कुछ दम रखने वाली नेता द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं को कहीं बात के मायने अलग अलग तरीके से देखे जा रहे हैं । प्रभारी मंत्री द्वारा विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी जैन की अनुपस्थिति पर भी कार्रवाई उनके बदले अंदाज दर्शाती है तो अपने पार्टी के कार्यकर्ता संजय दायमा के घर भोजन कर कार्यकर्ता का उत्साह बड़ा गई।

भगत —दमदार प्रभारी मंत्री है। बाबा—– बेटा अभी तक कई दमदार प्रभारी मंत्री देवास के प्रभारी रहे हैं ।लेकिन वह यहां के दमदार नेता महाराज के कारण न्यूट्रल रहे सबसे पहले कैलाश विजयवर्गीय ने तो महाराज के कारण चंद माह में ही अपना प्रभार बदला लिया ।उसके बाद शिवनारायण जागीरदार ,कैलाश चावला शुभ लाभ करते रहे और वे सत्ता में ही नहीं रहे जगदीश देवड़ा पारस जैन बस नाम के रहे अब राजे के क्षेत्र में राजे प्रभारी मंत्री बनने से थोड़ा सा जरूर असर दिखाई दे रहा है। अच्छा है देवास का विकास हो अच्छी योजनाएं बने और उनका क्रियान्वयन हो वैसे प्रभारी मंत्री के पी ए भी चाय से ज्यादा केतली गर्म वाला व्यवहार कर चर्चा में रहे हैं।

भगत —-सत्ता और संगठन में आर आर आर भारी है। बाबा— समझ गया विधायक गायत्री राजे पवार का जलवा तो रहा ही है पहली बार संगठन में जिलाध्यक्ष राजू खंडेलवाल भी पावरफुल रहे हैं तो उनके साथ महामंत्री राजेश यादव भी कम नहीं थे अब सरकार ने उनका प्रमोशन कर पावर और बढ़ा दिया। पूरे जिले में अब राजे ,राजू और राजेश की चल रही क्या है। राजू खंडेलवाल गुट संगठन के साथ अब सत्ता में भी प्लस हो गए हैं।

भगत — मुर्गी सोने के अंडा देगी । बाबा—राजू यादव का नाम पूर्व में भी महापौर के लिए चला था बाद में सभापति भी लगभग तय था आखिर में पैलेस के कारण पीछे हटना पड़ा । विपक्ष में भी राजू यादव द्वारा किए गए प्रभावी लगातार आंदोलन के कारण राजू यादव का नाम वैसे भी संगठन में ऊपर ही था। फिर प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने वही किया जो उनको करना था। अपने समर्थकों को अभी नहीं तो कभी नहीं वाली स्थिति में अभी ही सब कर दिया। भगत —बाबा राजू के पास 3 पद हो गए। बाबा– एक व्यक्ति एक पद की बात करने वाली भाजपा में एक व्यक्ति को 3 पद मिलना यानी राजू का भाग्यशाली होना भी कहा जा रहा है वैसे एक महामंत्री का पद अब खाली हो जाएगा राजू यादव पार्षद से इसलिए इस्तीफा नहीं दे रहे हैं की उनको जनता ने बड़े विश्वास के साथ चुना रही बात मानदेय की तो वह नहीं लेंगे। महामंत्री पद जरूर खाली होगा। भगत– पूर्व सांसद जय भान सिंह पवैया भी वरिष्ठ नेताओं को जगा गए। बाबा–, राष्ट्रीय नेता जय भान सिंह पवैया पूरे संभाग में वरिष्ठ ही कहना उनको उचित होगा को वापस संगठन में सक्रियता के साथ ला रहे हैं ।इससे दो फायदे होंगे एक तो कई नाराज भाजपा नेता संगठन से जुड़ जाएंगे दूसरा इनके अनुभव का लाभ भी मिलेगा। कई बल्लम नेता भाजपा कार्यालय पर नजर आए।

भगत —-कलेक्टर गुप्ता मिशन 3 पर आ गए हैं। बाबा —-बस कुछ करने का जज्बा चाहिए कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बना ली है अब जिधर भी एक कार्य करेंगे उधर कुछ अच्छा ही परिणाम आएंगे शिक्षा क्षेत्र के बाद चिकित्सा क्षेत्र में और उसके बाद मिशन 3 व्यवस्था में सुधार तो पहले दूसरे के साथ तीसरे पर भी कार्य शुरू कर दिया है। कलेक्टर की छवि अब आम जनता और नेताओं में भी ऐसी बन गई है। कि उनको आलतू फालतू कार्य के लिए दबाव नहीं आएगा बस काम करे जाओ।

भगत—— एडीएम ट्रेनिंग पर है। बाबा –+कई प्रशासनिक कार्य एडीएम महेंद्र काउचे आसानी से निपटा देते थे ।वह 5 मई तक भोपाल ट्रेनिंग में है । एसडीएम की वही कार्यशैली है तहसीलदार दो जरूर नए आए हैं। तलवारे और सपना शर्मा अनुभवी अधिकारी है। तहसील में तो सभी वही का वही है।

भगत– वन विभाग में तबादले में पी एन की जगह पीके आ गए। बाबा— पहले देवास में डीएफओ पोस्ट के अधिकारी रहते थे अब वन संरक्षक को ही जिला दिया जा रहा है। वन संरक्षक पी एन मिश्रा ने कागजी कार्य किए तो शंकरगढ़ पहाड़ी पर दिल लगाकर कार्य किया फालतू विवादों में नहीं पड़े। अब पी एन की जगह बस पी के मिश्रा आ गए। यानी मिश्रा जी की जगह मिश्रा जी आ गए।

भगत —यह लोग अपना हिंदी नाम अंग्रेजी में क्यों रखते हैं फिर अपना सरनेम भी अंग्रेजी में ही क्यों नहीं रख लेते।

बाबा–, अपने माता-पिता द्वारा भगवान का नाम अपने बेटों का इसलिए रखा जाता था कि उनके साथ भगवान का नाम भी ले लेंगे ।लेकिन मां बाप ने दो किताब बच्चों को ज्यादा पढ़ा दी तो बच्चों ने बड़े होकर अपना और अपने पिताश्री का नाम भी अंग्रेजी में बदल दिया। यह मिश्रा जी के लिए नहीं सभी अधिकारी और उन लोगों के लिए है जिनको हिंदी मैं अपने और अपने पिताजी का नाम अच्छा नहीं लगता वैसे नेताओं में या कम देखा जाता है । कई अधिकारी व्यापारी आज भी अपने पिता और अपना नाम भले ही कितना ही बड़ा हो हिंदी में ही शान से लेते हैं ।

भगत –नेता और राजा महाराजा । बाबा– सही बात है नेता और राजा महाराजा ने कभी अपने नाम और संस्कृति से समझौता नहीं किया । मात्र दिखावे के लिए अपने हिंदी नाम को अंग्रेजी में बदलने वाले का क्या भरोसा ।अब जब देश विश्व गुरु बनने जा रहा है हमारी संस्कृति हमारे नाम अपना रहा है हम वही गुलामी की मानसिकता को तो अब छोड़ दे।

भगत —–सट्टा बाजार गर्म है। बाबा—– एक तरफ भारतीय जनता पार्टी स्वच्छ सुशासन प्रशासन का दावा करती है दूसरी तरफ पूरे जिले में सट्टा शबाब पर है नवागत एसपी संपत उपाध्याय के आगमन पर कुछ लगा था कि सट्टा तो कम से कम बंद हो जाएगा लेकिन अभी तक उसी शैली में अभी तो चल रहा है सबसे बड़ी बात आम जनता सबको मालूम है कि शहर में सट्टा जुआ में शराब का कारोबार खुला रूप में चल रहा है बस पुलिस अधिकारी जान कर भी अंजान हैं इसको लेकर शहर में बड़ा आंदोलन आने वाले समय में हो सकता है जब अति होती है तो उसका अंत भी होता है पुलिस के साथ सबसे ज्यादा सरकार की बदनामी हो रही है। भगत जैसे अतीक का अंत हुआ। बाबा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर अब यही चलेगा दिन भर पीछे लगे रहते परंतु बचा नहीं पाए अतीक तो पहले ही मर चुका था पूरी जिंदगी हो गई बुरा कार्य करते रहा अपने परिवार को बर्बाद होते देखा विकास दुबे हो या अन्य माफिया सभी का यही अंत खराब रहा है चंद रूपए और झूठे अभिमान दिखावे मैं माफिया यह भूल जाता है कि अंत बुरा है जबकि इमानदार व्यक्ति का प्रारंभ जरूर संघर्ष में रहता है परंतु अंत सुखद और कुछ इतिहास में अपना नाम लिखा कर ही जाता है अतीक के अंत में कई राज छुपे हैं इस विषय का यही अंत करते हैं बाकी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दिनभर दिखाने को ।

भगत —- डैम का पानी निजी कंपनी को देना निगम के गले की हड्डी बन गया है। बाबा —देवास में नगर निगम के बहुत से कारनामे हैं जागरूक ललित चौहान ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था परंतु नगर निगम अधिकारी ने कभी ध्यान नहीं दिया अब निजी कंपनी को पानी देने का मामला उलझ गया है आगे यह मुद्दा और गर्म होगा।

भगत— पैकि प्लाट का मुद्दा भी चल रहा है। बाबा —मुद्दा बहुत पुराना है अब वापस उसे कांग्रेसी नेता उठा रहे हैं कुछ नहीं तो धरना सबसे अच्छा कार्य है। ज्यादा संख्या की आवश्यकता नहीं कुछ व्यक्ति भी बैठ सकते हैं ।वरना आंदोलन में ज्यादा भीड़ कहां से लाएं जनता आगे आती नहीं और पार्टी के बड़े नेता पहले ही यह मुद्दा ज्यादा उठा चुके हैं। अब उनको विधानसभा दिख रही है ,और मुद्दे भी विधानसभा वाले ही जोर पकड़ेंगे।


भ्ग्त्—— आशा कार्यकर्ता की भी कोई नहीं सुन रहा। बाबा ——क्या करें सारे तरीके के जतन कर लिए सरकार तक बात पहुंच जाए अब तो बहनों ने अपने खून की पाती भी लिख दी ।अब शायद मामा की नजर पड़ जाए। इनका भी धरना आंदोलन की तरह आंदोलन जारी है ।कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है ।अभी तक एक होकर लगातार संघर्ष कर रही है।

भगत—– पूर्व पुलिसकर्मी से शराब पकड़ाई। बाबा—— हां बेटा कभी पुलिस अधीक्षक की स्कॉट में कई अपराधियों को जेल भेजने वाले राजेंद्र राठौड़ ने छोटे से लालच मैं अपना पद गवा दिया ।अब अपराधी की दुनिया में प्रवेश कर गए हैं एक अच्छा पुलिसकर्मी छोटे से चंद लोगों के लालच में कैसे सब कुछ खो देता है। यह देवास के कुछ बर्खास्त पुलिसकर्मी को देखकर समझा जा सकता है ।आधी रोटी छोड़कर पूरी के चक्कर में आधी भी हाथ से गई।

भगत –जेल अधीक्षक उषा राज का भी यही हाल है। बाबा —–वैसे तो कई उदाहरण है परंतु यह ताजा उदाहरण है कि जिस जेल में उषा राज चलता था आज वहां पर उसी को अपने सोने खाने के लिए लाले पड़ रहे हैं जेल से जेल बदलना पड़ रही है ।लालच यहां भी पूरा निकल गया। लालच के साथ बेंडा हाथी घर की फौज मारे की तरह उषा राज ने अपने विभाग वालों से ही ज्यादा पंगा लिया। आज सबसे ज्यादा उसी विभाग में उसे संघर्ष करना पड़ रहा है अपने जेल विभाग में भी फजीहत हो रही है जब आप पद पर रहे तब अपने विभाग और अधीनस्थ से अच्छे लगे तो बुरे समय में भी अच्छे लोग और अच्छे कर्म काम आते हैं ।

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