पूरे ढाई वर्ष बाद अचानक बागली के पूर्व विधायक सक्रिय हुए और उनको किस की समस्या अपनी समस्या लगने लगी और वह पहुंच गए कलेक्टर जनसुनवाई में हा जिले में गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों को हो रही परेशानियों और ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना के अधूरे क्रियान्वयन को लेकर बागली क्षेत्र के पूर्व विधायक पहाड़ सिंह कन्नौजे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर से मुलाकात कर किसानों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए विस्तृत आवेदन सौंपा। पूर्व विधायक ने बताया कि क्षेत्र के किसान गेहूं उपार्जन केंद्रों पर स्लॉट बुकिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। कई किसानों का गेहूं गुणवत्ता हीन बताकर नहीं लिया जा रहा, जबकि केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने मां नर्मदा वेयरहाउस सहित उपार्जन केंद्रों पर स्टैकिंग, हम्माल व्यवस्था और ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में गड़बड़ी की शिकायत भी उठाई। आवेदन में उल्लेख किया गया कि कुछ केंद्रों पर पुराने और खराब बारदानों के कारण गेहूं गिरकर खराब हो रहा है, जिससे किसानों और शासन दोनों को नुकसान हो रहा है। साथ ही किसानों के साथ अभद्र व्यवहार और अनावश्यक बहस की शिकायतें भी सामने आई हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि कई केंद्रों पर हम्मालों की व्यवस्था नहीं होने से किसानों को दूसरे केंद्रों के मजदूरों से तौल करवानी पड़ रही है, जिससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की नल-जल योजना को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि योजना के लिए करीब 400 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन अभी तक काम व्यवस्थित रूप से पूरा नहीं हो पाया है और लगभग 90 प्रतिशत गांवों के लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। पूर्व विधायक ने प्रशासन से दोनों मामलों की जांच कर जल्द समाधान करने की मांग की है, ताकि किसानों और ग्रामीणों को राहत मिल सके। देवास की जनता की प्यास बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका देवास की मोक्षदायिनी नदी से पूरा की है और इस वर्ष शासन प्रशासन ने इस और कोई खास ध्यान नहीं दिया है जिसको लेकर अब आवाज उठने लगी है शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली क्षिप्रा नदी की सफाई और गहरीकरण को लेकर जनसुनवाई में एक अनोखी पहल देखने को मिली। मां क्षिप्रा नदी बचाओ फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश बराना प्रजापति ने भारतीय परंपरा के अनुसार देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह को पीले चावल भेंट कर क्षिप्रा नदी के संरक्षण के लिए स्नेहपूर्वक आमंत्रित किया। संस्था की ओर से दिए गए आवेदन में बताया गया कि वर्तमान में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में क्षिप्रा नदी की उपेक्षा हो रही है, जबकि यह नदी देवास की पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। आवेदन में नदी की सफाई, गहरीकरण और पुनर्जीवन के लिए सामूहिक अभियान शुरू करने की मांग की गई क्षिप्रा नदी पर अमावस्या, पूर्णिमा और अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते हैं, लेकिन घाटों पर पानी नहीं होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। साथ ही अलग-अलग गांवों के गंदे नालों का पानी नदी में मिलने से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। संस्था ने मांग की है कि मेरा युवा भारत (नेहरू युवा केंद्र), मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, आनंद विभाग सहित सामाजिक संगठनों को जोड़कर एक विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि नदी को प्रवाहमान बनाकर जल संरक्षण के लक्ष्य को पूरा किया जा सके। कलेक्टर ने दिया आश्वासन जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि शुक्रवार से क्षिप्रा नदी से संबंधित कार्य शुरू करवाने की दिशा में पहल की जाएगी।
