कलेक्टर के नोटिस, थका दिया विकास यात्रा ने, विधायकों का विरोध, वकीलों की हड़ताल,

भगत- बाबा प्रणाम।

बाबा—- बेटा प्रणाम इतने दिन से कहां था।

भगत – बाबा ब्याह शादी का सीजन चल रहा है ऊपर से मार्च एंडिंग का और राजनीति भी गर्म है। प्रशासनिक क्षेत्र में भी धूम है।

बाबा– हां बेटा कलेक्टर के शोकॉज नोटिस का भी असर है। कलेक्टर गुप्ता ने 4 महीने में ही 200 से अधिक कारण बताओ नोटिस भेजकर पूरे जिले में सख्त माहौल कर दिया है ।

भगत– पूर्व कलेक्टर भी देते थे नोटिस तो।

बाबा — हां कई कलेक्टरों के नाम देवास व्यवस्था में सुधार में दर्ज है पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने विकास विजन पर कार्य किया लंबे कार्यकाल के बाद मात्र 20 से 25 नोटिस दिए ।

भगत —जन सुनवाई का समय भी बढ़ गया।

बाबा –आम जनता का विश्वास जब बढ़ जाता है तो कलेक्टर कार्यालय पर भीड़ बड़ी जाएगी अब जनसुनवाई यानी कलेक्टर दरबार देर तक लगता है। जिस तरह शादी में समय कुछ लोग लिखते हैं आपके आगमन तक उस तरह कलेक्टर कार्यालय मैं देर तक कलेक्टर से आमजन मिल सकता है। वैसे रोज ही कलेक्टर दरबार लगता है देवास के बाद अगर इनका अनुसरण कोई कर रहा है तो वह है सोनकच्छ एसडीएम संदीप शिवा जिनके यहां भी फरियादी की फरियाद कम से कम दिल से सुनी जाती है।

भगत– एडीएम और  सीईओ भी मेहनत कर रहे हैं। बाबा—- एडीएम महेंद्र कवचे अभी तो अकेले ही जिम्मेदारी निभा रहे हैं डिप्टी कलेक्टर प्रियंका मीमरोत् और शिवानी टटरेजा छुट्टी पर है शिवानी के पास कन्नौद खातेगांव का भी प्रभार है प्रजापत ने अभी ज्वाइन ही नहीं करा और ऐसे में जब जिला कलेक्टर पूरे समय में अधिकांश समय कलेक्ट्रेट कार्यालय में दे रहे हैं एडीएम वैसे भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं वह निर्विवाद रहे हैं और जब तबादलों की सूची का दौर चल रहा है तब देवास में कलेक्टर के बाद यदि कोई चुनाव आयोग से बच सकेंगे तो वहां एडीएम महेंद्र कवचे ही रहेंगे वह बाकी सारे नए डिप्टी कलेक्टर , और जिला पंचायत सीईओ प्रकाश चौहान जो पहले देवास एडीएम की अच्छी पारी खेलने के बाद अब सीईओ जिला पंचायत में कई महत्वपूर्ण मिशन हाथ में लेकर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।

भगत —देवास एसडीएम।

बाबा—- चांदी चांदी हो गई भक्ति में भी शक्ति होती है भगवान के घर देर है अंधेर नहीं है।

भगत—- बाबा विकास यात्रा में सत्ताधारी विधायकों का खुलकर विरोध हो रहा है।

बाबा —–पहली बात तो यात्रा बहुत लंबी खिंच गई इतने दिन में विधायक भी थक गए और प्रशासनिक अधिकारी और जनता भी फिर जिन का विरोध पहले से चल रहा है वह तो ज्वाला बन कर सामने आएगा ही पहले भी इन विधायकों का खूब विरोध हो चुका है अब इनका विरोध नई बात नहीं है अगर पार्टी समझदार है तो टिकट बदल देना चाहिए। ऐसा नहीं कि सभी जगह विरोध हो रहा है कहीं जगह स्वागत सत्कार भी इससे अधिक हो रहा है जो विधायक पूरे 4 वर्ष जनता के बीच संपर्क में रहे और एक जुनून की तरह विकास कार्य किया उनका वार्ड वार्ड में सम्मान और ऐतिहासिक स्वागत भी हो रहा है। बस इस बार विकास यात्रा बहुत लंबी खींचा गई पांच 10 दिन तक की विकास यात्रा ठीक थी इतनी लंबी की कार्यकर्ता से लेकर खुद विधायक और अधिकारी तो अब इसको बेगार मानकर मजबूरी का नाम विकास यात्रा मान रहे हैं। वैसे विकास यात्रा में कुछ अच्छे काम भी हो गए वह अलग बात है परंतु सबसे बड़ी बात कि लंबी तेज गई विकास यात्रा ।

भगत -सोनकच्छ में बीन दूल्हे  बारात विकास यात्रा निकली।

बाबा —जिले में 2 सीट भारतीय जनता पार्टी की गई थी जिसमें से एक किस्मत से वापस आ गई सोनकच्छ और हाटपिपलिया में है हाटपिपलिया में पाला बदलने के कारण मनोज चौधरी भाजपा को गिफ्ट में मिले अब सोनकच्छ मात्र ऐसी विधानसभा  जहां से प्रदेश में कई दावेदार है और इस बार भारतीय जनता पार्टी की विकास यात्रा यहां अधिकारी और पूर्व विधायक और दावेदार के साथ निकली यहां विरोध किसका होता । भाजपा में इस सीट पर  प्रदेश के कई नामी नेता की नजर है।

भगत -कांग्रेस में फिक्स है।

बाबा –कांग्रेस में तो टिकट ही यहीं से बटेंगे जिले के। भगत– हाटपिपलिया सोनकच्छ  पेक्ट होना है।

भगत– मतलब बघेल परिवार का टिकट पक्का।

बाबा –हां बेटा इस बार सज्जन भैया के लिए भी मशक्कत वाला मामला है पिछली बार बघेल साहब को फ्री करके देख लिया अबकी बार मामला उल्टा है ।अब राजवीर सिंह बघेल जिनका हाटपिपलिया के साथ सोनकच्छ में भी अच्छा वर्चस्व है इसलिए कोई रिस्क नहीं लेंगे समझौता एक्सप्रेस में दोनों टिकट जाएंगे।

भगत—- बाबा दोनों कौन से हाटपिपलिया तो एक ही सीट है।

बाबा —बेटा देवास में भी किसी से समझौता ही है वह अंदर की बात है राजनीति के चाणक्य समझ सकते हैं प्रवेश का प्रवेश क्यों हो रहा है और अंतिम मोहर कहां से लगेगी।

भगत —समझ गया बाबा बहुत ही गहरी राजनीति है । एक पायदान के बाद भाजपा कांग्रेसी एक हे।

भगत —-मनीष चौधरी भी खातेगांव में सक्रिय है ।

बाबा– छात्र राजनीति मैं विरोधी नेता के रूप में उभर कर सामने आए मनीष चौधरी सज्जन वर्मा के साथ दिल्ली से भी टिकट लाने का दम रखते हैं लेकिन  मनीष के सामने बाहरी प्रत्याशी होने का माइनस पॉइंट है बस इस पॉइंट को प्लस बना ले तो कुछ हो सकता है और फिर मनीष ने अभी तक एक भी पार्षद तक का चुनाव नहीं लड़ा पहला चुनाव सीधे कन्नौद खातेगांव सीट जो महत्वपूर्ण है वहां से मनीष की तैयारी जोरों पर है बस टिकट का मामला महत्वपूर्ण है।

भगत –भाजपा से भी दीपक जोशी दम भर रहे ।

बाबा—- वैसे आशीष शर्मा भी अंगद का पैर है थोड़ा बहुत विरोध है लेकिन इनका मामला जमा हुआ है दीपक जोशी चुनाव हारने के बाद अब सक्रिय हुए हैं वह हाटपिपलिया के साथ कन्नौद खातेगांव दोनों जगह पर प्रयासरत है।

भगत— देवास में भी अंगद का पैर है।

बाबा —हां बेटा यहां तो रिकॉर्ड बन गया है और यहां पर दूसरा दावेदारी भी नहीं करता प्रत्याशी को पूरे 5 साल तैयारी का मौका मिलता है  राजे का वर्चस्व भी कायम है जमीनी पकड़ भारी है।

भगत —दूसरे विधायक जमीन के कारण ही हार सकते हैं ।

बाबा— लैंड पूलिंग का मामला ग्रामीण क्षेत्र में ज्वलंत मुद्दा है इसी को लेकर हाटपिपलिया में भारी विरोध हो रहा है। गोपनीय रिपोर्ट के बाद भी सत्ताधारी इसे समझ नहीं पा रहे हैं।

भगत– कमिश्नर भी जमीन पर काम करने वाले हैं। बाबा –एक जमीनी नेता अलग होते हैं और एक जमीन वाले नेता फिर कमिश्नर जमीन से जुड़े होने के साथ नेता जी से भी बहुत ही  खास होने के कारण कई बार बच भी जाते हैं ।राजे खेमे के कारण कमिश्नर को निगम की कमिश्नरी के साथ प्राधिकरण का गिफ्ट अलग मिला और अभी शंकरगढ़ की सफलता से कमिश्नर फिर फार्म पर है।

भगत— पुलिस अधीक्षक भी।

बाबा –पुलिस अधीक्षक डॉ शिव दयाल सिंह के साथ कई पुलिस अधिकारी अभी भी फार्म पर चल रहे हैं 1 माह 2 माह और करते-करते चुनाव की तारीख के पहले तक लगता है पूरा कार्यकाल करके ही जाएंगे। पुलिस ने अभी दुर्घटना में मर्डर वाला मामला अच्छा ट्रेस किया है जिसने दुर्घटना बता कर हत्या कर दी गई थी ऐसे कई प्रकरण पुलिस ने सुलझाए हैं बस पुलिस अधीक्षक को सट्टे जुए के अड्डे के खिलाफ भी एक बार तो सख्त कदम उठाकर कार्रवाई करना चाहिए इन कुछ लोगों के कारण सारे किए कराए पर पानी फिर जाता है। कोतवाली थाना भी खाली है जल्दी ही इस पर निर्णय ले लेना चाहिए।

भगत — शिव बारात अच्छी निकली।

बाबा– देवास में धीरे-धीरे से शिव बारात मैं कुछ बढ़ते ही जा रहा है इस बार राजू खंडेलवाल और यादव टीम में सांसद सोलंकी के जुड़ने से उत्साह बढ़ गया है । नवरात्रि विसर्जन चल समारोह के बाद अब शिवरात्रि पर निकलने वाली शिव बारात भी आकर्षण का केंद्र रहती है।

भगत– शिवरात्रि पर भी ब्रिज पर अंधेरा छाया रहा। बाबा –बेटा दिया तले अंधेरा की कहावत यह चरितार्थ होती है नीचे कलेक्टर से लेकर कमिश्नर और जनप्रतिनिधि के मकान ऊपर महाशिवरात्रि के दिन अंधेरा कायम विकास यात्रा की पोल खोलता यह ब्रिज सभी दूर चकाचक और ब्रिज पर आओ तो अंधेरा उसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है ।

भगत– बाबा कांग्रेस ने मुद्दे उठाए।

बाबा– बेटा ब्रिज के साथ कलेक्टर कार्यालय में ऑफिस ऑफिस का मुद्दा भी उठाया आम जनता आज भी ऑफिस ऑफिस ढूंढती है जिला कलेक्टर के पूर्व कार्यालय पर प्रशासन केवल एक बोर्ड लगा देगी कौन सा ऑफिस कहां है तो आम गरीब परेशान नहीं होगा लेकिन अभी तक प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया है।

भगत– बाबा महापौर ने जनसुनवाई भी शुरू की है। बाबा —अच्छी बात है महापौर यदि खुलकर जनता के बीच जनता दरबार लगाकर बैठती है किसी का कुछ तो फायदा होगा जनप्रतिनिधि में हिम्मत चाहिए फिर देरी से और कई कारण तो हमारे लिए भी छोड़े जाते हैं। अब नगर निगम में आम जनता को कोई तो मिलेगा वैसे सभापति और पार्षद भी मिल ही जाते हैं ।2 वर्ष के कमिश्नर काल में आम जनता के लिए कोई दरबार लगाकर नहीं बेटा कोई समस्या सुनने वाला नहीं था । अधिकारी इंजीनियर राजा थे जो चाहा वही किया ।अब जनता राज आया है तो महापौर में कुछ तो अच्छी शुरुआत की।

भगत– तहसील में शांति है।

बाबा कलेक्ट्रेट कार्यालय जाने के बाद वैसे भी तहसील और एसडीएम कार्यालय मात्र होने से शांति तो है ही और दूसरी बात हमेशा मीडिया में छाए रहने वाली महिला तहसीलदार पूनम तोमर मार्च एंडिंग में व्यस्त है और कुछ नवागत कलेक्टर के कारण भी और कन्नौद खातेगांव बागली में तो तहसीलदार राज ही है।

भगत -वकील साहब की हड़ताल का भी असर है।

बाबा –सही बात है देवास बार एसोसिएशन द्वारा लंबी हड़ताल के बाद अब आमजन को परेशानी आना शुरू हो गई है वकील तो वकील होते हैं जिनके बिना कोर्ट और तहसील एसडीएम एसडीएम कार्यालय सुने सुने नजर आते हैं। प्रदेश के न्यायालय के उच्च अधिकारी द्वारा शीघ्र हल निकालना चाहिए वरना आमजन की समस्या बढ़ती जा रही है । वैसे अभिभाषक संघ की मांग जायज भी है। हमारी जनता की भी एक मांग है न्यायालय का एक और प्रकरण सर्विस रोड वाला भी निकाल कोई भी जाना चाहिए सुप्रीम कोर्ट यहां पर क्यों देर कर रहा है। चीन की दीवार की तरह कोर्ट की दीवार सड़क के बीच खड़ी है न्यायालय परिसर के बाहर बहुत जगह है ।

भगत- कई कर्मचारी संगठन की हड़ताल पर जा सकते हैं।

बाबा —चुनाव वर्ष है इसे आंदोलन का वर्ष भी बोलना ही चाहिए सभी को मालूम है कि थोड़ा सा भी कुछ करेंगे तो ज्यादा नहीं तो थोड़ा तो मिल ही जाएगा अब सभी कर्मचारी संगठन इस प्रयास में है कि कुछ ना कुछ तो कर्मचारियों के लिए करवा हि ले।

More posts