देवास। सामाजिक कार्यकर्ता ललित चौहान ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर महापौर एवं एमआईसी सदस्यों को आवेदन दिया। साथ ही निगम के समस्त पार्षदों को सोशल मीडिया के माध्यम से आवेदन की कॉपी पहुंचाई। जिसमें आगामी दिनों में होने वाली परिषद की बैठक में नगर के प्रमुख मुद्दों को परिषद में शामिल करने की मांग की गई। आवेदन में मांग की गई कि शहर के विकास कार्यो से सर्वदा अग्रसर रहे ऐसी शुभेक्षा के साथ में पानी से संबंधित शहर हित के महत्वपूर्ण मुद्दे को आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ। शिप्रा नदी पर निगम के द्वारा वर्षाकालीन पानी को एकत्रित करने हेतु क्षिप्रा डेम का निर्माण करवाया गया है। जिससे कि नगर के आमजन को पेयजल आसानी से उपलब्ध हो सके। जिसके लिए निगम के द्वारा भारी-भरकम राशि खर्च कर डेम निर्माण करवाया गया है। इस महत्वपूर्ण डैम के निर्माण में निगम की महत्वाकांक्षी योजना लोधरी परियोजना की भी राशि को संशोधित कर शिक्षा डैम पर खर्च किया गया है। जिसकी वजह से लोधरी नदी पर बनने वाली महत्वाकांक्षी योजना को निगम को बंद करना पड़ा। तत्कालीन नगर सरकार (परिषद) एवं नगर निगम प्रशासन द्वारा आर्थिक कारण बताया गया कि किसानों को मुआवजे की राशि देना है। जिनकी जमीन शिक्षा डैम के निर्माण के अंतर्गत डूब में आ रही है उन लोगों के द्वारा जब लोधरी परियोजना की राशि परिवर्तित की जा रही थी। शिप्रा प्रेम हेतु उस समय मेरे द्वारा आपत्ति दर्ज करवाई गई थी। लेकिन निगम प्रशासन एवं तत्कालीन परिषद के द्वारा इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया गया। जिसकी वजह से आज निगम की माली हालत और बिगड़ी। निगम को नर्मदा विकास संभाग के द्वारा तकरीबन 496 करोड रुपए से अधिक का पानी का बिल दे दिया गया। मेरे द्वारा जब पहली बार सन 2013 एवं 2014 में प्रस्ताव दिया गया था तब निगम के ऊपर पानी का एक रुपए का भी बिल किसी संस्थान का बकाया नहीं था। लेकिन तत्कालीन परिषद एवं निगम प्रशासन के द्वारा बार-बार पत्र व्यवहार करने के बावजूद भी इन विषयों पर कार्य नहीं किया गया। जिसका खामियाजा निगम को आर्थिक रूप से उठाना पड़ रहा है। जिसका भार भविष्य में नगर की आम जनता पर भी पड़ेगा। अभी भी वर्तमान परिषद एवं निगम प्रशासन मेरे बताए गए सुझाव पर कार्य करता है तो निगम को आगे और आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा एवं नगर हित में भी होगा। मेरे सुझाव बिंदुवार इस प्रकार है- बिंदु क्रमांक 1 – निजी संस्था देवास वाटर प्रोजेक्ट के द्वारा शिप्रा जैम में एकसित वर्षा कालीन पानी को लिया जा रहा है। वह सबसे पहले बंद करना होगा। निजी संस्था के द्वारा डेम से पानी लेने की वजह से डैम का पानी जो कि मई माह तक चलना चाहिए। वह दिसंबर में ही खत्म हो जाता है। जिसकी वजह से निगम को नर्मदा विकास संभाग से पानी की मांग करना पड़ती है। जिसी की भारी-भरकम राशि निगम को देना पड़ती है। जबकि वर्षाकालीन पानी हमारा है। उस वर्षाकालीन पानी की कीमत निजी संस्था नर्मदा विकास संभाग को देती है, जबकि होना यह चाहिए कि उस पानी की कीमत निगम देवास को मिलना चाहिए। वह भी निगम जो दर तय करेगी उसके अनुसार राज्य शासन ने निजी संस्था देवास वाटर प्रोजेक्ट को डैम की निशुल्क उपयोग करने की अनुमति दी है। जिसका निगम परिषद ने संकल्प पारित कर कि निगम को आर्थिक हानि पहुंच रही है। यह निर्णय राज्य शासन को बदलना चाहिए। इस प्रकार का संकल्प शासन को परिषद द्वारा पहुंचाना चाहिए। बिंदु क्रमांक 2- नर्मदा विकास संभाग जिस दर में निगम को पानी देता है वह दर रु 22.60 पैसे प्रति हजार लीटर है। जबकि निगम शासकीय संस्था है उस पानी का दर 20 पैसे प्रति हजार लीटर होना चाहिए। इस प्रकार का प्रस्ताव परिषद में रखकर शासन को भेजा जाना चाहिए। ताकि शासन के संज्ञान में निगम परिषद का यह महत्वपूर्ण विषय आए और उस पर कार्यवाही हो सके। बिंदु क्रमांक 3 – निजी संस्था देवास वाटर प्रोजेक्ट निशुल्क क्षिप्रा उस का उपयोग कर रही है, जबकि उस कॅम के रखरखाव (संधारण) पर भारी भरकम राशि निगम की खर्च होती है यह भी परिषद में प्रस्ताव रख पारित करना चाहिए कि हम के संधारण पर जो राशि खर्च हो रही है वह संपूर्ण राशि निजी संस्था देवास वाटर प्रोजेक्ट से भी जानी चाहिए। बिंदु क्रमांक 4- जब भी कोई व्यक्ति अन्य किसी व्यक्ति के संसाधनों का उपयोग करता है तो किराए के रूप में राशि ली जाती है। उसी तरीके से निगम के क्षिप्रा डेम का उपयोग निजी संस्था दबाव प्रोजेक्ट द्वारा किया जा रहा है तो उसका भी किराया तय होना चाहिए जिससे कि निगम आर्थिक स्थिति सुधरेगी। बिंदु क्रमांक 5 – नगर निगम देवास एवं नर्मदा विकास संभाग के बीच में पानी को लेकर अनुबंध निष्पादन किया जाना है जिसका प्रारूप नर्मदा विकास संभाग के द्वारा निगम को दिया गया था। निगम ने उसमें कुछ संशोधन कर प्रारूप को वापिस नर्मदा विकास संभाग को दिया। जब मेरे द्वारा कहा गया था कि अनुबंध के प्रारूप में कंडिका नंबर 7 पर जो शर्त डली है जिस पर स्पष्ट उल्लेख है कि निगम नर्मदा विकास संभाग के द्वारा दिए गए पानी का व्यवसायिक उपयोग नहीं कर पाएगी मेरे द्वारा कहा गया था कि यह शर्त हटवाना चाहिए प्रारूप में से लेकिन निगम के अधिकारियों द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया गया जो कि भविष्य में निगम पानी के रूप में आय के नये स्त्रोतों पर कार्य नहीं कर पाएगी तो भारी-भरकम आर्थिक हानि पहुंचेगी। इस हेतु अनुबंध के प्रारूप में से कंडिका नंबर 7 की शर्त को हटाना चाहिए। उसके पश्चात ही अनुबंध करना चाहिए। बिंदु क्रमांक 6- निगम देवास को नर्मदा विकास संभाग के द्वारा तकरीबन 496 करोड़ से अधिक का जो बिल दिया गया है वह बिल माफी हेतु निगम परिषद ने संकल्प पारित कर शासन को भेजना चाहिए उस संकल्प में यह भी उल्लेख करना चाहिए कि आपके द्वारा जो पानी शिप्रा नदी में छोड़ा गया था वह हमारे डैम से होते हुए उज्जैन को दिया गया था। जिस पानी का निगम देवास द्वारा उपयोग ही नहीं किया गया उसके बावजूद भी उस पानी का बिल निगम देवास को दिया गया। इन बिंदुओं पर परिषद में चर्चा भी होना चाहिए और इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संकल्प पारित कर कार्य करना चाहिए। जिससे कि निगम की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी एवं भविष्य में नगर की आम जनता पर भी इसका भार नहीं पड़ेगा। बिंदु क्रमांक 7- अगर राज्य शासन क्षिप्रा डेम के नि:शुल्क उपयोग एवं वर्षाकालिन पानी जो कि डेम से देवास वाटर प्रोजेक्ट ले रही है उसमें अगर निर्णय निगम के पक्ष में नहीं देता है तो निगम को राज्य शासन से पानी की राशि डेम के संधारण एवं किराये की क्षतिपूर्ति की मांग राज्य शासन से करना चाहिए। ललित चौहान ने बताया कि मैं कई वर्षो से निगम की आर्थिक स्थिति, निगम की आय के नए स्त्रोतों एवं पानी के संवरक्षण, संवर्धन इन विषयों पर कार्य कर रहा हूं। अत: कही भी मेरी आवश्यकता पड़ती है तो में सदैव निगम प्रशासन और परिषद की सहयोग के लिए तत्पर हूं।
राज्य शासन अगर नगर हित में निर्णय न ले तो निगम को क्षतिपूर्ति की मांग करना चाहिए – नगर निगम आमजनता के जनहितैषी मुद्दों को परिषद में रख करें संकल्प पारित – निजी संस्था से डेम में एकत्रित वर्षाकालीन पानी की कीमत ले निगम
