————————- नड्डा की नसीहत के मायने
भाजपा के राष्ट्रीयअध्यक्ष जेपी नड्डा हाल ही में भोपाल आए और मप्र भाजपा कोर कमेटी की बैठक में सत्ता-संगठन में समन्वय को लेकर पार्टी के नेताओं को नाराजगी भरे लहजे में तमाम नसीहतें देकर चले गए। नड्डा की नसीहतों के पार्टी में अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। नड्डा नसीहत में यह स्पष्ट कर गए कि मैं न विधानसभा चुनाव की पार्टी स्तर पर तैयारियों को लेकर खुश हूं, और न मप्र भाजपा संगठन के जिम्मेदार नेताओं की कार्यशैली से संतुष्ट हूं। ऐसे में राजनीतिक विज्ञानी तो नड्डा की नसीहतों का यही निष्कर्ष निकाल रहे हैं कि, मप्र भाजपा संगठन में जल्द कुछ बदलाव होने वाला है। हालांकि प्रदेश में कोई भी बदलाव अब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद ही होगा।
— खतरे में मंत्रीजी की सियासत
सरकार में सबसे कद्दावर और एक समय सरकार के सबसे बड़े संकट मोचक के रूप में उभरे मंत्रीजी इन दिनों खुद को मुसीबत में अनुभव कर रहे हैं। उन्हें विधानसभा चुनाव के पहले अपनी सियासत पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। दरअसल कोर्ट की तलवार तो इन मंत्री के निर्वाचन पर पहले से ही लटक ही रही है। इसके साथ उनके राजनीतिक विरोधियों ने उनकी चारित्रिक रूप से घेराबंदी शुरू कर दी है। वो यह कि, स्त्रैण होने के आरोप लगाकर मंत्रीजी की चारित्रिक हत्या कर दी जाए। हालांकि मंत्रीजी इन संकटों से मुक्ति के लिए प्रदेश के सिद्ध शक्तिपीठों पर टोने-टोटके और पूजा-अनुष्ठान करा रहे हैं। देखना यह है कि, टोने-टोटके मंत्रीजी को मुसीबतों से मुक्ति दिला पाते हैं या नहींं। —
भाजपा में जीतू का भेदिया
कांग्रेस से भाजपा में आए एक अमानुष (कुछ अलग दिखने वाले) नेताजी की निष्ठाएं भी जट हैं। वे भाजपा में आकर भी अपने कांग्रेसी आंका जीतू भिया के प्रति वफादार बने हुए हैं। ये अमानुष नेताजी ट्वीटर के जरिए कांग्रेसी आंका जीतू भिया के दाएं-बाएं वाले दूसरे नेताओं पर तो हर दिन जमकर राजनीतिक बाण चला रहे हैं। लेकिन जीतू भिया के मामले में दरियादिल बनेे हुए हैं। इस वजह से भाजपा में इन नेताजी की निष्ठाएं संदिग्ध होती जा रही है। उन पर जीतू का भेदिया होने के आरोप लग रहे हैं। प्रदेश भाजपा के मुखिया तक भी इन नेताजी की शिकायत पहुंची है। नारदजी कहते हैं कि, भाजपा में स्वीकार्यता नहीं हो पाने से नेताजी की स्थिति घर के रहे न घाट के जैसी होती जा रही
। — बुंदेलखंड में तीन भाजपा
मप्र कांग्रेस में तो जितने नेता हैं उतनी कांग्रेस हैं, ऐसा कहा जाता है। लेकिन भाजपा के संदर्भ में यह बात सुनने में जरा अटपटी लगती है। जी हां, बुंदेलखंड में तीन अलग-अलग भाजपाएं चल रही हैं। गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह और गोविंद राजपूत तीनों भाजपा सरकार में मंत्री हैं, पर तीनों अपने-अपने ढंग से बुंदेलखंड में भाजपा को चला रहे हैं। गोपाल सागर भाजपा, भूपेंद्र शिवराज भाजपा और गोविन्द सिंधिया भाजपा चला रहे हैं। तीनों मंत्रियों की अलग-अलग भाजपा में कार्यकर्ता चक्करघिन्नी और पार्टी डैमेज हो रही है। नारदजी कहते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की यह बंदरबांट भाजपा सेहत के लिए शुभ संकेत तो कतई नहीं है।
— दिग्विजय के भरोसे कांग्रेस
दिग्विजय सिंह यानी मिस्टर बंटाढार के नारे के सहारे भाजपा ने 2003 में वर्षों का अपना सत्ता का वनवास खत्म किया था…और तब से अब तक मप्र की सत्ता में काबिज बनी हुई है… अब कांग्रेस उन्हीं मिस्टर बंटाढार दिग्विजय के सहारे आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करने के लिए जोर मार रही है…दिग्विजय के सहारे कांग्रेस की नैय्या पार लगेगी या नहीं, यह तो विधानसभा चुनाव में ही पता चलेगा…लेकिन राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि कांग्रेस ने दिग्विजय को मैदान में उतारकर फिर भाजपा की सत्ता की राह जरूर आसान कर दी है…नारदजी कहते हैं कि कांग्रेस को हराने के लिए भाजपा की जरूरत ही नहीं है, उसके लिए दिग्विजय ही काफी हैं…इसीलिए भाजपाई भी बोल रहे हैं-जय मिस्टर बंटाढार की…! -Email id-maheshdixit66@gmail.com/(mb)-9893566422
