भगत -बाबा प्रणाम। दादा भाजपा विकास यात्रा निकाल रही है।
बाबा –प्रणाम बेटा, हां बेटा भाजपा कार्यकाल में विकास तो हुआ है लेकिन नेताजी का भी विकास हुआ है। कुछ अधिकारियों की चल निकली है। मामा जी आप भले ही मंच से अधिकारियों पर अंकुश लगाना चाह रहे हैं ,वह भी चुनावी वर्ष के दौरान तो जनता सब समझती है मामा जी पहले ही आप ऐसे हो जाते । जितना विकास कार्य हुआ है यदि पूरा इमानदारी से हो जाता तो बात कुछ और होती ।फिर कहीं विधानसभा में रिकॉर्ड विकास कार्य हुआ है काम खुद बोलता है। मामा जी अच्छा गणित लाए विकास यात्रा विधायक की और पूरा प्रशासन उसे सफल बनाने में लगेगा पूरे प्रदेश में तो विकास यात्रा सफल होगी ही हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा चोखा की तरह भाजपा विधायक को सबसे ज्यादा लाभ है पूरी तैयारी मेहनत स्वयं करना पड़ती अब साथ में पूरा प्रशासन शासन है यह श्री गणेश से चुनाव प्रचार अभियान का इसके बाद स्वयं चुनाव लड़ना है इसमें विधायक को मालूम भी पड़ जाएगा कहां कमी है और कहां वे अच्छी स्थिति में है कई विधायकों को पहले दूसरे दिन में ही विरोध के कारण दिन में तारे नजर आ गए हैं पूरे प्रदेश में कई विधायक का खुलकर विरोध हुआ तो कई विधायक का पलक पावडे बिछा कर स्वागत जिसने पूरे 4 साल मेहनत की उनको जनता दिल से स्वीकार कर रही है तो आम जनता को कोरोना काल से लेकर अभी तक याद न करने वाले विधायक जब क्षेत्र में जा रहे हैं तो विरोध तो होगा ही ।फिर भी अभी प्यारे प्रशासन शासन साथ है तो सरकारी नजरिए से विकास यात्रा सफल एक मान लो । जबकि आम जनता केवल अपने बीच लोकप्रिय हमेशा रहने वाले विधायक को ही स्वीकार कर रही है विकास कार्य का प्रचार करना नहीं पड़ता है विकास तो खुद बोलता है।
भगत –ग्रामीण क्षेत्र में भीड़ कम है।
बाबा –मामाजी के अधिकारी वर्ग को यह नहीं मालूम कि यह शादी विवाह का सीजन हे और गांव में शादी ब्याव नहीं छोड़ सकते आने जाने का बहुत महत्व है। नेताजी की यात्रा में नहीं आए तो चलेगा परंतु बेयजी ब्यानजी और रिश्तेदारों से बुरे नहीं बन सकते इसलिए थोड़ी सी भीड़ ग्रामीण क्षेत्र में दिखाई दे रही है अधिकारी भी रुचि नहीं ले रहे हैं कई आयोजन अधिकारी नदारद है।
भगत —सीता मैया का बजट किसी को समझ में आया किसी को पल्ले ही नहीं पड़ा।
बाबा — सिर में दर्द हो रहा है तो पैर में मार लो सिर का दर्द कुछ देर के लिए कम हो जाएगा। सीता मैया का केंद्रीय बजट इस बार थोड़ा लग रहा साइकिल खेल खिलौने और ऑटोमोबाइल से लेकर मोबाइल तक सस्ते होंगे तो अंगूर की बेटी और सिगरेट महंगी कर अच्छा ही किया ।विलासिता की वस्तु पर चाहे कितना टैक्स लगा दो ।लेकिन आम जनता को दिन रात उपभोग में आने वाली सामग्री पर राहत दोगे तो बजट अच्छा ही होगा। सबसे ज्यादा तकलीफ में मध्यम वर्ग है जिसके लिए बजट में बहुत कम स्थान रहता है ।या तो गरीब वर्ग या उच्च वर्ग इस बार मध्यमवर्गीय कभी थोड़ा सा ध्यान रखा गया है ।500000 से बढ़ा का टैक्स छूट 700000 कर दी है। वैसे कर्मचारी और आम जनता के लिए ठीक है लेकिन इससे व्यापार व्यवसाय पर भी प्रभाव पड़ेगा 500000 के बाद 200000 छूट पाने के लिए कर्मचारी या आम आदमी कहीं नहीं कहीं पर निवेश करने के साथ दान से लेकर सभी जगह हाथ पैर चला कर टैक्स बचाता था। अब पूरे दो लाख की बचा लेगा तो बाजार में पैसा घूमेगा कैसे ।सेवा कार्य होम लोन बच्चों की ट्यूशन फीस बीमा एफडी अब आवश्यकता नहीं तो सीधे वह दो लाख भी बचाकर बाजार में निवेश करने से भी बचेगा। उद्योगपति व्यापारी के लिए वही की वही बात है कान इधर से पकड़ो या उधर से खरबूजा छुरी पर गिरे या खरबूजे पर छुरी कटना खरबूजे को ही है। विकास कार्य के लिए बजट अच्छा रखा गया है तो शिक्षा के क्षेत्र में जरूर निराशा रही है फिर हमारी सकारात्मक सोच रहती है हम ऑडिटर तो है नहीं कि हर बात में कुछ न कुछ गलती निकाल ले ।इस बार बजट पर विपक्ष ने भी ज्यादा लोड नहीं लिया या लेने जैसी बात नहीं होगी ।
भगत — बाबा हाथ से हाथ जोड़ो यात्रा में इस बार राजानी ने खेल खेल दिया ।
बाबा –इसी को कहते राजनीति अभी तक शहर कांग्रेस अध्यक्ष को दरकिनार कर अपने दम पर विधानसभा की दावेदारी करने वाले दोनों दावेदार प्रदीप चौधरी और प्रवेश अग्रवाल को शहर कांग्रेस के मंच पर लाकर अपना प्रभाव दिखा दिया कि आखिर संगठन संगठन है उससे बाहर कैसे जाओगे और अब तो टिकट मिलना है जिसमें शहर और जिले के बिना चाहे कितनी ही मेहनत कर लो टिकट आसानी से नहीं मिल सकता मौके का लाभ राजानी ने उठाया और इतने दिनों तक अपने दम पर आयोजन करने वाले प्रदीप चौधरी और प्रवेश अग्रवाल को शहर कांग्रेस यानी मनोज रजनी के कैंप में आना ही पड़ा। अब दोनों आयोजन करेंगे तो मजबूरी का नाम ही सही मनोज राजानी तो रहेंगे ही और यही राजानी चाहते भी थे कांग्रेस की राजनीति में चाणक्य कहे जाने वाले राजानी ने भी दो नेताजी को तो अपने पाले में ले लिया। लेकिन राजानी के विरोधी की संख्या भी कम नहीं है और कुछ विरोधी भी कम नहीं है।
भगत — मेयर इन काउंसिल की बैठक का बहिष्कार। बाबा —बेटा नगर निगम में इस समय इंजीनियर और अधिकारियों का ही राज है 2 वर्ष एक तरफा राज करने वाले अधिकारी इंजीनियर पार्षदों को कुछ नहीं समझ रहे हैं और पार्षदों के आक्रोश का पहला ट्रेलर तो शीतल गहलोत ने दिखा दिया दूसरा वैसा नहीं दिखा सकते तो कम से कम अपना विरोध तो दर्ज कर सकते हैं और सत्ता के सिरमोर कहे जाने वाले कुछ नेता नगर निगम में हाथ पैर नहीं चला पा रहे हैं या यूं कहें की मजबूरी इतने हैं कि चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं मेयर इन काउंसिल में विधायक राजे के खास गणेश पटेल धर्मेंद्र सिंह बैंस विनय सांगते और अजय पंडित को मजबूर होना पड़ा समझदार महापौर प्रतिनिधि जिन्होंने अभी तक कई विवादित मामले बढ़ते बढ़ते सुलझा लिए उन्होंने बाकी सदस्य को तो फोन करके मना लिया यह चार महारथी अब ज्यादा विरोध करते उससे पहले ही कुछ बातें मान ली गई है और ज्यादा विरोध करते भी तो अचानक विकास यात्रा आ गई रोज शाम को नगर निगम में बैठने की बजाए विकास यात्रा में लगे रहो उसके बाद फिर जताना विरोध।
भगत– नगर निगम में पी सी के भी नए रेट आ गए हैं। बाबा –सही बात है बेटा सबसे पहली बात तो हम आम जनता को समझा दे उनको पीसी का मतलब नगर निगम में ठेकेदार द्वारा अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक को दी जाने वाली आर्थिक राशि है सीधे भाषा में रिश्वत। जो नगर निगम में पहले 25 से 30% पहुंच गई थी पूरे प्रदेश में देवास नगर निगम का नाम आता था और ठेकेदारों ने देवास नगर निगम में काम करना बंद कर दिया था अब ठेकेदारों के लिए अच्छी खबर यह है कि नगर निगम की पीसी नई परिषद में घट गई है ऊपर 4% दूसरे नंबर पर 3% और फिर इंजीनियर और एक –एक परसेंट सब मिलाकर 10 से 15% मैं ठेकेदार का काम हो जाएगा इसमें अभी कमिश्नर विशाल सिंह ने अपने आप को दूर रखा है बड़े-बड़े काम की बात अलग है नगर निगम में पीसी कम होने के बाद अब ठेकेदार की संख्या बढ़ना चाहिए ।लेकिन ठेकेदार के साथ एक समस्या और है कि उनका समय पर पेमेंट नहीं होता है जिसके कारण वे अगला कार्य लेने से डरते हैं जबकि बड़े ठेकेदार कुछ इंजीनियरों के चहेते होने के कारण सीधा लाभ ले लेते हैं अब अगर नगर निगम मैं जनप्रतिनिधि को काम कराना है तो ठेकेदारों के लिए पीसी घटाने के प्रोत्साहन के साथ समय पर पेमेंट का पक्का विश्वास दिलाना होगा ।वरना नगर निगम में छोटे-छोटे काम करने वाले ठेकेदार धीरे-धीरे दूसरे विभागों में नजर आएंगे अभी तक कुछ ठेकेदार के हाथ पैर तो क्या सिर भी कढ़ाई में है।
भगत –बाबा पीसी तो पूरे देश में चल रही है हर विभाग में है।
बाबा –सही बात है बेटा ऊपर से पैसा लेकर आओ तभी से शुरू हो जाता है खेल अब यह शिष्टाचार बन गया है बस यह जरूर है कि दूसरे विभागों में यह 8 से 10% है बस नगर निगम नहीं हद कर दी थी । लोक निर्माण विभाग प्रधानमंत्री सड़क और सिंचाई विभाग में अलग-अलग शहरों में अलग-अलग पी सी है। भगत —सबसे बड़ा खेल कोटेशन में होता है। बाबा –अभी नई परिषद में तो कमिश्नर विशाल सिंह ने स्पष्ट कोटेशन का मना कर दिया है बहुत आवश्यक कार्य होने पर सीधे कमिश्नर की परमिशन पर ही कोटेशन से कार्य होंगे इससे कई ठेकेदारों और इंजीनियर को पहुंचा है। नगर निगम ने बंद कर दिया लेकिन कई विभागों में अभी भी जारी है । नवागत कलेक्टर के आने से कई विभाग संभल संभल कर कार्य कर रहे हैं इसमें सीधे जांच के घेरे में आ जाते हैं इंजीनियर और साहब।
भगत —कलेक्टर का अभी तक वही जुनून जोश है। बाबा– सही बात है छुट्टी के दिन भी यदि जिले का राजा काम करेगा तो नीचे सबको मजबूरी में ही सही काम तो करना है, फिर अभी आकस्मिक निरीक्षण जारी है ।पता नहीं कलेक्टर का मन कब किधर चले जाए उसी और आकस्मिक निरीक्षण हो जाए। किसी को पता भी नहीं चलता कि साहब आज क्या करेंगे। बस यही सस्पेंस और छोटा सा डर अधीनस्थ का काम इमानदारी से चला रहा है। भले ही थोड़ा सा ही सही व्यवस्था में कुछ सुधार तो हो रहा है धीरे-धीरे ही सही बदलाव तो हो रहा है ।आमजन में कुछ माह में ही कलेक्टर की छवि अलग बन गई है। अब कुछ और अधिकारियों ऐसे मिल जाए तो देवास जिला कुछ अलग ही नजर आएगा। मामा जी कुछ अधिकारी और ऐसे अंतिम दौर में ही भेज दो।
भगत –औद्योगिक थाने में नए टी आई चानना आ गए हैं।
बाबा –चंबल क्षेत्र में डकैतों को पानी पिलाने वाले इन काउंटर और कई तरह से अपराधों पर अंकुश करने वाले अजय चानना को बदले में उनको बहुत लंबे लूप लाइन में रहने के बाद मिला थाना।
भगत –कोतवाली थाना भी खाली हो गया है।
बाबा –शहर में कोतवाली थाना महत्वपूर्ण है और इस समय यहां पर आने के लिए देवास में अच्छी पारी खेल चुके उमराव सिंह और बागली से दीपक यादव का नाम चल रहा है ।पुलिस अधीक्षक के खास माने जाते हैं दीपक यादव, फिर भी संजू ,मनोज ,रवि, भी फार्म पर चल रहे हैं । पैलेस के साथ इनके खास होना भी जरूरी है। कोतवाली में जो भी आ जाए कुछ कार्य चलते रहेंगे जिनको अब बंद करना मुश्किल है। कुछ विद्वान के काम बेधड़क चल रहे हैं।
भगत —विद्वान तो सब पर भारी है उधर कोई हाथ नहीं डालता।
बाबा —समझ गया बेटा ढाई अक्षर प्रेम का जो समझ गया वही पार पा गया फिर विद्वान कहना ही ठीक है अभी दूसरा नाम लो तो पहले ही विवाद चल रहा है देश में ।बस ढाई अक्षर का मतलब समझ जाओ वही बहुत है पुलिस की मजबूरी का नाम भी ढाई अक्षर ही है।
भगत — बाबा पर्वत पर एडवेंचर होगा।
बाबा –हां बेटा देवास के लिए अच्छी बात है यहां पर मेले खेल महोत्सव के साथ अब शंकरगढ़ पहाड़ी का एडवेंचर भी रोमांचित करता है देवास शंकरगढ़ पहाड़ी कभी खदान संचालकों का खजाना थी और पांच 10 वर्ष अगर शासन ध्यान नहीं देता तो पहाड़ी इतिहास में कई गुम हो जाती जिस तरह नजूल वाले कहीं सरकारी जमीन घुमाकर कॉलोनाइजर को भेंट कर चुके हैं ऐसे ही यह पहाड़ी खुदने के बाद नई पीढ़ी को याद नहीं रहती कि यहां भी कुछ था पूर्व कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला डीएफओ मिश्रा कमिश्नर और जनप्रतिनिधि की मेहनत रंग लाई है डीएफओ मिश्रा ने तो लगातार पौधारोपण और इस पहाड़ी को जीवित रखने के लिए बहुत कुछ किया है उस तरह जिस तरह बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना यानी यह जमीन वन विभाग की नहीं होने के बाद भी वन विभाग ने यहां बहुत कुछ किया कलेक्टर अगर कुछ अच्छा करके जाए नाम तो रह जाता है चंद्रमौली शुक्ला की मेहनत रंग ला रही है नवागत कलेक्टर और कमिश्नर भी इसे आगे बढ़ा रहे हैं नहीं तो पूर्व कलेक्टर जाने के बाद नए कलेक्टर कुछ योजनाओं पर ध्यान नहीं देते परंतु गुप्ता कुछ अलग मिजाज के हैं। देवास में एडवेंचर के लिए आसपास के शहरों से भी जनता आती है यहां व्यापार व्यवसाय बढ़ने के साथ आसपास के क्षेत्र की रौनक भी बढ़ गई है जमीन के दाम तो आसमान छू रहे हैं। आम आदमी की दिनभर आपाधापी की दौड़ और तनाव में जीवन में स्वस्थ मनोरंजन और खुशी देता है एडवेंचर। देवास के युवा खिलाड़ियों के लिए तो यह उपहार है ।खासकर सेना पुलिस की तैयारी करने वाले और कुछ अलग करने वाले युवा के लिए शंकरगढ़ पहाड़ी।
